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पंचकूला में 20 मार्च को इकट‍्ठा हाेंगे पूर्व आईएएस, आईपीएस और कृषि विशेषज्ञ, यह है वजह

जाट सभा पंचकूला चंडीगढ़ अध्यक्ष एवं हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी डॉ. महेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि जाट सभा कार्यकारिणी की बैठक में पंचकूला में होने वाली 'किसान कल्याण विचार गोष्ठी के आयोजन बारे विचार-विमर्श किया गया।

पंचकूला में 20 मार्च को इकट‍्ठा हाेंगे पूर्व आईएएस, आईपीएस और कृषि विशेषज्ञ, यह है वजह
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चौधरी छोटुराम जाट भवन में जाट सभा पंचकुला चंडीगढ़ के अध्यक्ष एवं हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी डॉ. महेंद्र सिंह मलिक व अन्य सदस्य।

पंचकूला। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अब पूर्व आईएएस, आईपीएस तथा कृषि वैज्ञानिकों समेत अनेक बुद्घिजीवी आगामी 20 मार्च को पंचकूला स्थित 'चौधरी छोटुराम जाट भवन' में विचार गोष्ठी का आयोजित करके अपनी भागीदारी बढ़ाएंगे।

जाट सभा पंचकूला चंडीगढ़ अध्यक्ष एवं हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी डॉ. महेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि जाट सभा कार्यकारिणी की बैठक में गैर-राजनैतिक संगठन 'कीर्ति किसान फोरम और जाट सभा चंडीगढ़ पंचकूला संयुक्त बैनर तले 20 मार्च को पंचकूला में होने वाली 'किसान कल्याण विचार गोष्ठी के आयोजन बारे विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. मलिक, जो इस गोष्ठी के आयोजन सचिव भी हैं, ने बताया कि गोष्ठी को पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना से सेवानिवृत्त एग्रो-इकॉनोमिक्स एक्सपर्ट प्रोफेसर रणजीत सिंह घुम्मन, भारत सरकार के पूर्व सैके्रटरी एस.एस बोपाराय (सेवानिवृत्त आईएएस), हरियाणा पुलिस पूर्व डीजीपी केपी सिंह (सेवानिवृत्त आईपीएस),पंजाब सरकार के पूर्व चीफ सैक्रेटरी आरआई सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस), एवं एग्रो- इकॉनोमिक्स एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा, हरियाणा पब्लिक हैल्थ इंजीनियरिंग विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर-इन-चीफ आरएन मलिक, हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी डॉ. महेंद्र सिंह मलिक समेत अनेक बुद्घिजीवी केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीनों कृषि कानूनों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

उन्होंने बताया कि जाट सभा पंचकुला व चंडीगढ़ की कार्यकारिणी की बैठक आरंभ होते ही सर्वप्रथम वर्तमान में चल रहे किसान आंदोलन में शहीद हुए सैंकड़ों किसानों की आत्मिक शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर उनको श्रद्घांजलि दी गई। इसके बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए शहीद किसानों के प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा 50 लाख देने की मांग करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा गया। पत्र में यह भी मांग की गई कि केंद्र सरकार आंदोलनरत किसानों की बात को तुरंत स्वीकार कर इस मामले का समाधान निकाले।



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