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जानिए प्रीमैरिटल काउंसलिंग क्या है, शादी से पहले क्यों पड़ती है जरूरत

  • शादी के बाद रिश्तों में दरार ना आये इसलिए अब कपल्स पहले प्रीमैरिटल काउंसलिंग का सहारा लेते हैं।
  • हेल्थ से जुड़ी समस्याओं और रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए काउंसलिंग की जरुरत होती है।
  • आज के समय में बढ़ती जेनेटिक और ब्लड रिलेटिड बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
  • रिश्तों में बढ़ता खुलापन भी कई तरह की मेडिकल प्रॉब्लम्स को समय से पूर्व जन्म देती हैं।
  • ऐसे में अगर आप भी शादी करने वाले हैं, तो आइए जानते हैं जानें क्या है प्रीमैरिटल काउंसलिंग और रिश्ते, हेल्थ में क्यों पड़ती है इसकी जरूरत...

जानिए प्रीमैरिटल काउंसलिंग क्या है, शादी से पहले क्यों पड़ती है जरूरत
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प्री-मैरिटल काउंसलिंग के फयदे

आज के दौर में युवाओं की सोच में बेहद खुलापन आ गया है, वो शादी के बाद आने वाली प्रॉब्लम्स को पहले ही सॉल्व करने या पार्टनर्स की बीमारी, रिलेशनशिप से जुड़े शक को मिटाना जरुरी समझते हैं। इसके लिए वो मेडिकल और साइकोलॉजिकल हेल्प लेने से भी गुरेज नहीं करते हैं। अगर आप भी ऐसी ही सोच रखते हैं और प्री मैरिटल काउंसलिंग और उसकी जरुरत को समझना चाहते हैं,चलिए बताते हैं आपको प्रीमैरिटल काउंसलिंग और उसके रिश्ते या लाइफ में महत्व के बारे में...

हाल ही में एक मैट्रिमोनियल साइट के मुताबिक, साल 2018-2019 में मैरिड कपल्स की तुलना में प्रीमैरिटल काउंसलिंग लेने वाले कपल्स की संख्या में 21.6 फीसदी का इजाफा हुआ। जिसमें उनके सवाल रिलेशनशिप की जगह हेल्थ से ज्यादा जुड़े हुए थे। इसके अलावा परिवार के लोगों के साथ रिश्ते को बेहतर बनाने के बारे में सवाल किए गए।

प्रीमैरिटल काउंसलिंग क्या है ? What is Premarital Counseling

शादी के बाद रिश्ते, हेल्थ और लाइफ में आने वाले बदलावों से जुड़े सवालों का समाधान पाने के लिए काउंसलर से शादी करने से पहले सलाह लेना प्रीमैरिटल काउंसलिंग कहलाती है।

प्रीमैरिटल काउंसलिंग क्यों हिया जरूरी ? Importance Of Premarital Counseling

मैरिज काउंसेलर डॉ. संध्या अग्रवाल के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में लोगों का अपनी हेल्थ को लेकर रुख बेहद हैरान करने वाला है, जहां पहले लोग रिश्तों को अहमियत देते थे। वहीं अब रिलेशनशिप से ज्यादा दोनों एक-दूसरे की हेल्थ को महत्व दे रहे हैं।

इसका मुख्य कारण लोगों में जेनेटिक और ब्लड ट्रांसमिटेड डिजीज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कपल्स शादी से पहले पार्टनर का मेडिकल टेस्ट करवाना जरुरी समझते हैं।


जिससे वो किसी जानलेवा या लाइलाज बीमारी से खुद को बचा पाते हैं साथ ही आने वाली नई पीढ़ी (बच्चे) में जेनेटिक और ब्लड ट्रांसमिटेड बीमारियों से बचाना है। इसलिए दोनों ही पार्टनर्स को शादी से 6 महीने पहले मेडिकल टेस्ट जरुर करवाएं।


प्री-मैरिटल काउंसलिंग के फायदे / Premarital Counseling Benefits

  • प्रीमैरिटल काउंसलिंग के फायदे की बात करें, तो आप इससे हेल्थ के साथ काउंसलर से इमोशनल प्रॉब्लम्स भी शेयर कर पाते हैं।
  • प्रीमैरिटल काउंसलिंग के जरिये हर दिक्कत को हैंडल करने की समझ और तरीका डेवलप होता है।
  • कपल्स में इमोशनली, सेक्शुअली और फाइनेंशली अंडरस्टेडिंग बढ़ती है और वो अपने रिश्ते को लेकर पॉजिटिव महसूस करते हैं।
  • आज के दौर में लोग शादी से पहले ही डेटिंग करने लगते हैं। जिसमें एक-दूसरे के व्यवहार, पसंद नापसंद को जानना आसान होता है।
  • किसी की हेल्थ के बारे में जानना बेहद जरूरी होता है। इससे कपल्स की आपस में भी एक-दूसरे के प्रति झिझक खत्म होती है।
  • फिजिशियन डॉक्टर संजय महाजन के मुताबिक, प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप की बात करें, तो इन 4 मेडिकल टेस्ट जरूर करवाने चाहिए।
  • जिनमें HIV,STD से जुड़े टेस्ट, फर्टिलिटी टेस्ट, ब्लड ग्रुप कम्पैटिबिलिटी टेस्ट, जेनेटिक, मेडिकल कंडीशन से जुड़े टेस्ट शामिल हैं।
  • प्रीमैरिटल काउंसलिंग के दौरान कम्युनिकेशन को लेकर पूछताछ की जाती जाती है। यह प्रक्रिया दोनों व्यक्ति विशेष पर आधारित होती है।
  • इस प्रक्रिया में घुमावदार सवाल पूछे जाते हैं ताकि दोनों के रिश्ते को मजबूती मिले और आप दोनों के बीच आपसी समझ बढे।
  • प्रीमैरिटल काउंसलिंग की कम्युनिकेशन प्रक्रिया में आप एक दूसरे की अच्छाइयों के साथ साथ आप दोनों एक दूसरे की बुराइयों को भी जान पाएंगे।

नोट : प्रीमैरिटल काउंसलिंग के दौरान अगर आप खुद को नर्वस महसूस करते / करती हैं तो थोड़ी थोड़ी देर में कुछ ना कुछ एक्टिविटी करते रहें। कोई भी फैसला लेने से पहले घर पर बात करें। एक दूसरे को समझने के लिए ट्रेवल अच्छा आप्शन है। इस तरह आप अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत कर सकते हैं।

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