Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

ग्रीन जोन के लिए सरकार की रिजर्व खाली जमीन को भाड़े पर उठाया, जांच के आदेश

राजधानी के बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित धरसींवा में सीएसआईडीसी की जमीन की बड़े पैमाने पर बंदरबांट का खेल चल रहा है। इस बंदरबांट के खेल में सीएसआईडीसी के एक कर्मचारी के शामिल होने की बात सामने आ रही है। सीएसआईडीसी की जमीन में यह खेल विगत कई वर्षों से अनवरत जारी है। मामले की शिकायत पर नायब तहसीदार ने पटवारी को जांच के आदेश दिए हैं।

ग्रीन जोन के लिए सरकार की रिजर्व खाली जमीन को भाड़े पर उठाया, जांच के आदेश
X

रायपुर/धरसींवा. राजधानी के बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित धरसींवा में सीएसआईडीसी की जमीन की बड़े पैमाने पर बंदरबांट का खेल चल रहा है। इस बंदरबांट के खेल में सीएसआईडीसी के एक कर्मचारी के शामिल होने की बात सामने आ रही है। सीएसआईडीसी की जमीन में यह खेल विगत कई वर्षों से अनवरत जारी है। मामले की शिकायत पर नायब तहसीदार ने पटवारी को जांच के आदेश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण के प्रदूषण को रोकने सीएसआईडीसी एक बड़े भू-भाग में पौधारोपण कराता है। धरसींवा के आउटर के सीएसआईडीसी की सड़क किनारे दोनों साइड की खाली जमीन कबाड़ियों तथा काेयला डंप करने वालों को विभाग के ही एक निचली श्रेणी के कर्मचारी द्वारा बेचे जाने के आरोप हैं। हरिभूमि तथा आईएएनएच की टीम ने मौके की पड़ताल करने पर पाया कि सीएसआईडीसी की खाली जमीन पर लोगों ने बड़े पैमाने पर बेजा कब्जा कर लिया है। इस संबंध में सीएसआईडीसी के अधिकारियों से संपर्क कर बात करने की कोशिश की गई तो अधिकारी इस संबंध में कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

महीने का सात से दस हजार किराया

जानकारी के मुताबिक सीएसआईडीसी की जिन जमीनों को व्यावसायिक उपयोग के लिए गलत तरीके से दिया गया है। उसके एवज में उन लोगों से हर माह सात से दस हजार रुपए भाड़ा वसूला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक आपसी मिलीभगत के माध्यम से सीएसआईडीसी के अधिकारी अपने निचली श्रेणी के कर्मचारी के माध्यम से हर माह लाखों रुपए भाड़ा वसूल कर रहे हैं।

ग्रीन जोन की जमीन पर इंडस्ट्रियल डस्ट डंप

शहर के आउटर में कई जगह ग्रीन जोन के लिए आरक्षित जमीन पर सीएसआईडीसी के कर्मचारी तथा अधिकारी उद्योगपतियों से मिलीभगत कर इंडस्ट्रियल डस्ट डंप करने की खुली छूट दे रहे हैं। डंप होने वाला डस्ट नहर में मिलकर पानी को जहरीला बना रहा है। इससे खेतों की फसल खराब होने की बात सामने आई है।

दिखावे के लिए कार्रवाई

सीएसआईडीसी के अधिकारी ने एक पखवाड़े में ही दूसरी बार प्रदूषण कम करने तथा पानी की फुहार मारने के नाम पर सड़क किनारे गुमटी चलाने वाले दुकानदारों को बगैर नोटिस दिए उसकी गुमटी तोड़ दी। वही विभाग के नुमाइंदे अपने निजी फायदे के लिए सरकारी जमीन को किराए पर चढ़ाकर बेजा लाभ कमाने का कार्य कर रहे हैं।

वसूली की होगी जांच

सीएसआईडीसी की जमीन पर कबाड़ियों का कब्जा होना निश्चित रूप से पर्यावरण विभाग और सीएसआईडीसी विभाग की मिलीभगत है, इस बात की शिकायत की बारीकी से जांच होगी। इस संबंध में वह मुख्यमंत्री से चर्चा कर जांच की मांग करेंगे।

- अनिता शर्मा, विधायक, धरसींवा

विभागों की मिलीभगत

पर्यावरण विभाग की जांच टीम और सीएसआईडीसी विभाग की मिलीभगत से सिलतरा निवासी प्रदूषण और बंजर भूमि के बीच जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। उद्योगों द्वारा ग्रीन जोन के नाम पर जमीन उपलब्ध कराई गई है।

- राकेश यादव, जिला पंचायत सदस्य

सीमांकन से स्थिति स्पष्ट

ऐसी शासकीय जमीन, जिसे ग्रीन जोन के लिए सुरक्षित किया गया है, वहां काली डस्ट डालने तथा बेजा कब्जा करने की शिकायत मिली थी। इसके बाद पटवारी को उन जगहों का सीमांकन करने निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

- प्रमोद गुप्ता, नायब तहसीलदार, धरसींवा

आज छुट्टी है

मैं सीएसआईडीसी में यहां हाल ही में पदस्थ हुआ हूं, इस संबंध में मुझे कुछ नहीं पता, आज छुट्टी है, मैं बात नहीं कर पाऊंगा।

- आशीष कुजूर, उपअभियंता सीएसआईडीसी, सिलतरा

Next Story