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जानिए योगा करने से कैसे रहें रोगों से दूर

आधुनिक जीवनशैली में स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहने के लिए योगासन करना सामान्य कसरत से लाभकारी माना जा रहा है।

जानिए योगा करने से कैसे रहें रोगों से दूर
नई दिल्ली. शरीर के सभी अंगों को सही प्रकार से रक्त पहुंचे तो शरीर स्वस्थरहता है। योगासन से रक्त संचार बढ़ता है। रक्त संचार करने वाले अवयव पर योगासन का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रक्त संचारित होने का काम अच्छी तरह होता है। रक्त के परिभ्रमण से सभी अवयवों को पौष्टिक तत्व सही तरीके से मिलता है और शुद्धिकरण का काम भी तेजी से होता है। योगासन से शरीर की गंदगी पसीने के रूप में बाहर निकल जाती है और शरीर तरो-ताजा हो जाता है।
ग्रंथियों पर प्रभाव
मानव शरीर में बिना वाहिनी वाली कई ग्रंथियां होती हैं, जिनसे द्रव निकलकर सीधे रक्त में मिल जाता है। इन्हें एंडोक्राइन ग्लैंड्स यानी अंत:स्रावी ग्रंथि कहते हैं। इन ग्रंथियों से निकलने वाले द्रव हार्मोंस के कारण ही हमारा शारीरिक और मानसिक विकास होता है। शरीर में पाई जाने वाली ये ग्रंथियां हैं-थायरॉयड, पैराथायरॉयड, थाइमस, पीनियल, पिट्यूटरी, एड्रीनल, पैनक्रियाज और गोनड्स। थायरॉयड गले के पास होती है।
इससे शरीर की कई रासायनिक क्रियाएं अच्छी तरह से होती हैं। इसकी कमी से इंसान मंद बुद्धि का शिकार हो जाता है। सर्वांगासन से थायरॉयड का स्राव नियंत्रित रहता है। इसी प्रकार पीनियल, मस्तिष्क में होती है। यह सेक्स हार्मोन को नियंत्रित करती है। पिट्यूटरी ग्रंथि के द्रव की कमी से बच्चे का विकास रुक जाता है और अधिकता होने से इसमें अधिक बढ़ोत्तरी होती है। शीर्षासन से पीनियल बॉडी और पिट्यूटरी ग्रंथि का स्राव नियंत्रित होता है। इन ग्रंथियों को स्वस्थ रखने में योगासन प्रभावी भूमिका निभाता है। योगासन गं्रथियों को नियंत्रित ही नहीं करते, बल्कि अनावश्यक द्रव प्रवाह यानी कमी या अधिकता दोनों को नियंत्रित करता है।
श्वसन संस्थान पर प्रभाव
योगासन करने से श्वांस-प्रश्वांस जल्दी-जल्दी चलने लगते हैं। ऐसी स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर ढंग से होती है, फेफड़ों का व्यायाम होता है। शरीर से कार्बनडाइऑक्साइड अधिक मात्रा में बाहर निकलता है और ऑक्सीडेशन अधिक होने से शरीर की सफाई होती है। योगासन से श्वांस-प्रश्वांस पर नियंत्रण के अलावा श्वसन पर भी नियंत्रण होता है। श्वांस का जीवन, आयु और प्राण से घनिष्ठ संबंध है। श्वांस वायु को, जिसे प्राण भी कहते हैं, नियंत्रित करने से दीर्घजीवन मिलता है।
पाचन तंत्र पर प्रभाव
योगासन से पाचन शक्ति बढ़ती है। योगासनों में बहुत सी क्रियाएं, बंध और आसन हैं, जो पाचन तंत्र पर प्रभाव डालते हैं। इससे भोजन पचने में मदद मिलती है। अग्निसार, उड्यान बंध और कई आसन और क्रियाएं पाचन संस्थान को मजबूत करती हैं। योगासनों से जठराग्नि तीव्र होती है। आसन में जब हम किसी विशेष अवस्था में कुछ देर तक रहते हैं तो कई अंगों की मांस-पेशियांे, हड्डियों, तंतुओं और पूरे तंत्र पर दबाव या खिंचाव पड़ता है, इससे उस अवयव-विशेष का व्यायाम होता है और वह मजबूत होता है।
इस तरह योगासन हमारे पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। महर्षि पतंजलि का मानना था कि अगर आपको ईश्वर को जानना है, सत्य को जानना है, सिद्धियां प्राप्त करनी हैं तो शुरुआत शरीर के तल से करनी होगी। शरीर को बदलो-मन बदलेगा। मन बदलेगा तो बुद्धि बदलेगी। बुद्धि बदलेगी तो आत्मा स्वत: ही शुद्ध हो जाएगी। इस तरह विभिन्न तरह के योगासन शरीर, मन और आत्मा में नवचेतना का संचार करते हैं। े
(योग विशेषज्ञ आचार्य दीपक तेजस्वी से बातचीत पर आधारित)
आधुनिक जीवनशैली में स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहने के लिए योगासन करना सामान्य कसरत से लाभकारी माना जा रहा है। दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. एस.सी. मनचंदा योग की महत्ता के बारे में कहते हैं कि किसी कठिन और थका देने वाली दो-ढाई घंटे की लंबी कसरत के बजाय बीस मिनट से आधे घंटे तक किया जाने वाला योगाभ्यास ज्यादा लाभप्रद होता है। कसरत में कई बार नुकसान की संभावना रहती है क्योंकि पता नहीं होता, शरीर में कौन सा रोग पल रहा है और की जा रही कसरत अपने दबाव से उस रोग को बढ़ा या बिगाड़ सकती है।
कसरत की बजाय योग में ऐसा कोई खतरा नहीं है। कोई आसन अभ्यास अनुकूल नहीं है तो आपकी सांस उखड़ने लग सकती है या हो सकता है कि वह आसन संभव ही न हो। योग के इन फायदों के साथ हाल ही में हुए अनुसंधानों में यह भी साबित हुआ है कि योग से मधुमेह, अस्थमा और हृदय रोग जैसी जटिल बीमारियां भी बिना किसी औषधि और उपचार के नियंत्रित की जा सकती है। चिकित्सा विज्ञान दवाओं और इलाज के बावजूद रोग के ठीक होने या उसे काबू करने की गारंटी नहीं लेता लेकिन इसके विपरीत योग तो निश्चित आश्वासन देता है, क्योंकि यह शरीर में मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता से तालमेल बैठाता है।
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