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इन 5 खास तरीकों से लीडरशिप क्वॉलिटी को करें शॉर्प

इंदिरा नूई और किरन मजूमदार शॉ जैसी महिलाओं ने टीम लीडरशिप की मिसाल कायम की है। आपको भी चाहत होगी कि इनकी तरह अपनी कंपनी में लीड करने वाली पोजिशन मिले। ऐसा संभव हो सकता है, अगर आप खुद में लीडिंग एबिलिटीज को डेवलप करें।

इन 5 खास तरीकों से लीडरशिप क्वॉलिटी को करें शॉर्प
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अपने वर्कप्लेस पर टीम को लीड करने की चाह, अपनी यूनिट या डिपार्टमेंट का हेड बनने की तमन्ना हर एंप्लॉई की होती है,लेकिन हर कोई टीम लीडर नहीं बन पाता है। कई लोग बहुत प्रयास करते हैं, इसके बावजूद भी ऑफिस में लीड करने की जिम्मेदारी नहीं हासिल कर पाते हैं, वे ताउम्र सिर्फ फॉलोअर की तरह काम करते रह जाते हैं।

दरअसल,ऐसा इसलिए होता है कि ये लोग खुद में लीडिंग एबिलिटी को डेवलप ही नहीं करते हैं। अगर आप भी अपने वर्कप्लेस में लीड करने वाली पोजिशन में आना चाहती हैं तो कुछ जरूरी क्वालिटीज पर फोकस करना होगा।

लीडर बनने के 5 आसान टिप्स :

1.लीडर की तरह सोचें

टीम लीड वह शख्स कर पाता है, जो एक लीडर की तरह सोचता है, मुश्किल सिचुएशन को भी डील करना जानता है। अमेरिका के जाने-माने ऑथर, मोटिवेशनल स्पीकर जिग जिगलर का कहना है, ‘अगर आप खुद को विनर की तरह नहीं देखते तो आप एक विनर की तरह परफॉर्म भी नहीं कर सकते हैं।’

इसके लिए शुरुआत छोटे स्तर से करें। अपने सीनियर्स से खुद जाकर छोटे प्रोजेक्ट्स को लीड करने की बात कहें। इसके बाद समय पर उसे बतौर लीडर पूरा करके दिखाएं। इससे आप टीम लीड करने की तरफ पहला कदम बढ़ाएंगी और खुद की क्षमता को साबित करेंगी।

2.कुलीग्स को इंस्पायर करें

एक अच्छा लीडर वही कहलाता है, जो दूसरों को इंस्पायर करता है। ऑफिस में भी कुलीग्स उसी व्यक्ति के साथ मिलकर काम करना पसंद करते हैं, जो सभी को साथ लेकर चलता है। ऐसे में लीडर बनने के लिए सबसे पहले अपने कुलीग्स को इंस्पायर करना सीखें।

अगर कोई किसी स्किल में कमजोर है तो उसकी मदद करें, समय-समय पर अपने साथियों को मोटिवेट भी करें। इससे कुलीग्स भी आपमें लीड करने की क्वालिटी देखने लगेंगे।

3.पेशेंस रखें

किसी भी नॉर्मल एंप्लॉई की तुलना में लीडर में ज्यादा पेशेंस यानी धैर्य होना जरूरी है। वह अपनी टीम की असफलता से निराश नहीं होता। असफलता की कमियों को जानकर उन्हें सफलता में बदलने की हर संभव कोशिश करता है। ऐसा सिर्फ धैर्य से ही संभव होता है। टीम लीडर खुद ही धैर्य से काम नहीं लेता, अपनी टीम को भी पेशेंस रखना सीखता है।

4.डिसीजन लेने की क्षमता

लीडर को कदम-कदम पर ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जो उसके फॉलोअर के लिए, टीम के लिए जरूरी होते हैं। कई बार ये फैसले टीम की नजर में सख्त होते हैं, लेकिन लीडर अपने डिसीजन पर टिका रहता है।

अगर जरूरत होती है तो वह रिस्क लेने से भी पीछे नहीं हटता है। यही नजरिया, उसकी निर्णय लेने की क्षमता बाद में सफलता की कहानी लिखती है।

5.क्रेडिट देने की हैबिट

एक सच्चा टीम लीडर वही होता है, जो सफल होने पर अपनी टीम की मेहनत का मान रखता है, उन्हें उसका क्रेडिट देता है। कहने का मतलब है कि जब टीम किसी काम में सफल होती है तो कंपनी सारा क्रेडिट लीडर को देती है, ऐसे में लीडर को चाहिए कि वह अपनी टीम की मेहनत का जिक्र भी करे। इससे टीम को आगे भी अच्छा काम करने का मोटिवेशन मिलेगा। इन बातों का ख्याल रखकर आसानी से खुद में लीडर की क्वालिटीज को डेवलप किया जा सकता है।

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