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ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की चर्चाएं शुरू, आगे पढ़ें

एक बार फिर ऐलनाबाद के क्षेत्र के लोगों को उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा। किसान आंदोलन के समर्थन में अभय चौटाला के इस्तीफे के साथ ही सीट खाली हो गई है।

ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की चर्चाएं शुरू, आगे पढ़ें
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Abhay Chautala

हरिभूमि न्यूज. सिरसा

तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन के समर्थन में ऐलनाबाद विधानसभा से अभय चौटाला के इस्तीफे के साथ ही सीट खाली हो गई है। एक बार फिर ऐलनाबाद के क्षेत्र के लोगों को उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा। यहां यह भी संयोग ही कहा जाएगा कि अभय चौटाला तीसरी बार उपचुनाव का सामना करेंगे। इससे पहले वे 2010 में ऐलनाबाद तथा 2000 में रोड़ी से उपचुनाव जीत कर विधायक बने। यहां दोनों ही जगह अभय चौटाला अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के सीट खाली करने के बाद उपचुनाव जीत कर विधायक बने।

चौटाला गांव की पंचायत से सियासी सफर शुरू करने वाले अभय चौटाला हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। भतीजे दुष्यंत चौटाला से सियासी मतभेद होने के बाद इनेलो दो फाड़ होने के बाद अभय चौटाला अपनी पार्टी से 2019 में एकमात्र विधायक बने। अभय का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद ऐलनाबाद हलके में एकाएक उपचुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई है। ग्रामीण बाहुल्य ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र हमेशा चौ. देवीलाल व उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी ओमप्रकाश चौटाला पर ही मेहरबान रहा है।

अभय का जन्म अपने ननिहाल पंजाब के अबोहर के पंचकोसी में 14 फरवरी 1963 को हुआ। एसएम हिंदू हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने हिसार की हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के स्पोर्टस कालेज से डिग्री हासिल की। सबसे पहले वे अपने पैतृक गांव चौटाला में पंचायत सदस्य बने। इसके बाद 2000 में रोड़ी उपचुनाव में जीत हासिल कर पहली बार विधायक बने। 2005 से लेकर 2010 तक अभय चौटाला जिला परिषद सिरसा के चेयरमैन भी रहे। इसके बाद कांग्रेस सरकार के गठन के करीब तीन माह बाद ही जनवरी 2010 में ऐलनाबाद में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में कांग्रेस के तमाम मंत्रियों-संतरियों ने ऐलनाबाद के गांव-गांव में डेरा डाल लिया। पर इस उपचुनाव में 64,813 वोट हासिल करते हुए अभय सिंह ने कांग्रेस के भरत सिंह बैनीवाल को 6227 वोटों से पराजित कर जीत हासिल कर ली।

इसके बाद अभय सिंह ने 2014 के विधानसभा चुनाव में ऐलनाबाद हलके को चुना। इस बार उनके लिए चुनौती थे उनके सखा रहे और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पवन बैनीवाल। अभय ने 69 हजार 162 वोट हासिल करते हुए पवन बैनीवाल को करीब 11 हजार 539 वोट से पराजित किया। 2019 में एक बार फिर अभय चौटाला ने भाजपा प्रत्याशी पवन बैनीवाल को हराया। इनेलो के दो फाड़ होने के बाद अभय के लिए 2019 का विधानसभा चुनाव पहला चुनाव था, जिसमें वे भाई अजय व भतीजे दुष्यंत की पार्टी जजपा से भी सामना करना पड़ा। सियासत के साथ-साथ अभय चौटाला का खेलों संग खासा लगाव रहा। उन्होंने आठ बार हरियाणा की तरफ वॉलीबाल नैशनल चैम्पियनशिप में शिरकत की। देश के प्रतिष्ठित खेल संस्थान भारतीय ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष के अलावा वे साल 2000 में भारतीय बॉक्सिंग फेडरेशन के अध्यक्ष बने। भारतीय ओलम्पिक संघ एवं एशियन बॉक्सिंग फैडरेशन के उपाध्यक्ष रहे। लम्बे अरसे तक हरियाणा ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष रहने के अलावा हरियाणा बॉक्सिंग एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रहे।

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