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पैरी नदी में समा गए 600 एकड़ खेत, कटाव रोकने छह करोड़ की योजना फाइलों में कैद

पैरी नदी के तेज बहाव ने करीब 600 एकड़ जमीन को काट दिया है। हर साल भूमि के कटाव ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। नदीं के तेज बहाब के चलते ग्राम भाठीगढ़, हरदीभाठा, छुईहा, गोपालपुर के किसानों को अपनी जमीनें गंवानी पड़ी है। किसानों का कहना है कि गलत तरीके से स्टाप डेम के निर्माण की वजह से स्थिति भयावह हो गई है।

पैरी नदी में समा गए 600 एकड़ खेत, कटाव रोकने छह करोड़ की योजना फाइलों में कैद
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हसन खान. मैनपुर. पैरी नदी के तेज बहाव ने करीब 600 एकड़ जमीन को काट दिया है। हर साल भूमि के कटाव ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। नदीं के तेज बहाब के चलते ग्राम भाठीगढ़, हरदीभाठा, छुईहा, गोपालपुर के किसानों को अपनी जमीनें गंवानी पड़ी है। किसानों का कहना है कि गलत तरीके से स्टाप डेम के निर्माण की वजह से स्थिति भयावह हो गई है। यहां के किसान रानू साहू, जोहन साहू, भुजबल यादव, बिरबल यादव, आशाराम सहित लगभग दो दर्जन से ज्यादा किसानों ने बताया कि पैरी नदी पुल के नीचे राजीव गांधी राष्ट्रीय जल ग्रहण मिशन द्वारा वर्ष 2003-04 में लाखों रुपए की लागत से एक स्टाप डेम का निर्माण किया गया, जब स्टाप डेम का निर्माण किया जा रहा था, तब क्षेत्र के किसानों ने इसे दूसरे स्थान पर निर्माण करने की मांग की, लेकिन उस समय के राजीव जल ग्रहण मिशन के अधिकारी किसानों की बातों को नजर अंदाज करते हुए इसका निर्माण कर दिया।

स्टाप डेम निर्माण होने के बाद पहली ही बारिश में पैरी नदी से निकलने वाला पानी, जो पहाड़ी और अन्य छोटी नदियों से मिलकर इसका बहाव तेज हो जाता है, स्टाप के आधे हिस्से को उखाड फेंका। साथ ही 20 से 30 फीट नदी में गहरे गड्ढे हो गए, गलत मापदंड के चलते स्टाप डेम निर्माण किये जाने के कारण यह कटाव बढते गया और धीरे धीरे हरदीभाठा, भाठीगढ, छुईहा, गोपालपुर के लगभग 600 एकड कृषि भूमि को पूरी तरह से निगल लिया। यह कृषि भूमि नदी में तब्दील हो गया, इस मामले को लेकर क्षेत्र के किसान भड़क उठे और आंदोलन किए तो भूमि संरक्षण विभाग द्वारा अपनी भूल को छिपाने के लिए स्टाप डेम का जो आधा हिस्सा बचा था, उसे जेसीबी मशीन से जाकर रातों रात गायब कर दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री से लगाई थी गुहार

प्रभावित किसानों ने पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह से मुलाकात करते हुए इस समस्या की जानकारी उन्हें दी थी। इसके बाद बकायदा राज्य स्तर के अधिकारियों के टीम ने पूरे नदी का पैदल निरीक्षण किया। जल संसाधन विभाग तथा कृषि विभाग के अधिकारियों के द्वारा नदी किनारे कटाव को रोकने के लिए तटबंध बनाने के लिए लगभग 08 वर्ष पहले 10 करोड़ रुपए के स्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया था, लेकिन अब तक राशि स्वीकृत नहीं होने से तटबंध का निर्माण नही हो पाया और नदी किनारे कटाव का सिलसिला लगातार जारी है। किसानों ने बताया कि पूर्व भाजपा सांसद चन्दुलाल साहू, पूर्व कांग्रेस के विधायक कुमार ओंकार शाह, पूर्व भाजपा के विधायक गोवर्धन मांझी, गरियाबंद जिला के तत्कालीन कलेक्टर निलेश क्षीरसागर तथा सिंचाई विभाग के कई आला अफसर, कृषि विभाग के अधिकारी पैदल स्थल निरीक्षण कर चुके हैं, कई बार स्टीमेट प्रस्ताव बनाकर भेज चुके हैं, अब तक कुछ भी नहीं हुआ है।

किसानों ने लगाई मुख्यमंत्री से गुहार

हरदीभाठा, भाठीगढ, गोपालपुर, छुईहा पैरी नदी में प्रभावित किसान तथा तुहामेंटा खजरान नाला के प्रभावित किसान अमृतलाल नागेश, पिलेश्वर सोरी, रामसिंह, सुकलाल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से गुहार लगाई है कि उनकी हर साल करोड़ों की जमीन जो नदी में तब्दील हो रही है, उसे नरवा, घुरवा, गरुवा और बाड़ी जैसे महत्वकांक्षी योजना में शामिल करते हुए नदी के दोनों तरफ तटबंध बनवाया जाए, जिससे किसानों की जमीन बर्बाद होने से बच सके और नदी में तब्दील हो चुके जमीनों के सीमांकन व नाप कर उसे मनरेगा योजना के तहत सुधार करवाई जाए।

क्या कहते हैं अफसर

जल संसाधन विभाग के एसडीओ दीपक कुमार पाठक ने बताया कि लगभग 05-06 वर्ष पहले नदी किनारे तटबंध निर्माण के लिए स्थल निरीक्षण के बाद बकायदा स्टीमेट बनाकर भेजा गया था, लगभग 06 करोड़ रुपए का स्टीमेट भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अब तक कार्य नहीं हो पाया है। श्री पाठक ने आगे बताया कि फिर धान कटाई के बाद स्टीमेट बनाकर भेजा जाएगा।

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