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3 सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा दिव्यांग, निवाले के लिए तरस रहा पूरा परिवार

दिव्यांग और उसके परिवार को राशन नहीं मिल रहा है, सरकारी सिस्टम का चक्कर लगाने को मजबूर। पढ़िए पूरी खबर-

3 सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा दिव्यांग, निवाले के लिए तरस रहा पूरा परिवार
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मंदसौर। मध्यप्रदेश शासन के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के विधानसभा क्षेत्र में सचिव की मिलीभगत से दिव्यांग व उसका परिवार निवाले के लिए तरस रहा है। मल्हारगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत रणायरा में 3 साल से चक्कर लगा रहे दिव्यांग राकेश गरीबी रेखा का राशन कार्ड होते हुए भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि विकलांगों का राशन कौन खा रहा है ?

अधिकारियों ने राशन कार्ड तो जारी कर दिया लेकिन इस मामले में जब सचिव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इनका रिकॉर्ड पंचायत में नहीं है, फिर राकेश ने तहसीलदार का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां पर भी उनकी फरियाद कोई सुनने वाला नहीं था। जब तहसील में बैठे रिकॉर्ड संभाल रहे बाबू से राकेश ने चर्चा की तो उनका एक दिव्यांग के प्रति रवैया कुछ और ही देखने को मिला। राकेश ने बताया कि बाबू का कहना है कि 2018 का रिकॉर्ड देखने के लिए हमारे पास समय नहीं है।

मामला रणायरा पंचायत का है, जहां राकेश नाम का युवक अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ गुजर-बसर करता है। किसी हादसे में उनका हाथ कट गया उसके बाद वह काम नहीं कर सकता सिर्फ शासन की योजनाओं पर ही निर्भर हैं। उनका गरीबी रेखा राशन कार्ड तो बना लेकिन उन्हें राशन नहीं मिल रहा है।

राकेश अपनी बेबसी के साथ तकरीबन 3 साल से अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। तहसील से आदेश हुआ गरीबी रेखा के राशन कार्ड का लेकिन पात्रता पर्ची सचिव द्वारा नहीं दी गई सचिव का कहना है कि हमारे पास रिकॉर्ड नहीं है। हैरानी की बात यह है कि यदि गरीबी रेखा का राशन कार्ड बन गया है तो रिकॉर्ड कहां गया ?

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