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सिमी के लिए कराची से रायपुर में हो रही थी फंडिंग, सालों बाद एजेंट ने खोले राज

सिमी नेटवर्क के लिए काम करने वाला शातिर हत्थे चढ़ा। प्रदेश की राजधानी में आज से आठ साल पहले आतंकी संगठन सिमी से जुड़े सदस्यों को पाकिस्तान से बड़ी फंडिंग हो रही थी। कराची में मौजूद एक बैंक शाखा से ही आतंकी संगठन के सदस्यों को बारी-बारी रकम का भुगतान किया जा रहा था। पढ़िए बड़ी ख़बर...

सिमी के लिए कराची से रायपुर में हो रही थी फंडिंग, सालों बाद एजेंट ने खोले राज
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रायपुर: पुलिस ने मामले में आठ साल बाद बड़ा खुलासा कर एक सहयोगी को बंदी बनाया है। आरोपी के पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ है कि वह 13 प्रतिशत की कमीशन में अपना बैंक एकाउंट खुलवाकर मदद करने में जुटा था। आरोपी के ट्रांजिट रिमांड में रायपुर लाए जाने के बाद और पूछताछ होगी।

एएसपी सिटी तारकेश्वर पटेल व एएसपी क्राइम अभिषेक माहेश्वरी ने मामले का खुलासा किया। एएसपी ने जानकारी दी कि राजू खान नामक शख्स को आठ साल बाद पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया। सिमी के आरोपियों को हाल ही में सजा मिलने के बाद राजू ने अपनी गिरफ्तारी के डर से रायपुर में एक वकील के नंबर पर फोन किया था। तब उसे पकड़ने के लिए तत्काल टीम रवाना की गई। राजू तक पहुंचने के बाद खुलासा हुआ कि पूर्व में गिरफ्तार धीरज साव के कहने पर वह फंडिंग करने राजी हुआ था। प्रतिबंधित संगठन सिमी द्वारा इंडियन मुजाहीद्दीन के लोगों को पैसा बैंक के माध्यम से भेजा जाता था। खालिद के कहने पर राजू के खाते में जो आईसीआईसीआई बैंक दुर्गापुर में संचालित है, उसमें 17 हजार रुपए धीरज ने डाले एवं अन्य खातों में अलग-अलग तिथियों में 3 लाख रुपए जमा कराए गए। जिसका 13 प्रतिशत काटकर राजू खान, जुबैर हुसैन एवं आयशा बानो के नाम से खोले गए प्रतिबंधित संगठन सिमी व इंडियन मुजाहीद्दीन के खातों में जमा कराया गया। एएसपी ने बताया, उन्हें अब और लोगाें की तलाश है।

गुमराह करने डेलीनीड्स शाॅप

आरोपी राजू खान वर्ष 2013 से लगातार फरार था, जिसकी पतासाजी चल रही थी। मालूम हुआ था कि राजू खान का संबंध कश्मीर से है तथा जुबैर हुसैन एवं आयशा बानो का भी वह नजदीकी है। ऐसे में उसकी तलाश और तेज कर दी गई थी। आरोपी मां दुर्गा स्टील प्लांट में कार्यरत था, लेकिन पकड़े जाने के डर से नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। इस दौरान वह फरार भी हो गया। बाद में अपनी डेलीनीड्स शॉप शुरू की। आखिर जब सिमी से जुड़े लोगों को कोर्ट ने सजा सुनाई, तब राजू पकड़े जाने के डर से सक्रिय हुआ। एक वकील से संपर्क करने पर खबर पुलिस तक पहुंची।

2011 में फंडिंग के लिए बनाए एजेंट

मामले की गहराई से जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि खालिद नामक व्यक्ति ने 2011 में संपर्क साधा। पहले वह धीरज साव तक पहुंचा। इसके बाद धीरे-धीरे तगड़ा नेटवर्क बनाया। खालिद ने मोबाइल से संपर्क साधा था। उसने यकीन दिलाया कि पैसा कमाना है तो हमारे साथ जुड़ो। हम जैसा बोलेंगे, वैसा करना पड़ेगा तो तुम लाखों रुपए कमा लोगे। आईसीआईसीआई बैंक में एकाउंट खुलवाने कहा। इस बात की जानकारी धीरज द्वारा अपने मौसेरे भाई श्रवण मण्डल को दी गई। श्रवण ने अपने परिचितों में राजू खान को भी इसके लिए राजी कर लिया।

चार रायपुर जेल में, होगी पूछताछ

आरोपी राजू खान के पकड़े जाने के बाद पांच लोगों के नेटवर्क का लिंक मिल गया है। राजू को तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड में लेकर रायपुर पुलिस पूछताछ कर रही है। चूंकि धीरज साव के साथ उसके सहयोगी जुबैर हुसैन, पप्पू मण्डल एवं आयशा बानो रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं। ऐसे में पुलिस अब उनसे भी पूछताछ कर सकती है। आठ साल पुराने मामले में जांच के दौरान परतें खुलने के बाद अभी और भी खुलासे संभव हैं।

पूछताछ जारी

आरोपी राजू के पकड़े जाने के बाद मालूम हुआ है कि कराची में बैंक खाता खुलवाकर रायपुर तक फंडिंग की गई थी। आरोपी के पकड़े जाने के बाद कुछ और खुलासे की उम्मीद है। एटीएस की टीम की भी पूछताछ कर सकती है।

- अभिषेक माहेश्वरी, एएसपी, क्राइम

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