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‘ठाकरे’ को लेकर बोले नवाजुद्दीन सिद्दीकी, ''मैं अपनी कोई इमेज नहीं चाहता''

‘मांझी : द माउंटेन मैन’ और ‘मंटो’ के बाद एक और बायोपिक कर रहे नवाजुद्दीन सिद्दीकी फिल्म ने ‘ठाकरे’ को लेकर कहा कि मैं अपनी कोई इमेज नहीं चाहता, मैं किरदार की लंबाई नहीं गहराई मापता हूं।

‘ठाकरे’ को लेकर बोले नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मैं अपनी कोई इमेज नहीं चाहता
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नवाजुद्दीन सिद्दीकी फिल्म ‘मांझी : द माउंटेन मैन’ और ‘मंटो’ के बाद एक और बायोपिक ‘ठाकरे’ में नजर आएंगे। यह फिल्म महाराष्ट्र के फेमस पॉलिटिकल लीडर रहे बाला साहब ठाकरे पर बेस्ड है। बाला साहब ठाकरे का रोल निभाने नवाजुद्दीन सिद्दीकी को बायोपिक फिल्मों में काम करने की वजह से उन्हें बायोपिक किंग कहा जाने लगा है, इस पर क्या कहेंगे? जब उनसे ये सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर मुझे बायोपिक किंग माना जा रहा है तो मैं इसे कॉम्प्लिमेंट के रूप में लेता हूं। लेकिन मैं खुद को बायोपिक किंग नहीं मानता हूं। ‘मंटो’, ‘ठाकरे’ और ‘मांझी: द माउंटेन मैन’ जैसी फिल्में करना एक एक्टर के तौर पर मेरे लिए बेहतरीन एक्सपीरियंस रहा। लेकिन मैंने गैंगस्टर, पुलिस ऑफिसर जैसे किरदार भी अच्छे से निभाए हैं। मैं अपनी कोई इमेज नहीं चाहता, मैं किरदार की लंबाई नहीं गहराई मापता हूं।

बाला साहब ठाकरे महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय नेता थे। ऐसे नेता का किरदार पर्दे पर निभाना कितना मुश्किल रहा? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि बाला साहब ठाकरे पब्लिक के लीडर थे, उन्होंने खुद कभी इलेक्शन नहीं लड़ा, न उन्हें किसी पद की लालसा थी। पूरे 82 साल तक लोगों की आंखों के सामने रहे, जनता के दिलों पर राज किया।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि ऐसे लोकप्रिय नेता की हर बात, उनकी बोल-चाल की शैली, उनकी आदतें पब्लिक डोमेन में रहती हैं, इसलिए मेरे लिए बाला साहब बनना चैलेंजिंग था। लेकिन फिल्म के टीजर और ट्रेलर को जिस तरह का रेस्पॉन्स मिला है, उससे मैं खुश हूं। अगर बाला साहब के किरदार को कुछ हद तक भी निभाने में कामयाब रहा तो खुद को धन्य मानूंगा।

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