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कोरोना का उतरा बुखार, विटामिन सी-डी पहले बिक रही थी 10 लाख टेबलेट, अब महीने में केवल 10 हजार

जुलाई से अक्टूबर के बीच कोरोना का छत्तीसगढ़ में पीक था। हाल यह था कि हर गली मोहल्ले में कोरोना के मरीज मिल रहे थे और खौफ में लोग इम्युनिटी बढ़ाने या वायरस से बचने के लिए कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। विटामिन सी और डी और जिंक की महीने में दस लाख टेबलेट बिक रही थीं। इन दवाओं की कमी हो गई थी और डिमांड के बाद भी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। लेकिन अब बाजार का हाल बदल गया है। यह टेबलेट अब एक माह में दस हजार गोलियाें पर आकर टिक गई है।

कोरोना का उतरा बुखार, विटामिन सी-डी पहले बिक रही थी 10 लाख टेबलेट, अब महीने में केवल 10 हजार
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रायपुर. जुलाई से अक्टूबर के बीच कोरोना का छत्तीसगढ़ में पीक था। हाल यह था कि हर गली मोहल्ले में कोरोना के मरीज मिल रहे थे और खौफ में लोग इम्युनिटी बढ़ाने या वायरस से बचने के लिए कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। विटामिन सी और डी और जिंक की महीने में दस लाख टेबलेट बिक रही थीं। इन दवाओं की कमी हो गई थी और डिमांड के बाद भी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। लेकिन अब बाजार का हाल बदल गया है। यह टेबलेट अब एक माह में दस हजार गोलियाें पर आकर टिक गई है।

वहीं, जिंक की मांग भी अब सामान्य हो गई है। कोरोना से बचने के लिए लोग एचक्यूक्यू यानी हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन और आईवरमेक्टिन का उपयोग कर रहे थे। अगस्त-सितंबर और अक्टूबर में एचक्यूक्यू की बेहद मारामारी थी। अब वह समाप्त हो गई है। इसी के साथ ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की भी मांग नहीं है। पोर्टेबल ऑक्सीजन मशीनों को किराए पर ले जाने वाले भी इक्का-दुक्का रह गए हैं। कुल मिलाकर हालात इस तरफ इशारा कर रहे हैं कि अब कोरोना का बुखार पहले की तरह उच्च स्तर पर नहीं रह गया है।

काेरोना ने कुछ समय पहले बाजार का स्वरूप भी बदल दिया था। बाजार में खासकर दवा दुकानों में दो माह पहले अलग तरह की दवाईयां बिकने लगी थीं। इसी के साथ घरेलू दवाईयों के काम में आने वाले मसालों की भी पूछपरख ज्यादा हो गई थी। ऐसे सामान, जो किसी भी घर में एक माह में मुश्किल से 10 से 20 ग्राम लगते थे, वे पचास से सौ ग्राम तक खरीदे जा रहे थे, लेकिन अब सारी स्थिति बदल गई है। अब एक बार फिर से सब कुछ सामान्य हो गया है। बाजार में सामान्य दिनों की तरह खरीदारी हो रही है, फिर चाहे वह दवाओं की बात हो या फिर मसालों की।

ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की इक्का-दुक्का बिक्री

ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर दो ऐसे सामान हैं, जिनका उपयोग डॉक्टर ही करते रहे हैं, लेकिन कुछ समय पहले इसका उपयोग घरों में भी बढ़ गया था। मेडिकल कारोबारी कहते हैं, पहले ये एक माह में मुश्किल से सौ, दो सौ ही बिकते थे, लेकिन कुछ माह पहले हर माह इसकी खपत चार से पांच सौ तक पहुंच गई थी। अब तो इसके इक्का-दुक्का ही खरीदार दुकानों पर आ रहे हैं। इसी तरह से सेनेटाइजर की ब्रिकी भी अब बहुत कम हो गई है।

पोर्टेबल ऑक्सीजन मशीन ले जाने वाले घटे

कोरोना की वजह से सितंबर माह में राजधानी में स्थिति ऐेसी हो गई थी कि लोगों को ऑक्सीजन वाले बिस्तर अस्पतालों में नहीं मिल रहे थे। लोगों को आपातकाल में भारी परेशानी हो रही थी। ऐसे में कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने पोर्टेबल ऑक्सीजन मशीनें लेकर महज दो सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से लेकर उपलब्ध कराना प्रारंभ किया। शंकरनगर सिंधी पंचायत ने पांच मशीनें ली थीं। सिंधु पैलेस शंकरनगर में ये मशीनें रखीं हुई हैं। अध्यक्ष अशोक माखीजा बताते हैं, एक माह पहले तक मशीनों को लेकर भारी मारीमारी थी, लेकिन अब दो से तीन मशीनें ही जा रही हैं। इसी तरह से एमएम चेरिटबल ट्रस्ट ने भी पांच मशीनें ली थीं। ट्रस्ट के सतीश थौरानी का कहना है, इस समय एक ही मशीन जा रही है, चार मशीनें खाली रहती हैं। बाकी समाजसेवी संस्थाओं की मशीनें भी ले जाने वाले कम हो गए हैं।

विटामिन सी-डी की मांग कम हुई

आमतौर पर दवाई दुकानों में विटामिन सी और डी की मांग ज्यादा नहीं रहती है। कोरोना से पहले की बात करें तो इनकी खपत एक माह में दस हजार गोलियों की होती थी, लेकिन अचानक से दो माह पहले इसकी खपत सौ गुना बढ़कर दस लाख गोलियां हो गई थी। इसकी उतनी सप्लाई भी नहीं हो पा रही थी। इसी तरह से जिंक, एंथ्रोसीन और पैरासिटामाल की खपत भी कई गुना बढ़ी थी, लेकिन अब इन सारी दवाईयों की मांग आसमान से जमीं पर उतर गई है। अब इन दवाईयों की पूछपरख नहीं हाे रही है।

हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन-आईवरमेक्टिन के खरीददार नहीं

आमतौर पर मलेरिया के काम आने वाली हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन को कोरोना के लिए वरदान मानने के बाद अचानक से इसकी मांग बाजार में बढ़ी थी। लंबे समय तक तो यह बाजार से गायब ही हो गई। इसकी ज्यादा खपत न होने के कारण इसको ज्यादा बनाया भी नहीं जाता है। कोरोना से पहले इसकी खपत मुश्किल से एक माह में 10 से 20 स्ट्रीप होती थी, इसकी खपत तीन से चार सौ स्ट्रीप :शेष पेज 7 पर

हो गई थी। लेकिन अब इनके खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। इसी तरह से दो माह पहले जब काेरोना से बचाव के लिए आईवरमेक्टिन टेबलेट का नाम सामने आया तो यह टेबलेट बाजार से गायब हो गई थी, लेकिन अब इसे भी लेने वाले ग्राहक नहीं हैं।

खपत अब सामान्य

विटामिन सी और डी की खपत जो पहले सौ गुना तक बढ़ गई थी, वह अब सामान्य हो गई है। हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन और आईवरमेक्टिन की भी मांग भी अब बहुत कम है।

- संजय रावत, अध्यक्ष, थोक दवा विक्रेता संघ

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