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हाईकोर्ट ने शुगर मिल के बाहर धरने पर बैठे किसानों को दिया झटका, कर दी जनहित याचिका खारिज

वाहिद संधर शुगर मिल भूना के डायरेक्टर (Director) जरनैल सिंह वाहिद ने बताया कि चीनी मिल को प्राइवेट लोगो के हाथों में देने और गन्ना पिराई न करने के मामले को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

हाईकोर्ट ने शुगर मिल के बाहर धरने पर बैठे किसानों को दिया झटका, कर दी जनहित याचिका खारिज
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हरिभूमि न्यूज. भूना। भूना शुगर मिल बचाओ संघर्ष समिति ने शनिवार को चीनी मिल गेट पर दूसरे दिन भी धरना दिया, जिसका संचालन इनेलो किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष भगवान पाल अहरवां ने किया।

अध्यक्षता किसान नेता चांदी राम कड़वासरा ने की। हालांकि प्राइवेट मिल मालिकों के खिलाफ धरने पर किसानों (Farmers) की संख्या एक दर्जन से अधिक नहीं बढ़ रही है, जिसके कारण मिल बचाओ संघर्ष समिति के चेहरे मुरझाए हुए हैं। शनिवार को चीनी मिल से उखाड़ी जा रही मशीनों को लेकर समिति द्वारा बड़ा फैसला लेने का विचार था, परंतु किसानों की लगातार दो दिनों से धरने पर नाममात्र संख्या ने आंदोलन को लेकर निराश कर दिया है।

इस अवसर पर कर्मचारी नेता कृष्ण कुमार धारनिया, राजवीर सोनी ढाणी डूल्ट, सुखचैन सिंह, मास्टर रणसिंह नैन, बलवीर सिंह, महेंद्र जांडली, रोहताश कुमार आदि भी मौजूद थे। वाहिद संधर शुगर मिल भूना के डायरेक्टर जरनैल सिंह वाहिद ने बताया कि चीनी मिल को प्राइवेट लोगो के हाथों में देने और गन्ना पिराई न करने के मामले को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

हाईकोर्ट की खंडपीठ में चीफ जस्टिस उमा शंकर झा व जस्टिस अरुण पाली ने याचिका में शामिल किए गए दस्तावेजों को देखकर हाईकोर्ट (High Court) ने सुनाई करने से इनकार कर दिया। क्योंकि चीनी मिल में सरकार का अब कोई दखल नहीं है। उपरोक्त जमीन व सम्पूर्ण सम्पत्ति पर वाहिद संधर शुगर मिल के नाम हो चुकी है। खंडपीठ ने 29 सितंबर 2020 को याचिका डिसमिस कर दी थी।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें बिना कोई कसूर के मानसिक व आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। क्योंकि हमने सरकार की पॉलिसी के अनुसार सार्वजनिक रूप से वर्ष 2006 में सहकारी चीनी मिल को करोड़ों में खरीदा था। हम मिल चलाने के लिए पंजाब से हरियाणा में आए थे, परंतु इलाका में गन्ने का उत्पादन न होने के कारण उन्हें प्रति वर्ष लगातार तीन वर्षों तक पांच से सात करोड़ रुपये का घाटा सहन करना पड़ा।

सरकार की कोई सहायता ना मिलने और गन्ना बिजाई नाममात्र रहने से मिल को बंद करना पड़ा था। मिल के डायरेक्टर जरनैल सिंह ने स्पष्ट किया है कि मशीनें बिल्कुल नकारा और कबाड़ हो चुकी हैं, इसलिए उन्हें हटाया जाएगा। हाई कोर्ट के फैसले की प्रतिलिपि वाहिद संधर शुगर मिल ने शनिवार को सार्वजनिक कर दी है। जिससे मिल बचाओ संघर्ष समिति को बड़ा झटका लगा है।

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