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Women's Day : आज महिलाओं के हाथों में रहेगी किसान आंदोलन की कमान

100 दिनों से अधिक समय से आंदोलरत किसानों में जोश भरने का काम करेंगी महिलाएं, धरने का नेतृत्व करने के साथ ही आंदोलन की मजबूती के लिए रणनीतियां भी बनाएंगी।

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8 मार्च से किसान आंदोलन का मोर्चा संभालेंगी महिलाएं

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत

तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली की दहलीज पर 100 से अधिक समय से चल रहे आंदोलन की कमान सोमवार को महिलाओं के हाथों में होगी। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर होने वाले महिला किसान सम्मेलन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महिला दिवस के मौके पर देशभर में जहां भी इस तरह के धरने चल रहे हैं, सभी का संचालन महिलाओं के हाथों में रहेगा। महिला किसान अपनी भागीदारी के साथ ही आंदोलन को समर्थन देंगी। महिला किसान सम्मेलन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को दिनभर बैठक की और देशभर से हर वर्ग की महिला किसानों को यहां पहुंचने का कॉल दिया।

बता दें कि केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में किसान 26 नवंबर से आंदोलनरत हैं। इस बीच किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन किसी भी वार्ता में बात सिरे नहीं चढ़ पाई। सरकार जहां कानूनों में फेरबदल की बात कही रही है, वहीं किसानों ने कृषि कानूनों को निरस्त करने से कम कुछ भी मानने से इनकार किया हुआ है। 22 जनवरी के बाद से किसानों व सरकार के बीच कोई वार्ता नहीं हुई है। जिस कारण आंदोलन लंबा खिंचता नजर आ रहा है। सरकार के रुख को देखते हुए किसान भी आंदोलन को मजबूत करने की रणनीतियां बना रहे हैं। इसी कड़ी में आठ मार्च को महिला दिवस के मौके पर आंदोलन की कमान महिलाओं के हाथों में देने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान महिलाएं जहां धरने का नेतृत्व करेंगी, वहीं आंदोलन की मजबूती के लिए रणनीतियां भी बनाएंगी। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मंच से भाषण देंगी महिलाएं

संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को लंबी देर तक चली बैठक में निर्णय लिया है कि आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाएं जहां आंदोलन की कमान सभालेंगी, वहीं मंच से भाषण भी देंगी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि महिलाओं की ओर से ही मंच से भाषण व दूसरे कार्यक्रम भी रखे गए हैं। आंदोलन की मजबूती के लिए महिलाएं ही आगामी रणनीतियां बनाएंगे।

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