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रायपुर के बाद दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर के लिए गुड न्यूज, कोरबा में स्थिति डांवाडोल

कोरोना संक्रमण को लेकर आईआईटी कानपुर की नई स्टडी

रायपुर के बाद दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर के लिए गुड न्यूज, कोरबा में स्थिति डांवाडोल
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रायपुर. आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल द्वारा कोरोना संक्रमण को लेकर किए जा रहे अध्ययन में छत्तीसगढ़ के पांच जिले भी शामिल हैं। खास बात ये है कि स्टडी में पहले ही तथ्य सामने आया था कि रायपुर में संक्रमण की रफ्तार कम होगी। अब नए अध्ययन के मुताबित दुर्ग, राजनांदगांव और बिलासपुर में भी संक्रमण कम होगा। हालांकि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर कोरबा में स्थिति डांवाडोल है।

यहां संक्रमण पीक पर आने के बाद कम हुआ और फिर बढ़ रहा है। हरिभूमि से विशेष बातचीत में आईआईटी के प्रोफेसर ने यह जानकारी दी। कुछ दिन पर पहले जब रायपुर में एक ही दिन में रोज हजारों संक्रमति सामने आ रहे थे तब भी प्रोफेसर ने दावा किया था कि अगले कुछ दिनों में रायपुर में संक्रमितों की संख्या कम हो जाएगी। मई के शुरुआती दिनों में अकेले रायपुर के आंकड़े देखने से साफ होता है कि रायपुर में संक्रमितों की संख्या कम हुई है।

देश में भी घटेगा संक्रमण

देश के बारे में प्रोफेसर का कहना है कि हमारे हिसाब से आने वाले समय में देश में कोरोना संक्रमण घटेगा। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों 20 अप्रैल तक चार लाख मरीज सामने आए। इसके बाद संख्या कुछ घटी है, लेकिन आगे के लिए अनुमान है कि भारत में संक्रमितों की संख्या कम होगी। उल्लेखनीय है कि कानपुर आईआईटी के प्रोफेसर श्री अग्रवाल देश के 50 जिलों में कोरोना संक्रमण फैलाव पर अध्ययन कर रहे हैं। इसमें छत्तीसगढ़ के पांच जिले शामिल हैं।

इन शहरों के लिए भी अच्छी खबर

प्रोफेसर का दावा है कि रायपुर के बाद दुर्ग, राजनांदगांव और बिलासपुर में भी संक्रमितों की संख्या कम होगी। उनका कहना है कि दुर्ग तेजी से नीचे आ रहा है। इसी तरह राजनांदगांव में भी संक्रमितों की संख्या कम हो रही है। बिलासपुर के बारे में उनका कहना है कि यहां पहले रोगी बढ़े, फिर कम हुए। अगर आने वाले दिनों में संक्रमित कुछ और भी बढ़े, तो कोई खास बात नहीं, लेकिन कुल मिलाकर बिलासपुर में रोगियों की संख्या कम होगी।

संभल नहीं रहा कोरबा

कोरबा के संबंध में किए गए अध्ययन के बारे में बताया गया है कि यहां कोरोना पीक पर आया, फिर नीचे आया और अब फिर बढ़ता हुआ दिख रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि यहां स्थिति डांवाडोल है। इसके पीछे वजह ये सामने आई है कि कोरबा एक औद्योगिक शहर होने के कारण यहां बाहर से पलायन कर आने वाले श्रमिकों की वजह से संक्रमण बढ़ता दिख रहा है। प्रोफेसर ने कहा कि हमने जांच के लिए जो मॉडल बनाया है, वह सही तथ्य को पकड़ नहीं पा रहा है, क्योंकि बाहर से आने वाले संक्रमितों की संख्या पता नहीं लगती। कोरबा में जैसा होता दिख रहा है, आमतौर पर दूसरे शहरों में ऐसा होता नहीं दिखा है।

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