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गमजदा रहे टिटौली में फिर होने लगी हंसी-ठिठोली

कोविड-19 की चर्चा शायद ही कभी टिटौली गांव का नाम लिए बिना पूरी हो। अथाह दर्द 55-60 लोगों को खोने से इस गांवों को मिला था। उससे अब लोग धीरे-धीरे उबरने लगे हैं। हर किसी की जिंदगी शनै:शनै: आगे बढ़ रही है। जहां कुछ लोग राेज-रोटी के लिए रोहतक आने लगे हैं तो वहीं किसान प्री-मानूसन की बारिश होने के बाद खरीफ फसलों की बिजाई करने में व्यस्त हैं। जिला मुख्यालय से सटे गांव में जो सड़क सुंदरपुर पहुंचते हुए गांव तक पहुंचती है, उसके दांये-बांय किसान खेतों में काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। गांव के फिर से सुरमयी बन रहे माहौल के बीच टिटौली गांव से अमरजीत एस गिल की ग्राउंड रिपोर्ट।

गमजदा रहे टिटौली में फिर होने लगी हंसी-ठिठोली
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रोहतक : ये चंद ताजा एक्टिव तस्वीरें कोविड-19 के दौरान प्रदेश में सबसे ज्यादा त्रासदी झेलने वाले जिले के गांव टिटौली की हैं। तस्वीरों में नन्ही सी देविका रानी अब गलियों में मस्ती कर रही है। इसके साथ कई और बच्चे खेल रहेे हैं। यह वहीं बिटिया है, जो करीब डेढ़ महीने पहले अपने घर में कैद थी। जब हरिभूमि की टीम गांव में पहुंची तो अबोध बिटिया अपने घर के टूटे दरवाजे से बाहर झांक रही थी। बेटी घर में कैद थी। क्योंकि इनके पास-पड़ोस में बीमारियां कई लोगों की जान ले चुकी थी। अब बीमारियां खत्म हुई थी तो हर कोई अपने काम में व्यस्त हो चुका है। बेटी और दूसरे बच्चे अब पहले की तरह ही गलियों में धमा-चौकड़ी करते हैं। कुछ बच्चे भरी दोपहरी में तालाब में नहा रहे हैं।

चूंकि प्री-मानसून की बारिश हुई है, इसलिए किसान सिर पर बीज का रखकर खरीफ फसलाें की बिजाई के लिए जा रहे हैं। कुछ बुजुर्ग सूबे पहलवान की बैठक के बाहर हुक्का गुड़गुड़ाते देते हुए दिखाई दिए तो कुछ लोग पेड़ों के नीचे बैठकर बिजली के अभाव में ताश खेलकर समय व्यतीत करने में मशग़ूल है। सरकारी राशन डिपो में राशन लेने के लिए लगी कतार अब गांव में सब कुछ सुखद होने की गवाही दे रही है। कुल मिलाकर अब सार यह है कि कोरोना की दूसरी लहर में 55-60 लोगों की असामायिक मौत के बाद अब टिटौली के लोगों की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। महामारी के दौरान जहां लोगों ने अपनों को खोया। वहीं अप्रैल-मई में अलग-अलग परिवारों में 16 बच्चों ने इस गांव में आंखें भी खोली हैं। अब नौ पोती और सात पोतों की दादी लोरी सुनाकर गांव के अथाह दर्द को मात देने की कोशिश में हैं। हालांकि जो जख्म अज्ञात बीमारी ने इस गांव को दिए हैं, उनको भुला पाना इतना आसान नहीं है। एक दिन में नौ अपनों की अर्थियों और जनाजों को बेसहाय और लाचार टिटौली ने सुबकते हुए कंधे दिए। 18 युवाओं को भी अज्ञात बीमारियां निगल गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 8-9 लोगों की मौत कोविड की वजह से हुई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि बाकी के 50 लोग किन कारणों से मरे हैं।

वैक्सीन कार्य की देखरेख कर रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिड़ी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कुलदीप सिंह कहते हैं कि टिटौली के लिए डोज की कमी नहीं होने दी जाएगी। क्योंकि यह गांव जिले में सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा है। डॉ. सिंह दावा करते हैं कि अब गांव में एक भी व्यक्ति को कोविड-19 का पॉजिटिव नहीं है। महामारी के दाैरान जहां लोग कोविड को टेस्ट नहीं करवा रहे थे। वहीं अब लोग कोरोना की पहली डोज लेने के लिए लाइन में लगे हुए हैं। क्योंकि ये अब मान चुके हैं कि बीमारी से पार-पाना है तो बचाव के लिए कोरोना डोज लेनी पड़ेगी। गत 14 जून को स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीनेशन का कार्य शुरू किया है।

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