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सीएजी के ऑडिटरों को जांच के लिए दस्तावेज नहीं दे रहे अधिकारी, विभाग ने चेताया

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में जब महालेखाकार दफ्तर के ऑडिटर जांट पड़ताल के लिए जाते हैं, तो उन्हें संबंधित अधिकारी जांच के आवश्यक अभिलेख, दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। यह मामला अब खुलकर संचालनालय नगरीय प्रशासन ए‌वं विकास विभाग के सामने आया है। इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधितों को कठोर अनुशासन की कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है। यही नहीं ये भी बताया गया है कि ऑडिटर को दस्तावेज उपलब्ध कराया जाना हर अधिकारी के लिए बंधनकारी है।

सीएजी के ऑडिटरों को जांच के लिए दस्तावेज नहीं दे रहे अधिकारी, विभाग ने चेताया
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रायपुर. छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में जब महालेखाकार दफ्तर के ऑडिटर जांट पड़ताल के लिए जाते हैं, तो उन्हें संबंधित अधिकारी जांच के आवश्यक अभिलेख, दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। यह मामला अब खुलकर संचालनालय नगरीय प्रशासन ए‌वं विकास विभाग के सामने आया है। इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधितों को कठोर अनुशासन की कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है। यही नहीं ये भी बताया गया है कि ऑडिटर को दस्तावेज उपलब्ध कराया जाना हर अधिकारी के लिए बंधनकारी है।

ये है मामला

छत्तीसगढ़ का महालेखाकार कार्यालय(सीएजी) राज्य भर के नगरीय निकायों व अन्य विभागों के आय-व्यय सभी प्रकार के खर्चों वगैरह के ऑडिट का काम करता है। सीएजी हर साल एक ऑडिट रिपोर्ट तैयार करता है। यह रिपोर्ट राज्य विधानसभा के समक्ष रखी जाती है। इस रिपोर्ट से पता लगता है कि शासकीय धन किस काम में किस तरह उपयोग किया गया। अगर किसी भी प्रकार से कोई गड़बड़ी या शासन को राजस्व की हानि या गबन आदि होता है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान भी है।

ऑडिटरों को समय पर नहीं दे रहे दस्तावेज

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से इस पूरे मामले को लेकर सभी क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों,प्रदेश के सभी निगमों के आयुक्तों, सभी नगर पालिका एवं नगर पंचायतों को सीएमओ को पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में वित्त विभाग के एक निर्देश के हवाले से कहा गया है कि विभिन्न कार्यालयों,विभागों, में महालेखाकार कार्यालय के अंकेक्षण के दौरान अंकेक्षण दल द्वारा वांछित शासकीय अभिलेखों, दस्तावेजों को कार्यालय प्रमुख, विभाग प्रमुखों द्वारा यथा समय उपलब्ध नहीं कराए जाने से अंकेक्षण कार्य प्रभावी रूप से नहीं हो पाता है।

दस्तावेज देने बंधनकारी है

विभाग ने इस मामले को लेकर अपने विभागों को स्पष्ट किया है कि ऑडिटरों को दस्तावेज उपलब्ध कराने का कानून क्या है। इस संबंध में बताया गया है कि भारत के नियंत्रक ए‌वं महालेखा परीक्षक(कर्तव्य शक्तियां एवं सेवा शर्ते) अधिनियम 1971 के प्रावधानों के अनुसार अंकेक्षण अधिकारी द्वारा वांछित अभिलेख, दस्तावेज उपलब्ध कराना संबंधित कार्यालयीन विभागीय अधिकारी के लिए बंधनकारी है।

अब दस्तावेज नहीं दिया तो कठोर कार्रवाई

नगरीय प्रशासन विभाग ने वित्त विभाग ने निर्देश का अनुपालन करने का निर्देश देते हुए नगरीय निकायों के अधिकारियों से कहा है कि आपके कार्यालय में अंकेक्षण के दाैरान वांछित शासकीय अभिलेख, दस्तावेज यथा समय दें। यह विशेष ध्यान रखा जाए कि अंकेक्षण दल को आवश्यक सहयोग प्रदान न किए जाने की स्थिति में संबंधितों के विरूद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी, जिसके जिम्मेदार संबंधित अधिकारी कर्मचारी स्वयं होंगे।

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