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मनमाने दाम पर किसानों से बाजारों में वसूली जा रही बारदाने की कीमत

105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के लिए सोसायटियों को 25 करोड़ बोरे की आवश्यकत, गुणवत्ता की जांच किए बिना मनमाने दाम पर 50 बोरा का थमाया जा रहा गठ्ठा, मौखिक तौर पर किसानों को स्वेच्छा से बोरे देने को किया जा रहा बाध्य। पढ़िए पूरी ख़बर...

मनमाने दाम पर किसानों से बाजारों में वसूली जा रही बारदाने की कीमत
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आरंग: सोसायटियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु बोरों को ले शासन-प्रशासन के लिखित निर्देश नहीं होने से किसान परेशान हैं। इसी के चलते जहां धान उपार्जन केन्द्रों में रोजाना किसानों और केन्द्र प्रभारियों के बीच तनातनी का माहौल रहता है, वहीं बोरे की कमी के चलते धान न बिक पाने की आंशका से भयभीत किसान कटाई, मिसाई के इस मौसम में बोरे खरीदने भटक रहे हैं, जिसका फायदा मनमानी कीमत वसूल कर व्यापारी उठा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी हेतु सोसायटियों को 25 करोड़ बोरे की आवश्यकता है और किसानों से 25 प्रतिशत बोरे लेने संबंधी शासन-प्रशासन के कथित मौखिक निर्देश के चलते अपना धान बेचने किसानों को 6.25 करोड़ बोरों का जुगाड़ करना पड़ेगा जिसे ले किसान सॉसत में हैं।

ज्ञातव्य हो कि प्रदेश सरकार ने वर्तमान कृषि सत्र में समर्थन मूल्य पर 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसे कि सोसायटियों में पंजीकृत तकरीबन 23 लाख किसानों से 2399 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से लिया जाना है। प्रदेश सरकार के मुखिया भूपेश बघेल ने धान खरीदी हेतु केन्द्र सरकार द्वारा पर्याप्त बोरे न उपलब्ध कराने का आरोप सार्वजनिक तौर पर लगाया है और मिली जानकारी के अनुसार बोरों की कमी को देखते हुये धान खरीदी को सुचारू रूप से चलाने शासन ने 25 प्रतिशत बोरे किसानों से लेने की कथित नीति बनायी है पर इस संबंध में किसी भी सोसायटी को लिखित आदेश नहीं मिला है महज मौखिक निर्देश दिये गये हैं और किसानों के मुखर होते विरोध को देखते हुये इसकी बाध्यता न होने व किसानों द्वारा स्वेच्छा से बोरे देने की बात प्रचारित की जा रही है। किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा ने जानकारी दी है कि किसानों से बोरे लेने के संबंध में लिखित आदेश नहीं होने व इस संबंध में शासन-प्रशासन के रव्वैया को देखते हुये किसान परेशान हो चले हैं। किन्हीं केन्द्रों में किसानों से 25 प्रतिशत तो कहीं 50 प्रतिशत बोरे स्वेच्छा से देने के नाम पर मंगाया जा रहा है तो कहीं शासन द्वारा पूरा बोरा किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

किसानों से बोरे लेने के मामले में भी किसानों के बीच भेदभाव कर उन्हें छोटे व बड़े किसान में बांट उनके मध्य खाई को और चौड़ा करने का आरोप लगाते हुये उन्होंने कहा है कि किसानों से बोरों की मांग अचानक सामने आने से किसान बोरे खरीदने दौड़ लगा रहे हैं और इसका फायदा व्यापारी मनमानी कीमत वसूल कर उठा रहे हैं। मांग बढ़ने के साथ-साथ दिनो-दिन कीमत में बढ़ोतरी की जानकारी देते हुये उन्होंने बतलाया है कि आज की स्थिति में प्रति बोरे की कीमत 40 से 50 रूपया वसूला जा रहा है और किसानों से बोरों की गुणवत्ता जांच कराये बिना 50 बोरों का गठ्ठा बना थमाया जा रहा है जिसमें गुणवत्ताहीन बोरे भी रहते हैं। धान खरीदी के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने सोसायटियों को 25 करोड़ बोरों की दरकार होने व इसमें से 25 प्रतिशत अर्थात 6.25 करोड़ बोरों का जुगाड़ करने का जिम्मा शासन-प्रशासन द्वारा किसानों पर कथित रुप से डाले जाने की जानकारी देते हुये उन्होंने कहा है कि इस मात्र में बोरों का जुगाड़ कर पाना किसानों के लिये संभव नहीं है। उन्होंने शासन-प्रशासन के कर्ताधर्ताओं से आग्रह किया है कि किसानों से बोरे लिये जाने के संबंध में स्पष्ट लिखित निर्देश जारी करने के साथ-साथ शासन द्वारा निर्धारित 25 रूपये प्रति नग बोरे मिलने वाले स्थानों की जानकारी किसानों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था करावे या फिर इस कीमत पर किसानों को बोरे उपलब्ध कराने, किसान नगद भुगतान करने तैयार है।

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