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फाइलों में सिमट कर रह जाते हैं भ्रूण व नवजात शिशुओं के शव मिलने के मामले

बीते कुछ वर्षों में यहां तीन नवजात शिशु के शव व तीन भ्रूण मिले हैं। इन छहों मामलों में केस दर्ज हुए और जांच भी शुरू हुई, लेकिन कोई भी केस सुलझ नहीं पाया।

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नवजात शिशु (प्रतीकात्मक फोटो)

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

इलाके में नवजात शिशु के शव व भ्रूण मिलने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में यहां तीन नवजात शिशु के शव व तीन भ्रूण मिले हैं। इन छहों मामलों में केस दर्ज हुए और जांच भी शुरू हुई, लेकिन कोई भी केस सुलझ नहीं पाया। पहचान छिपाने के मकसद से भ्रूण व शिशु शव को कूड़े में डालने वाले गुनहगार पकड़ से बाहर हैं। तमाम मामले फाइलाें में सिमट कर रह गए हैं।

यहां मिले हैं नवजातों के शव

बहादुरगढ़ में रेलवे लाइन किनारे 28 जनवरी की अल सुबह एक नवजात बच्ची का शव मिला। जन्म के कुछ घंटों बाद ही कन्या को लाइन किनारे फेंक दिया गया। यह इस तरह का अकेला मामला नहीं है। इससे पहले गांव रिवाड़ी खेड़ा में 29 सितंबर की सुबह एक नवजात शिशु को सड़क किनारे फेंका गया था। शव को कुत्ते नोंच रहे थे। जब तक किसी की नजर पड़ती, गर्दन से नीचे का हिस्सा खाया जा चुका था। यह भी पता नहीं चल पाया कि शव लड़की का था या लड़के का। गत 20 जनवरी 2021 को गांव जाखोदा के खेतों में एक नवजात शिशु का शव पाया गया था। इस शिशु को जन्म के तुरंत बाद ही खेतों में फेंका गया था। इसे भी कहीं हद तक कुत्ते नोंच चुके थे। ये तीनों ही मामले दर्ज हैं लेकिन कातिल कौन है, किसी को पता नहीं।

इन स्थानों पर मिले हैं भ्रूण

गत 14 जुलाई 2021 की सुबह शहर के बस अड्डे के एक हिस्से में फैली गंदगी में करीब चार महीने का भ्रूण मिला था। इस भ्रूण को जानवरों द्वारा नोचा गया था। प्रारंभिक तौर पर यह पता नहीं चल पाया था कि भ्रूण लड़के का है या लड़की का। इसके अलावा गांव लडरावण में सड़क किनारे गंदगी के ढेर में एक बच्ची का भ्रूण मिला था। वहीं कुछ वर्ष पहले लाइनपाार क्षेत्र में गंदगी के ढेर में एक अर्द्ध विकसित भ्रूण पाया गया। इसके अलावा भ्रूण मिलने के और भी कई मामले सामने आते रहे हैं। हर बार केस दर्ज हुए और पुलिस ने जांच शुरू की। अस्पतालाें और आशा वर्करों से रिकार्ड लिया गया। तेजी से शुरू हुई जांच ढीली पड़ती चली गई और आखिर में मामला फाइलों में सिमट कर रह गया। गुनहगारों का पता ही नहीं चल पाया।

लोगों ने जताई चिंता

ऐसे बढ़ते मामलों पर शहर के लोगों ने भी दुख जताया है। शहर के निवासी सचिन व नवीन ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज पर बुरा असर डालती हैं। ऐसा घिनौना कार्य करने वाले लोग समाज मंे कलंक से कम नहीं हैं। हालांकि सरकार ने लिंगभेद को दूर करने के लिए कई अच्छी योजनाएं चलाई हैं। भ्रूण लिंग जांच सेंटरांे को भी पकड़ा जाता है, लेकिन इस दिशा में और सख्ती बरते जाने की जरूरत है। केवल केस दर्ज करने से कुछ नहीं होगा। दोषियों को पकड़कर सख्त सजा देनी होगी। जब तक सख्ती नहीं होगी, तब तक ऐसे मामले नहीं थमेंगे। इसके अलावा समाज को भी जागरूक होने की जरूरत है। बेटा-बेटी एक समान है।

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