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पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर जनता को धोखा देना चाहते हैं शिवराज : जीतू पटवारी

पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने पूछा कि किसानों की आय दोगुनी करने वाला मप्र कहां है? स्वर्णिम मप्र कहां है? आत्मनिर्भर मप्र कहां है? रोजगार देने वाला मप्र कहां है? महिलाओं का सशक्तिकरण करने वाला मप्र कहां है? नियुक्तियों में धांधली का मुद्दा उठाते हुए पटवारी ने कहा कि शिवराज सरकार एक बार फिर से व्यापमं - 2 घोटाला कर रही......

पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर जनता को धोखा देना चाहते हैं शिवराज : जीतू पटवारी
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भोपाल । पूर्व मंत्री ( Ex. Minister ) और कांग्रेस मीडिया विभाग ( Congress media department ) के अध्यक्ष ( president ) जीतू पटवारी ( Jitu Patwari ) ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री ( Chief Minister ) शिवराज सिंह चौहान ( Shivraj Singh Chouhan ) के पास ना कोई नया आईडिया है, ना कोई नया समाधान है, ना कोई नया सुझाव है। वे सिर्फ पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर अपने पुराने झूठ नए सिरे से दोहरा रहे हैं। पटवारी ने व्यापमं ( vyapam ) परिवर्तित नाम राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड ( State Staff Selection Board) में लगातार हो रहे घोटालों को लेकर भी जानकारी दी। पटवारी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से तत्काल परीक्षा परिणाम की जांच के आदेश देने, गैर व्यापमं के अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों की समिति से जांच कराने और रेल्वे भर्ती परीक्षा की तरह अभ्यर्थी से एफिडेविड लेने तथा जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है।

पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने पूछा कि किसानों की आय दोगुनी करने वाला मप्र कहां है? स्वर्णिम मप्र कहां है? आत्मनिर्भर मप्र कहां है? रोजगार देने वाला मप्र कहां है? महिलाओं का सशक्तिकरण करने वाला मप्र कहां है? नियुक्तियों में धांधली का मुद्दा उठाते हुए पटवारी ने कहा कि शिवराज सरकार एक बार फिर से व्यापमं - 2 घोटाला कर रही है। व्यापमं द्वारा पुलिस विभाग में 6000 आरक्षक पदों पर भर्ती के लिए 8 जनवरी से 17 फरवरी 2022 तक 74 शिफ्टों में परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसका परिणाम 24 मार्च 2022 को घोषित किया गया। उक्त परीक्षा में 7 लाख 98 हजार अभ्यर्थी शामिल हुये। फिजीकल के लिए 30 हजार अभ्यर्थी क्वालीफाई हुए। परीक्षा तथा उसके परिणाम में नियमों की जमकर अनदेखी हुई। व्यापमं द्वारा इस परीक्षा में रोल नंबर आबंटन में पूर्व घोटाले की तरह स्कोरर का लाभ दिया गया। अभ्यर्थियों ने अपने नजदीक के परीक्षा केन्द्र के स्थान पर दूर के सुविधाजनक परीक्षा केन्द्र का चयन किया। 12 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा 74 शिफ्ट में 41 दिन की ऐतिहासिक अवधि तक योजनाबद्ध तरीके से आयोजित की गई। एक पाली में पूरे प्रदेश के परीक्षा केन्द्रों पर मिलाकर मात्र 10784 अभ्यर्थी शामिल हुये, याने एक परीक्षा केन्द्र पर बमुश्किल 100 अभ्यर्थी भी नहीं थे। ऐसे में 74 शिफ्टों में 41 दिन तक परीक्षा का आयोजन कई शंकाओं को जन्म देता हैं। पटवारी ने कहा कि उक्त परीक्षा में पारदर्शिता का पूर्णत: अभाव आपत्तिजनक हैं। यह बताया ही नहीं गया कि परिणाम कितनी अवधि में घोषित होगा और आनलाईन परीक्षा में आश्चर्यजनक रूप से 35 दिन बाद 24 मार्च को परिणाम घोषित किया गया। याने पहली परीक्षा पाली से 76 दिन बाद परिणाम घोषित हुआ। पत्रकारवार्ता के दौरान भूपेंद्र गुप्ता, नरेंद्र सलूजा आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।

परीक्षा आयोजक को पहुंचाया फायदा -

पटवारी ने कहा वर्तमान दर से तीन गुना राशि परीक्षा आयोजक को दी गई तथा एमपीकान को अनावश्यक रूप से करोड़ों का भुगतान किया गया। व्यापमं के पास 31 जनवरी की स्थिति में 403.44 करोड रू. बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट हैं, ऐसे में 800 रू. परीक्षा शुल्क लेना इनकी सोच को दशार्ता है। नार्मलाइजेशन के नाम पर सफल प्रतिभागियों की लिस्ट मनमाने तरीके से बनाई, अभ्यर्थी के प्राप्तांक, टाप अभ्यर्थी के अंक, अभ्यर्थी के औसत अंक, औसत एवं मानक विचलन कैसे निकाले गये, इसका उल्लेख कहीं भी नहीं किया। उक्त भर्ती परीक्षा में भूतपूर्व सैनिक के 600 पद आरक्षित थे, इस मान से तीन हजार भू.सै. को क्वालिफाय करना था, लेकिन एक भी भूतपूर्व सैनिक को क्वालिफाय नहीं किया गया। जबकि परीक्षा में 8 से 10 हजार भूतपूर्व सैनिक शामिल हुये थे। एक अभ्यर्थी के परीक्षा के बाद अंक 78 दिखाये गये, उसे नार्मलाइजेशन के बाद अचयनित कर दिया। वहीं दूसरी पाली में 64 अंक लाने वाला नार्मलाइजेशन के बाद चयनित हो गया, ऐसे हजारों फजीर्वाड़े मात्र 30 हजार की सूची में किये। पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा में 85 अंक वाले को फेल तो 65 अंक वाले को पास कर दिया ।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से पूछे यह सवाल :-

(1) किस किस पाली में किस किस केन्द्र से कितने कितने अभ्यर्थी चयनित हुये।

(2) नार्मलाइजेशन सूत्र के वास्तविक मान किस प्रकार निकाले गये तथा वे क्या हैं।

(3) प्रत्येक शिफ्ट में 10 टॉप अभ्यथीर्यों के अंक कितने हैं।

(4) प्रत्येक अभ्यर्थी के अंक में नार्मलाइजशेन सूत्र का उपयोग कैसे किया गया और प्रत्येक अंक में क्या परिवर्तन हुये।

मार्क्स बढ़ाने के लिए फोन करके मांगे 5 लाख -

पटवारी ने कहा कि व्यापमं, एमपीटीईटी की परीक्षा को लेकर फिर सुर्खियों में है। शिक्षक पात्रता परीक्षा के पेपर लीक मामला सामने आने के बाद व्यापमं पर बड़े घोटाले के आरोप लग रहे हैं। इसे व्यापमं घोटाला-3 बताया जा रहा है। भोपाल के कैंडिडेट सौरभ विश्वकर्मा ने आरोप लगाया है कि मार्क्स बढ़ाने के लिए उससे 5 लाख रुपए मांगे जा रहे हैं। उसके पास अनजान नंबरों से कॉल आ रहे हैं। सौरभ की तरह ही कुछ और उम्मीदवारों ने इसी तरह के अनजान नंबरों से कॉल आने की शिकायत की है। उम्मीदवारों ने व्यापमं में आरटीआई भी लगाई है। सोमवार को प्रदेशभर से आए उम्मीदवारों ने व्यापमं आफिस के सामने प्रदर्शन किया था। इसके बाद वे मुख्यमंत्री निवास भी गए। वहां उन्होंने ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराने की मांग की है।

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