Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

खुशखबरी : 54 दिन से एक भी मरीज को दोबारा कोरोना नहीं, 99.9 फीसदी की एंटीबॉडी कर रही काम

कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी की अवधि को लेकर अलग-अलग मत के बीच दोबारा पॉजिटिव के कम मामले सक्रियता की अवधि और अधिक समय तक रहने की ओर इशारा कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान यह भी खुशखबरी की बात है कि 99.9 फीसदी लोगों में कोरोना की एंटीबॉडी अभी भी काम कर रही है और इस वायरस का शिकार होने से बचे हुए हैं। प्रदेश में सामने आए करीब 20 मामलों में अक्टूबर के पहले सप्ताह में अंतिम केस सामने आया था। अभी 54 दिन से एक भी ऐसा केस नहीं आया है जिसे दोबारा कोरोना हुआ हो।

covid-19: कोरोना संक्रमित 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम, शुगर, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से थी ग्रसित
X
प्रतीकात्मक तस्वीर

रायपुर. कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी की अवधि को लेकर अलग-अलग मत के बीच दोबारा पॉजिटिव के कम मामले सक्रियता की अवधि और अधिक समय तक रहने की ओर इशारा कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान यह भी खुशखबरी की बात है कि 99.9 फीसदी लोगों में कोरोना की एंटीबॉडी अभी भी काम कर रही है और इस वायरस का शिकार होने से बचे हुए हैं। प्रदेश में सामने आए करीब 20 मामलों में अक्टूबर के पहले सप्ताह में अंतिम केस सामने आया था। अभी 54 दिन से एक भी ऐसा केस नहीं आया है जिसे दोबारा कोरोना हुआ हो।

एंटीबाडी की सक्रियता अवधि को दो से तीन माह माना जा रहा था, लेकिन दोबारा पॉजिटिव केस की कम संख्या एंटीबॉडी की सक्रियता लंबे समय तक रहने की वजह से इसकी दीर्घ अवधि से इनकार नहीं किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 2.32 लाख से ज्यादा लोग कोरोना के शिकार हुए हैं, जिनमें से मात्र 20 लोग दोबारा पॉजिटिव पाए गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने वाले चीन में ही इसी तरह की जानकारी सामने आई थी कि संक्रमण से मुक्त होने वाले माहभर में दोबारा वायरस के शिकार हो रहे हैं। इसके बाद मुंबई में इस तरह के केस सामने आए और छत्तीसगढ़ में भी स्वास्थ्य विभाग का अमला इस संवेदनशील मामले में सक्रिय हो गया था।

विशेषज्ञों का मत

रजिस्ट्रेशन डेवलप कोरोना संक्रमित होने वाले शरीर में रजिस्ट्रेशन डेवलप होता है, जो दोबारा संक्रमण को रोकता है। दोबारा पॉजिटिव के मामले बहुत कम संख्या में सामने आते हैं। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आगे ऐसे मामले नहीं आएंगे। कोरोना की रोकथाम के लिए वैक्सीन नहीं आने तक खतरा बना हुआ है।

- डा. नितिन एम. नागरकर, निदेशक, एम्स

नहीं आ रहे मामले

दूसरी बार कोरोना से संक्रमित होने के मामले बहुत कम संख्या में हैं। कुछ समय पहले इस तरह के प्रकरण सामने आ रहे थे, जिसकी वजह शरीर में मौजूद कोरोना के डेड वायरस का होना भी था। दोबारा पॉजिटिव के मामले अब सामने नहीं आ रहे।

- डा. सुभाष पांडेय, संयुक्त संचालक एवं प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

सतर्कता जरूरी

कोरोना पीक में इस तरह के केस सामने आए थे, लेकिन अब इस तरह के मामले सामने नहीं आ रहे हैं। बावजूद इसके कोरोना से बचाव के लिए अभी भी अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी है।

- डा. आरके पंडा, टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ, आंबेडकर अस्पताल

यह केस रहे चर्चा में

कोरोना के पीक यानी अगस्त से लेकर अक्टूबर के बीच दोबारा संक्रमण के जो मामले सामने आए, वे काफी चर्चा में रहे। इनमें सीमा सुरक्षा बल के चार तथा पुलिस बल के दो जवान, पुलिस महकमे के दो आईपीएस अधिकारी, आंबेडकर अस्पताल में पदस्थ सीनियर महिला चिकित्सक तथा एक पीजी की छात्रा शामिल थे। इनमें कुछ लोग दो माह बाद पॉजिटिव पाए गए थे, वहीं कुछ निगेटिव आने के बाद पंद्रह दिन के भीतर हुई जांच में संक्रमित पाए गए थे।

सर्दी-खांसी के लक्षण

दोबारा संक्रमण के मामले में विशेषज्ञों की यह भी राय है कि दोबारा संक्रमण के मामले भले ही सामने नहीं आ रहे है, लेकिन इसकी आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। सर्दी-खांसी की शिकायत होने पर लोग स्वयं को आइसोलेटेड कर लेते हैं और जांच नहीं कराने की वजह से इस तरह के मामले सामने नहीं आते। हालांकि दो बार संक्रमित होने के मामले अब प्रदेश के साथ देश में भी सामने नहीं आ रहे हैं।

2 लाख 35 हजार में से केवल 20 काे दोबारा

अभी तक 2 लाख 35 हजार लोगो केा कोरोना हो चुका है। इनमें से केवल 20 को ही दोबारा संक्रमित पाया गया है। यानी 99.9 फीसदी को फिर से कोरोना नहीं हुआ। इस दौरान यह भी तर्क सामने आया था कि संक्रमण मुक्त होने के बाद एक नियत समय तक पुन: कोरोना की जांच कराई जाए, तो शरीर में मौजूद कोरोना के डेड वायरस पुन: संक्रमित होने की ओर इशारा कर देते हैं। प्रदेश में 5 अक्टूबर को पुलिस विभाग के एक आला अफसर के दोबारा पॉजिटिव होने का केस सामने आया था। कोरोना की दहशत के बीच यह भी एक खुशखबरी है कि आठ माह के कोरोना काल के दौरान दोबारा संक्रमित होने का खतरा भी अब टल चुका है और जो कोरोना को मात दे चुके हैं, उनके शरीर में कोरोना एंटीबॉडी काम कर रहा है।

Next Story