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मेलिटस के कारण 85 फीदसी युवाओं में डायबिटीज

बच्चों और किशोरों में डायबिटीज की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस उम्र के बच्चों में डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं का स्वरूप अलग होता है।

मेलिटस के कारण 85 फीदसी युवाओं में डायबिटीज
नई दिल्ली. बच्चों और किशोरों में डायबिटीज की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस उम्र के बच्चों में डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं का स्वरूप अलग होता है। इसमें विशेष देखभाल की जरूरत पड़ती है। बच्चों में सबसे आमतौर पर टाइप वन डायबिटीज मेलिटस की समस्या होती है, जो कि युवाओं में होने वाली डायबिटीज के 85 फीसदी मामलों में जिम्मेदार है।
दुनिया भर में पंद्रह साल से कम उम्र के तकरीबन 79,000 बच्चों को टाइप वन डायबिटीज होती है और इनमें 12,000 से अधिक मामले साउथ ईस्ट एशियन रीजन के होते हैं। इनमें भी एक बड़ा हिस्सा भारत में होता है।जानकारी के अनुसार पंद्रह साल से कम उम्र के प्रति एक लाख बच्चों पर 10-15 बच्चों को हर साल टाइप वन डायबिटीज होती है। इनमें से अधिकतर बच्चों का जीवन इंसुलिन पर निर्भर है। उन्हें अपना ब्लड शुगर स्तर नियंत्रण में रखने के लिए बार-बार इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। इस स्थिति से निबटने के लिए, द रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) ने एक बड़ी पहल की उद्घोषणा की है। इसके तहत देश भर में 15 साल से कम उम्र के डायबिटीज पीड़ित बच्चों को नि:शुल्क इंसुलिन वितरित किया जाएगा।
डायबिटीज रिसर्च से जुड़ी एक अग्रणी संस्था आरएसएसडीआई के अध्यक्ष डॉ.एस.वी.मधु ने कहा कि देश में डायबिटीज की समस्या भयंकर रूप ले रही है। देश में डायबिटीज पीड़ित मरीजों की संख्या तरीबन 65 मिलियन है। इन आंकड़ों के साथ डायबिटीज की गंभीरता के मामले में भारत दुनिया के उन टॉप देशों में एक है, जहां डायबिटीज के मामले काफी ज्यादा हैं। यहां तीन-चार साल की उम्र के बच्चों में ब्लड इंसुलिन के स्तर में उतार-चढ़ाव का पता चल रहा है। ऐसे में यह एक गंभीर मुद्दा बन गया है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, नि:शुल्क इंसुलिन -
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