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गठिया से हैं परेशान तो रखें इन बातों का ध्यान

ओल्ड एज में अर्थराइटिस होना एक कॉमन डिजीज है। लेकिन जब यह जटिल हो जाए तो गाउट यानी गठिया बन जाता है। यह काफी कष्टकारी हो जाता है।

गठिया से हैं परेशान तो रखें इन बातों का ध्यान

ओल्ड एज में अर्थराइटिस होना एक कॉमन डिजीज है। लेकिन जब यह जटिल हो जाए तो गाउट यानी गठिया बन जाता है। यह काफी कष्टकारी हो जाता है।

इसका इलाज सही तरह से न करने पर शरीर के जोड़ पर बुरा प्रभाव पड़ने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि इसमें लापवाही न बरतें और जीवनशैली के साथ खान-पान में जरूरी बदलाव करें। इस बारे में अपोलो क्लिनिक, नई दिल्ली के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमनदीप सिंह नारंग पूरी जानकारी दे रहे हैं।

गठिया, अर्थराइटिस का एक जटिल रूप है। यह किसी को भी हो सकता है लेकिन सामान्यत: पुरुष इसके शिकार अधिक होते हैं, लेकिन मेनोपॉज के बाद महिलाओं में भी इसके चपेट में आने का खतरा पुरुषों के बराबर ही होता है।

गठिया का पूरी तरह उपचार संभव है। अगर गठिया अधिक गंभीर नहीं है तो उसे खान-पान और जीवनशैली में बदलाव लाकर नियंत्रित किया जा सकता है। गंभीर लक्षणों को दवाइयों और स्टेरॉइड के द्वारा ठीक किया जा सकता है।

क्या है गठिया रोग

गठिया एक प्रकार का अर्थराइटिस है, यह रक्त में यूरिक एसिड (यूरेट) का स्तर बढ़ने से होता है। यूरिक एसिड सामान्यता हानिरहित व्यर्थ उत्पाद होता है, जो प्यूरीन के टूटने पर बनता है।

प्युरीन शरीर में प्रकृतिक रूप से और कुछ निश्चित खाद्य पदार्थों और शराब में पाया जाता है। गठिया को हाइपर यूरिसीमिया भी बोलते हैं। जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक हो लेकिन कोई लक्षण दिखाई न दें तो इसे साइलेंट हाइपर यूरिसीमिया कहते हैं।

कारण

  • गठिया(गाउट) होने के मुख्य कारणों में शामिल हैं
  • अल्कोहल, सी फूड, मांस, फ्रक्टोज स्वीटंट ड्रिंक्स का अधिक मात्रा में सेवन।
  • चिकित्सीय स्थितियां – लिपिड का आसामान्य स्तर, हेमोलाइटिकानेमिया, क्रॉनिक किडनी डिजीज, इंसुलिन रेजिस्सटेंस, मेटाबॉलिक डिजीज।
  • उम्र बढ़ना।
  • मोटापा।
  • टाइप 2 डायबिटीज।
  • उच्च रक्त दाब।
  • अनुवांशिक कारण।
  • हृदय रोगों के लिए ली जाने वाली दवाइयां।
  • एस्प्रिन और डाय यूरेटिक का सेवन भी शरीर में यूरेट का स्तर बढ़ने की आशंका बढ़ा देता है।

प्रमुख लक्षण

  • गठिया के लक्षण अचानक दिखाई देने लगते हैं, विशेष रूप से रात में, इन लक्षणों में सम्मिलित हैं-
  • सबसे पहले पैर के अंगूठे में सूजन, तेज दर्द और लाल हो जाना।
  • पैरों, टखनों, घुटनों, हाथों और कलाइयों में तेज दर्द होना।
  • जोड़ों में सूजन हो जाना, लाल हो जाना।
  • जैसे-जैसे गठिया रोग बढ़ता जाता है जोड़ों की मूवमेंट्स सीमित होती जाती है।
  • चलते समय ही नहीं आराम करते समय भी दर्द होना।

रोकथाम

  • गठिया की रोकथाम करने के लिए यह जरूरी है कि खान-पान की आदतें अच्छी रखी जाएं और उचित दवाइयों का सेवन किया जाए।
  • तरल पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करें; 8-10 गिलास पानी पिएं। जूस, नारियल पानी, छाछ आदि का सेवन भी करें।
  • अल्कोहल का सेवन न करें, अल्कोहल गठिया के लक्षणों को अधिक गंभीर बना देता है।
  • गठिया रोग में वसा रहित डेयरी उत्पादों के सेवन का सुरक्षात्मक प्रभाव होता है।
  • मांसाहारी भोजन; मांस, मछली और चिकन का सेवन कम मात्रा में करें, क्योंकि इनमें प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है।
  • शरीर का वजन औसत बनाए रखें; वजन कम करने से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर कम हो जाता है।
  • संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें, लेकिन डाइटिंग करने से बचें, क्योंकि ऐसा करने से यूरिक एसिड का स्तर अस्थायी रूप से बढ़ जाता है।
  • गठिया के उपचार के लिये दी गई दवाइयां उचित मात्रा में और नियत समय पर लें। जब तक रोग ठीक न हो जाए, दवाइयों का सेवन बंद न करें।

उपचार

गठिया का उपचार सामान्यता दवाइयों से किया जाता है। दवाइयां एक्यूट गॉउट अटैक को ठीक करने और भविष्य में होने वाले अटैक को रोकने तथा गठिया से होने वाली जटिलताओं के खतरे को कम करने के लिए दी जाती हैं।

इसके डायग्नोसिस के बाद हर महीने यूरेट के स्तर की जांच कराना चाहिए ताकि अगर जरूरत हो तो उपचार में बदलाव किया जा सके। अधिकतर मरीजों का इलाज 12-18 महीने में हो जाता है, लेकिन कईं को दर्द से बचने के लिए लगातार उपचार कराने की आवश्यकता होती है। अगर इसका उपचार न किया जाए तो जोड़ क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

घरेलू उपचार

  • एक महीने तक एक बड़ा कटोरा चेरी रोज खाने से इस बीमारी में काफी आराम मिलता है।
  • एक छोटी गड्डी धनिया पत्ती को धोकर, उबालकर और छानकर पीने से आराम मिलता है।
  • 300 मिली. गाजर के जूस में 100 मिली. चुकंदर और 100 मिली. खीरे का रस मिलाकर रोज पिएं।
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