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कोरोनाकर्मियों के सामने भूखमरी की नौबत, आंदोलन करते हुए तीन की तबीयत बिगड़ी

कोरोना काल में जिन कर्मचारियों ने दिन रात एक करते हुए लोगों की जान बचाई, ड्यूटी करते हुए अपनी और परिवार की जिंदगी की भी परवाह नहीं की, उन कर्मचारियों को आज दो वक्त की रोटी के बंदोबस्त के लिए रोजगार के लाले पड़ गए हैं। उन्हें धरना देना पड़ रहा है। उनकी मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है, लिहाजा 35 दिनों से हड़ताल जारी है। पढ़िए पूरी खबर-

कोरोनाकर्मियों के सामने भूखमरी की नौबत, आंदोलन करते हुए तीन की तबीयत बिगड़ी
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रायपुर। कोरोना काल में लोगों की जान बचाने के लिए दिन रात एक करके मेहनत करने वाले कर्मचारी रायपुर के बूढ़ातालाब के सामने धरना दे रहे हैं। सोमवार की दोपहर अचानक इनमें से तीन की तबीयत बिगड़ी गई। नारे लगाते हुए तीन महिला कोविडकर्मियों को अचानक चक्कर आ गया। कमजोरी की वजह से तीनों बेसुध हो गईं। इन्हें कुछ देर बाद पहुंची एंबुलेंस की मदद से शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। जहां डॉक्टर्स की निगरानी में इनका इलाज जारी है। गर्मी, उमस के बीच धरना स्थल पर 35 दिनों से डेरा जमाए बैठे इन बेरोजगार युवक-युवतियों की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों के कोविड सेंटर, अस्पताल और जांच से जुड़ी लैब में काम करने वाले हेल्थ वर्कर्स अब बेरोजगार हैं। इन्हें फिलहाल काम से निकाल दिया गया है। कोविड का असर कम हुआ तो कई सेंटर्स भी बंद कर दिए गए। उन्हीं सेंटर्स में काम करने वाले ये कर्मचारी बेरोजगार हो गए। अब क्रांतिकारी कोरोना योद्धा संघ के बैनर तले पिछले कई दिनों से रायपुर में इनका धरना जारी है। कोविड-19 के संकट काल के दौरान अपनी सेवाएं अस्पताल, क्वॉरेंटाइन सेंटर और लैब में दे चुके युवाओं के सामने अब दो वक्त की रोटी का संकट है।

जानकारी मिली है कि इन आंदोलनकारियों में नर्स, वार्ड बॉय, लैब टेक्नीनिशियन जैसे करीब 3 हजार लोग हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि रोजगार की मांग को लेकर जब उन्होंने सरकार के जिम्मेदार अफसरों और नेताओं से मुलाकात की तो इनसे कह दिया गया कि फंड की कमी की वजह से अब उन्हें काम पर नहीं रखा जा सकता। अब मांग है कि इन्हें नियमित तौर पर काम पर रखा जाए और समय पर वेतन दिया जाए। दुर्ग जिले से इस प्रदर्शन में शामिल होने आई संतोषी साहू ने बताया कि काम के दौरान कई बार सम्मानित किया गया। हम भी जान का जोखिम लेकर कोविड-19 के संकट काल के दौरान काम करते रहे। लेकिन अब अचानक हमें बेरोजगार कर दिया गया है जो ठीक नहीं।

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