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छोटी-छोटी खुशियां मेरे लिए धन-दौलत से ज्यादा जरूरी है: राजीव खंडेलवाल

लंबे गैप के बाद राजीव खंडेलवाल टीवी पर चैट शो ‘जज्बात-संगीन से नमकीन तक’ को होस्ट करते दिखेंगे।

छोटी-छोटी खुशियां मेरे लिए धन-दौलत से ज्यादा जरूरी है: राजीव खंडेलवाल

लंबे गैप के बाद राजीव खंडेलवाल टीवी पर चैट शो ‘जज्बात-संगीन से नमकीन तक’ को होस्ट करते दिखेंगे। राजीव खंडेलवाल सीरियल ‘कहीं तो होगा’ से पॉपुलर हुए थे, टीवी का जाना-माना नाम बन गए थे। इसके बाद राजीव ने चुनिंदा सीरियल्स में काम किया। फिर ‘आमिर’ फिल्म से बॉलीवुड डेब्यू किया। पहली ही फिल्म में उनके काम को पसंद किया गया। लेकिन आगे उनकी फिल्मों को सक्सेस कम ही मिली। ऐसे में राजीव ने बतौर होस्ट टीवी पर कुछ शोज किए। एक सीरियल ‘रिपोर्टर’ भी किया। अब वह जीटीवी पर आज से शुरू हो रहे चैट शो ‘जज्बात-संगीन से नमकीन तक’ को होस्ट करते दिखेंगे। हाल ही में इस शो से जुड़ी बातचीत राजीव खंडेलवाल से हुई।

आप लंबे समय बाद चैट शो ‘जज्बात-संगीन से नमकीन तक’ को होस्ट कर रहे हैं, यह चैट शो किस तरह का है?

जीटीवी पर तकरीबन 17-18 साल पहले एक्टर फारुख शेख का चैट शो ‘जीना इसी का नाम है’ आता था, यह शो बहुत पॉपुलर हुआ था। जिस तरह का टच उस शो में था, कुछ वैसा ही हमारा नया चैट शो भी है। जब मेरे पास ‘जज्बात-संगीन से नमकीन तक’ का ऑफर आया तो मैंने तुरंत हामी भर दी। हमारे शो में हर फील्ड की हस्तियां आएंगी। मुझे उनसे गपशप करनी है। साथ ही कुछ चटपटे, नमकीन किस्म के सवाल भी करूंगा, जिनके बारे में ऑडियंस जानना चाहती है। शुरुआती एपिसोड्स में रोनित रॉय आएंगे। इसके बाद राम कपूर और साक्षी तंवर शामिल होंगे। मैंने अपनी तरफ से शो को खास बनाने के लिए पूरी तैयारी की है। इसमें मैं होस्ट से ज्यादा गेस्ट का दोस्त बनकर बात करूंगा।

शो का टाइटल ‘जज्बात-संगीन से नमकीन तक’ है, इसका मतलब क्या है?

जज्बात यानी फीलिंग्स। इसका एक मतलब केवल बातचीत भी है यानी एक शख्स से दूसरे शख्स की बात। जहां तक संगीन और नमकीन शब्दों की बात है, तो संगीन का मतलब है, अहम बात और नमकीन का मतलब है, चटपटी बातें। इस तरह हम शो में बातचीत के जरिए संगीन से लेकर चटपटी बातें तक करेंगे।

अगर गेस्ट की जगह पर आपको बैठा दिया जाए और आपसे संगीन और नमकीन सवाल किए जाएं, तो आप क्या करेंगे?

अगर आप पब्लिक पर्सनालिटी हैं, एक्टिंग, आर्ट, पॉलिटिक्स जैसी फील्ड से जुड़े हैं तो लोग हमसे सवाल करेंगे ही। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मैं बिल्कुल तैयार हूं, गेस्ट की जगह पर बैठकर जवाब देने के लिए।

आप अपनी अब तक की एक्टिंग जर्नी से कितने सैटिस्फाइड हैं?

अपने करियर से पूरी तरह सैटिस्फाइड हूं। पंद्रह साल पहले मैं जयपुर से मुंबई आया था, ना किसी को जानता था, ना पता था कि आगे क्या करना है। लेकिन अब तक टीवी, फिल्म, एड फिल्में, होस्टिंग, चैट शोज सब तरह का काम किया है। इन दिनों एक वेब सीरीज भी कर रहा हूं।

लेकिन आपको नहीं लगता कि आपके टैलेंट का सही इस्तेमाल फिल्मों में नहीं हुआ?

मैंने ‘आमिर’, ‘शैतान’, ‘टेबल नं 21’, ‘साउंड ट्रैक’ जैसी फिल्में की हैं। ये सभी फिल्में मेरी टाइप की थीं। हर फिल्म में मुझे अलग तरह का काम करने का मौका मिला।

मैंने कम लेकिन मीनिंगफुल काम किया। लेकिन जब मैंने इन सभी फिल्मों में काम किया, तब इस तरह के जॉनर की फिल्मों का दौर नहीं था। अब इस तरह की फिल्में पसंद की जाने लगी हैं। बॉलीवुड कंटेंट लेवल पर बहुत बदल गया है।

क्या कमर्शियल सिनेमा करने की तमन्ना रखते हैं?

मैं मानता हूं कि लोगों को कमर्शियल फिल्में पसंद आती हैं। लेकिन मैंने अपनी तरफ से इस तरह की फिल्मों का हिस्सा बनने के लिए कभी कोशिश नहीं की। लेकिन अभी भी वक्त नहीं निकला है।

आपकी फैन फॉलोइंग बहुत है, लेकिन आप लाइमलाइट से दूर रहते हैं?

हां, मुझे फैंस ने बेशुमार प्यार और अपनापन दिया है। लेकिन मुझे आम जिंदगी जीना पसंद है। बहुत छोटी-छोटी खुशियां मेरे लिए धन-दौलत से ज्यादा जरूरी है। मैंने गोवा के अपने फार्म हाउस पर ऑर्गेनिक खेती की है। वहां लौकी, टमाटर और फूल उगाए जाते हैं। जब मुंबई में काम नहीं होता है तो गोवा चला जाता हूं, वहां ऑर्गेनिंग फार्मिंग करता हूं, ऐसा करके मुझे बहुत खुशी होती है। मुंबई में भी अगर होता हूं तो साइक्लिंग करता हूं, पढ़ता हूं, टीवी शोज देखता हूं। इस तरह आम जिंदगी बिताता हूं। मेरे लिए ये बातें मायने नहीं रखती हैं कि मेरा बैंक बैलेंस कितना है, मेरे ट्विटर, इंस्टाग्राम या फेसबुक पर कितने फॉलोवर्स हैं। मेरे लिए सोशल मीडिया जरूरी है, लेकिन पूरी जिंदगी की खुशियां उससे हासिल नहीं की जा सकती हैं। मैं एक मिडिल क्लास शख्स हूं, मेरे लिए वैल्यूज बहुत मायने रखते हैं, परिवार मायने रखता है।

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