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शहीद का अंतिम संस्कार : नक्सलियों से मुठभेड़ में गई जान, राजकीय सम्मान के साथ हुआ शहीद का अंतिम संस्कार, चार दिन पहले ही घर से गया था ड्यूटी पर

नारायणपुर जिले के बीहड़ इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में डीआरजी के जवान सालिकराम मरकाम शहीद हो गए। शहीद जवान सालिकराम भानुप्रतापपुर क्षेत्र के चवेला गांव के रहने वाले थे। सालिकराम 4 दिन पहले ही अपनी माँ से मिलने गांव आये थे और जल्द वापस लौटकर गांव के कच्चे मकान की जगह नया घर बनाने का वादा अपनी बूढ़ी मां से करके गए थे। पढ़िए पूरी खबर...

शहीद का अंतिम संस्कार : नक्सलियों से मुठभेड़ में गई जान, राजकीय सम्मान के साथ हुआ शहीद का अंतिम संस्कार, चार दिन पहले ही घर से गया था ड्यूटी पर
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कांकेर/भानुप्रतापपुर। नारायणपुर जिले के बीहड़ इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में डीआरजी के जवान सालिकराम मरकाम शहीद हो गए। शहीद जवान सालिकराम भानुप्रतापपुर क्षेत्र के चवेला गांव के रहने वाले थे। सालिकराम 4 दिन पहले ही अपनी माँ से मिलने गांव आये थे और जल्द वापस लौटकर गांव के कच्चे मकान की जगह नया घर बनाने का वादा अपनी बूढ़ी मां से करके गए थे। लेकिन चन्द दिनों बाद ही उनकी शहादत की खबर घर आई, जिससे बूढ़ी माँ बुरी तरह टूट गई। बेटे की शहादत की खबर लगने के बाद से शहीद की माँ का रो-रो कर बुरा हाल है। सालिकराम के शहीद होने की खबर मिलते ही अंचल में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद जवान के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।

बता दें कि बुधवार सुबह करीब 8 बजे नारायणपुर और दन्तेवाड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र तुलारगुफा और मंगारी में घात लगाए नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया था। इसमें डीआरजी नारायणपुर के प्रधान आरक्षक सालिकराम को गोली लग गई और वो शहीद हो गए। काफी देर तक चली गोलीबारी के बाद नक्सली भाग खड़े हुए। इसके बाद शहीद के शव को जंगल से बाहर निकालकर नारायणपुर लाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद जवान के शव को गार्ड ऑफ ऑनर देकर गांव के लिए रवाना किया गया। गुरुवार सुबह उनके गृहग्राम में राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी, कलेक्टर चन्दन कुमार ,एसपी शलभ सिन्हा समेत पुलिस विभाग के आला अधिकारी मौजूद थे।

ग्राम चवेला निवासी शहीद के बड़े भाई अलखराम ने बताया कि शहीद जवान सालिकराम करीब 4 दिन पहले ही अपने निवास स्थान चवेला घर आया था और अपनी बुजुर्ग मां से कहा था कि अगली बार मैं एक माह की छुट्टी लेकर जल्दी गांव आऊंगा फिर मिलकर यहां पर नया मकान बनाएंगे और आज उनकी मौत की खबर आ गई। शहिद सालिकराम की स्कूली शिक्षा ग्राम चवेला व कॉलेज की पढ़ाई भानुप्रतापपुर में हुई है। परिवार में एक ही सालिकराम सर्विस में था बाकी सभी खेती किसानी व मजदूरी से जीवनयापन करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शहीद जवान आवश्यकता अनुसार रकम भेजता था। जवान का विवाह वर्ष 2013 में हुआ था विवाह के कुछ दिन बाद ही उनका नारायणपुर जिले में पुलिस विभाग में सर्विस लग गया था, तब से वह अपने परिवार पत्नी यशोदा मरकाम व दो बच्चे टाइगर व भुअन के साथ वही रहता था। बुजुर्ग मां बुधिया बाई एवं भाई पतिराम व बड़े भैया अलखराम मरकाम गांव में रहते हैं। देखिए वीडियो-



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