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टीवी जगत में साल 2018 में सुपरनेचुरल पावर्स का रहा दबदबा तो वहीं क्रिएटिविटी की भरमार कलाकार पर पड़ी भारी

2018 में टीवी जगत में सुपरनेचुरल सिरियल्स का बोलबाला रहा। इस साल सिरियल्स में सास-बहू ड्रामा और किचन पॉलिटिक्स के बदले सुपरनेचुरल पावर्स पर कई सीरियल्स की भरमार रही।

टीवी जगत में साल 2018 में सुपरनेचुरल पावर्स का रहा दबदबा तो वहीं क्रिएटिविटी की भरमार कलाकार पर पड़ी भारी

साल 2018 में टीवी जगत में खास बदलाव नहीं देखा गया है। इस साल 2018 में टीवी जगत में कई सुपरनेचुरल सिरियल्स का बोलबाला रहा जैसे डायन, नागिन, काल भैरव रहस्य 2 आदि। साल की टीवी जगत में पैसे कमाने की होड़ ने कलकारों के असली नाम को ही दबा दिया। आज हम कुछ ऐसे ही सिरियल्स के बारे में बात करेंगे।

सुपरनेचुरल-थ्रिलर सीरियल्स का बोल-बाला

साल 2018 में हर टीवी चैनल को अपनी प्रोग्रामिंग में बदलाव करते हुए सास-बहू सीरियलों से पीछा छुड़ाकर सुपर नेचुरल फैंटेसी, थ्रिलर के साथ ही एडल्ट कंटेंट वाले सीरियलों का सहारा लेना पड़ा।

सुपर नेचुरल सब्जेक्ट पर बेस्ड ‘लाल इश्क’, कयामत की रात’, ‘नागिन’, ‘विष या अमृत : सितारा’, ‘नजर’ जैसे दर्जनों सीरियलों ने काफी शोहरत बटोरी। इसी के चलते दिसंबर 2018 में इसी तरह के ‘तंत्र’, ‘डायन’, ‘काल भैरव रहस्य-2’, ‘मनमोहिनी’ जैसे सीरियलों की शुरुआत हुई, जो काफी पॉपुलैरिटी बटोर रहे हैं।

क्रिएटिविटी-एक्टर्स की अहमियत खत्म

2018 की शुरुआत से ही टीवी चैनलों ने जिस ट्रेडिशन को फॉलो किया, वह क्रिएटिविटी का दमन करना ही कहा जाना चाहिए। अब निर्माता और चैनल का यही उद्देश्य है कि एक ही सीरियल से ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना, इसलिए अधिकतर नए सीरियल में नए कलाकार नजर आते हैं।

सीरियल के क्रेडिट में किसी भी कलाकार का नाम नहीं दिया जाता। अब दर्शक सीरियल देखकर सिर्फ किरदार का नाम जान पाते हैं, कलाकार का नाम पता ही नहीं चल पाता है।

ऐसे में कलाकार की भी नजर पैसे पर ज्यादा रहती है, जिसकी वजह से वह अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारने पर कम ध्यान देते हैं, जिसका असर पूरे सीरियल पर पड़ता है।

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