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वैलेंटाइन डे 2019 : मन करता है अपनी पड़ोसन संग डेट पर चला जाऊं, पढ़ें मजेदार व्यंग्य

यूं तो मैं हर वक्त ही बौराया-सा रहता हूं, मगर वसंत में बौराना मुझे ज्यादा भाता है। वसंत की खुमारी कुछ इस तरह दिलो-दिमाग पर छाई रहती है कि मन करता है अपनी पड़ोसन संग डेट पर चला जाऊं! हालांकि पड़ोसन संग डेट पर जाना इतनी बड़ी बात तो नहीं पर यह सोचकर ठहर जाता हूं कि बीवी की जली-कटी बाद में कौन सुनेगा!

वैलेंटाइन डे 2019 : मन करता है अपनी पड़ोसन संग डेट पर चला जाऊं, पढ़ें मजेदार व्यंग्य

यूं तो मैं हर वक्त ही बौराया-सा रहता हूं, मगर वसंत में बौराना मुझे ज्यादा भाता है। वसंत की खुमारी कुछ इस तरह दिलो-दिमाग पर छाई रहती है कि मन करता है अपनी पड़ोसन संग डेट पर चला जाऊं! हालांकि पड़ोसन संग डेट पर जाना इतनी बड़ी बात तो नहीं पर यह सोचकर ठहर जाता हूं कि बीवी की जली-कटी बाद में कौन सुनेगा!

वसंत का नशा बीवी भला क्या जाने। वसंत सिर्फ मौसम को ही नहीं बल्कि दिल के मौसम को भी रंगीन बना डालता है। मन मयूर और इच्छाएं हिरन हो जारी हैं। इश्क की रंगत हर दिशा में बहने लगती है। कदम बहकने लगते हैं। बहके कदम मजा भी क्या खूब देते हैं, लेकिन, वही है न कि बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद। बीवियां क्या जानें पतियों का वसंत!

चचा वेलेंटाइन भी क्या खूब थे। उन्होंने भी इस दिन को वसंत के आसपास ही चुना। एक ओर वसंत का जोर, दूसरी तरफ वेलेंटाइन का जोश। ऐसे में भला कौन मूर्ख होगा, जो होश न खो देगा। अब इतना तो चलता है। मैं या कोई भी इंसान संत तो है नहीं कि चौबीस घंटे संतई ही करता फिरे। अमां, कभी तो मन में हिलोरें और दिल में उमंगें जगेंगी ही न। मन में पल रहीं इच्छाओं को मारना सबसे बड़ा पाप है।

शादीशुदा हो जाने का मतलब यह थोड़े न होता है कि प्रत्येक संसारिक मोह त्याग दो, जोगी बन जाओ। एक ही खूंटे से ताउम्र बंधे रहो। रात-दिन एक ही प्राणी की पूजा करते रहो। ना जी ना, ऐसी अनरोमांटिक जिंदगी मुझे कतई न जीनी। न ही बीवी को जीने देनी है। वो अपना वसंत मनाने के लिए आजाद है, मैं अपना। दिलों में बस गुंजाइश रहनी चाहिए।

सच बताऊं, वसंत, डेट, रोमांस, वेलेंटाइन, फ्लर्ट का असली आनंद है शादी का बाद ही। ऐसी अवस्था में किसी खास प्रकार के अनुभव की जरूरत नहीं रहती। इधर जब से सारा ज्ञान गूगल और व्हाट्सएप्प पर क्या मिलने लगा है, रोमांस की दुनिया ही बदल गई है। बड़ी खुशनसीब है डिजिटल समय में रोमांस करने वाली हमारी युवा पीढ़ी। तब हमारे जमाने में तो सारे बसंत, रोमांस और वेलेंटाइन पत्रों में ही मन जाया करते थे। जब तक उधर से हां का जवाब आता था, उधर बंदे या बंदी की दूसरी जगह शादी भी पक्की हो जाती थी। उस रोमांस और वसंत का अपना ही आनंद था।

वसंत और रोमांस तो अब भी वही है पर मनाने के तौर-तरीके बदल गए हैं। डेट प्राथमिकता में आ गई है। बिना डेटिंग किए ऐसा लगता है मानो न वसंत सेलिब्रेट किया न वेलेंटाइन! मैं बस इतना कहता हूं, जो भी कीजिए, जिसके साथ भी कीजिए पर दिल को हमेशा जवां बनाए रखिए। दिल जवान रहेगा तो हर वसंत, हर वेलेंटाइन, हर डेट दिलकश लगेगा।

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