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Breastfeeding Week 2022: ब्रेस्टफीड करवाने वाली माताएं ऐसे रखें अपना ख्याल, बच्चों की सेहत पर पड़ता है सीधा असर

ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding Mothers) करने वाली माताओं को अपने शिशु (Newborn Babies) के साथ-साथ अपनी सेहत का भी बहुत ज्यादा ध्यान रखना होता है।

Breastfeeding Week 2022: ब्रेस्टफीड करवाने वाली माताएं ऐसे रखें अपना ख्याल, बच्चों की सेहत पर पड़ता है सीधा असर
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ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding Week 2022) करने वाली माताओं को अपने शिशु के साथ-साथ अपनी सेहत का भी बहुत ज्यादा ध्यान रखना होता है। वैसे तो स्तनपान एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन अगर आप पहली बार मां बनी है तो आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखना होगा और ऐसी बहुत सी चीजें जिसके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए। डिलीवरी के बाद पहले कुछ हफ्तों में शिशु (Newborn Babies) को दूध पिलाना बहुत मुश्किल होता है। स्‍तनपान (Breastfeeding Mother) करवाने के जितने फायदे होते हैं वैसे ही उसके कुछ नुक्सान भी होते हैं। इंदौर के इंदिरा आईवीएफ की गायनेकोलॉजिस्ट एंड ऑब्सटेट्रिशियन डॉ. योगिता परिहार का कहना है कि ब्रेस्टफीड करवाते समय माताओं को कई समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। जानिए क्या हैं यह समस्याएं?

क्लॉग्ड मिल्क डक्ट्स (clogged milk ducts)

कभी-कभी मिल्क डक्ट्स क्लॉग्ड (दुग्ध वाहिनियों का बंद हो जाना) हो जाती हैं, जिससे दूध वापस ऊपर चढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप लाल और टेंडर लम्प बन जाता है। हालांकि क्लॉग्ड मिल्क डक्ट्स अपने आपमें गंभीर समस्या नहीं है, अगर आप इसकी अनदेखी करेंगी तो यह ब्रेस्ट इंफेक्शन का कारण बन सकता है।

ऐसे करें सुधार

बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराना बंद न करें, दूध के लगातार प्रवाह से मिल्क डक्ट्स खुल जाएंगी। इसके साथ ही हर फीडिंग से पहले वार्म कंप्रेस करें और फीडिंग के दौरान लंप/गांठ पर हल्के हाथों से मसाज करें। ब्रेस्ट फीडिंग के बाद ब्रेस्ट में जो दूध बचा है उसे हाथों से या ब्रेस्ट पंप से बाहर निकाल लें। आप ब्रेस्ट को दिन में कई बार गर्म पानी में सोक कर के भी मिल्क डक्ट्स को खोलने का प्रयास कर सकती हैं।

फ्लैट या इनवर्टेड निप्पल (flat or inverted nipple)

कई महिलाओं के निप्पल बाहर की ओर उभरे हुए होने की बजाय अंदर की ओर धंसे हुए होते हैं। ऐसे में उन्हें बच्चे को फीड कराने में बहुत परेशानी होती है।

ऐसे करें सुधार

फ्लैट या इनवर्टेड निप्पल का अर्थ यह नहीं है कि आप अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड नहीं करा सकती। आप किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। आप ब्रेस्ट पंप का सहारा ले सकती हैं दूध का प्रवाह बनाए रखने के लिए और आप अपने ब्रेस्ट को बाहर की ओर खींचे जितना अधिक से अधिक हो सके, ब्रेस्ट फीडिंग से पहले। आप निप्पल शिल्ड का इस्तेमाल कर सकती हैं। निप्पल शिल्ड सिलिकॉन की पतली शिल्ड होती हैं जो निप्पल के ऊपर फिट हो जाती हैं और निप्पलों को बाहर की ओर निकलने में सहायता करती हैं, जिससे फीडिंग कराना आसान हो जाता है।

ब्रेस्ट फीडिंग के लिए जरूरी टिप्स

ब्रेस्ट फीडिंग मां और बच्चे दोनों के लिए जरूरी है, लेकिन हर मां के लिए यह सामान्य और आसान नहीं होता है। यह टिप्स आपके लिए ब्रेस्ट फीडिंग को आसान बना देंगी और इससे जुड़ी परेशानियों से बचने में सहायता करेंगी।

  • बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्ट फीडिंग शुरू कर दें।
  • 24 घंटे में बेबी को कम से कम 8 बार ब्रेस्ट फीडिंग कराएं।
  • एक बार में कम से कम 10 मिनिट स्तनपान जरूर कराएं।
  • ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें। रोजाना कम से कम 500 अतिरिक्त कैलोरी लें।
  • लेटकर ब्रेस्ट फीडिंग कराने की बजाय बैठकर गोदी में लेकर फीड कराएं।
  • अगर आप लेटकर फीडिंग कराना चाहती हैं तो करवट से लेटें और स्तन को थोड़ा-सा हाथ से उपर उठा लें ताकि बेबी निप्पल को आसानी से अपने मुंह में ले सके।
  • खट्टी चीजों का सेवन करने से बचें, इससे आपके दूध में अम्ल की मात्रा बढ़ेगी।
  • ज्यादा मीठी और अधिक फाइबर वाली चीजों का भी सेवन कम करें, शिशु के पेट में गैस और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती है।
  • चाय और कॉफी लिमिट में लें, इनके जरिए आपके अंदर कैफीन पहुंचता है जो दूध के जरिए बच्चे के अंदर भी जाता है। इससे बच्चे की नींद डिस्टर्ब होती है और वो चिड़चिड़ाने लगता है।
  • बहुत ज्यादा ठंडी तासीर वाली चीजों से भी बचें, इससे बच्चे को सर्दी और जुकाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

शमीम खान

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