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अत्याधुनिक लैब के जरिए 18 घंटे की बजाए अब आधा घंटे में होगी पेयजल की जांच

कलायत में हरियाणा महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने लोक निर्माण विश्राम गृह परिसर से इस आधुनिक सुविधाओं से सु-सज्जित वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

अत्याधुनिक लैब के जरिए 18 घंटे की बजाए अब आधा घंटे में होगी पेयजल की जांच
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कलायत में मोबाइल लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना करतीं महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा

कैथल : हरी के प्रदेश हरियाणा में अब स्वच्छ जल की धारा बहेगी। हर नल में गुणवत्ता आधारित जल की सप्लाई पहुंचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार ने प्रभावी परियोजना तय की है। इसके तहत सार्वजनिक जल पंपों की मौका स्थल पर ही हाथों-हाथ जांच होगी। इसके लिए एक करोड़ की अत्याधुनिक पेयजल मोबाइल टेस्टिंग लैब वाहन को प्रदेश में गतिशील किया गया है।

कलायत में हरियाणा महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने लोक निर्माण विश्राम गृह परिसर से इस आधुनिक सुविधाओं से सु-सज्जित वाहन को हरी झंडी देकर रवाना किया। इस आयोजन की अध्यक्षता जन स्वास्थ्य विभाग अधीक्षक अभियंता ए.के.खंडूजा ने की। कमलेश ढांडा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल आम जन की सेहत के प्रति सजग हैं। इसके मद्देनजर पहली मर्तबा ठोस कार्ययोजना जल मामलों के लिए अपनाई गई है।

कमलेश ढांडा ने बताया कि मोबाइल टेस्टिंग लैब आन साइट पर पानी की गुणवत्ता को परखेगी। पहले इस कार्य के लिए पानी को निर्धारित स्थलों पर स्थित लैबों में लेकर जाना पड़ता था। इस पर 18 घंटे से अधिक का समय जांच में लगता था। लेकिन अब मौके पर पहुंचकर मोबाइल वैन आधा घंटे पर जांच का कार्य करेगी।

इस तरह काम करेगी मोबाइल लैब

एक दिन में मोबाइल लैब दस से बारह गांव में पानी के सैंपल ले सकेगी। सैंपल लेने के 20 से 25 मिनट के अंदर मौके पर ही जांच रिपोर्ट दी जाएगी। मोबाइल लैब के जरिये पानी के 10 पैरामीटरों की जांच होगी। रिपोर्ट के उपरांत पानी की गुणवत्ता की तथ्य आधारित जानकारी मिलेगी। जो पानी पीने योग्य नहीं है उसकी जानकारी विभाग को आन लाइन भेजी जाएगी। ताकि खामी को दूर किया जा सके।

महिलाओं के सिर से उतर रहा पानी का बोझ

हरियाणा महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि पहले पेयजल के संसाधन इतने विकसित नहीं थे। महिलाओं के सिर पर हमेशा पानी का बोझ रहता था। पनघट और खेत-खलिहानों की डगर महिलाओं को तय करनी पड़ती थी। बावजूद इसके शुद्ध जल की तलाश पूर्ण नहीं होती थी। इस समस्या का निराकरण तेजी से ग्रामीण अंचल में हो रहा है। इसके साथ ही शहरों में पेयजल संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है।

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