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Monsoon Tips: डायरिया से लेकर वायरल फीवर तक यहां देखें मौसमी बीमारियों का इलाज, जानें क्या है डॉक्टर्स की राय

इन मौसमी बीमारियों (Seasonal Diseases) से बचने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त बरसात के मौसम में सावधानी बरती जाए और अगर बीमार हो जाएं तो जल्द से जल्द सही ट्रीटमेंट करवाएं।

Monsoon Tips: डायरिया से लेकर वायरल फीवर तक यहां देखें मौसमी बीमारियों का इलाज, जानें क्या है डॉक्टर्स की राय
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बारिश (Rain) का मौसम अपने साथ कई मौसमी बीमारियां (Seasonal Diseases) लाता है, इस मौसम में गर्मी (Summer) से राहत तो मिलती है लेकिन कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस पैदा हो जाते हैं। असावधानी बरतने पर इन बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण से गैस्ट्रो संबंधी डिजीज जैसे डायरिया, फूड इंफेक्शन और वायरल फीवर जैसी बीमारियां हो जाती हैं। ऐसे में इन बीमारियों से बचने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त बरसात के मौसम में सावधानी बरती जाए और अगर बीमार हो जाएं तो जल्द से जल्द सही ट्रीटमेंट करवाएं। दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. त्रिभुवन गुलाटी ने इन मौसमी बीमारियों से बचने के कुछ टिप्स बताएं हैं।

गर्मी से राहत देने वाला मानसून अपने साथ कई बीमारियों को भी लेकर आता है। ऐसे में समय रहते सही इलाज न मिलने पर रोगी की दशा बिगड़ भी सकती हैं। इस सीजन में लोग सबसे ज्यादा डायरिया, फूड इंफेक्शन और वायरल फीवर से ग्रस्त होते हैं। हम यहां आपको बता रहे हैं इन बीमारियों के होने के कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में।

डायरिया

डायरिया (Diarrhoea) तब होता है, जब आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइन में बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण हो जाता है। इसके अलावा दूषित पानी या खाद्य पदार्थ का सेवन करने, किसी दवा से एलर्जी के कारण भी डायरिया की समस्या हो सकती हैं। डायरिया होने पर कई तरह के लक्षण नजर आते हैं। कारणों के आधार पर आपको डायरिया होने पर एक या इससे अधिक लक्षण नजर आ सकते हैं।

डायरिया के प्रमुख लक्षण

जी मिचलाना, पेट में दर्द, थकान लगना, लूज मोशन, सूजन, डिहाइड्रेशन, बुखार होना, मल में खून आना डायरिया के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा छोटे बच्चो में डायरिया होने पर सिर दर्द, पेशाब न होना, थकान, बुखार, चिड़चिड़ापन, सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बच्चों में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। समय रहते इलाज से तबियत जल्द ठीक हो सकती है।

बचाव के उपाय

  • डायरिया होने का मुख्य कारण है रोटावायरस का संक्रमण। रोटावायरस वैक्सीन के जरिए डायरिया से बचा जा सकता है। इसलिए बच्चों को यह वैक्सीन जरूर लगवा लेनी चाहिए।
  • शौचालय से लौटने के बाद हाथों को स्वच्छ करना जरूरी है।
  • बचे हुए भोजन और अन्य खाने-पीने की चीजों को फ्रिज में रखें।
  • कच्चे फलों और सब्जियों को अच्छी तरह पानी से धोएं।
  • स्ट्रीट फूड्स का सेवन करने से बचें।
  • ग्रीन टी का सेवन करना डायरिया के लक्षणों को कम कर सकता है।
  • शरीर में विटामिन ए की कमी के कारण भी डायरिया से अकसर लोग ग्रस्त होते हैं। इसलिए विटामिन ए से भरपूर फूड्स का सेवन करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

ये भी हैं कारगर उपाय

डायरिया की समस्या होने पर पेशेंट के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए डॉक्टर उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स वाला घोल मिलाकर पानी पीने का सलाह देते है। डायरिया की समस्या को दूर करने के लिए ओरल रिहाइड्रेशन लेने की सलाह डॉक्टर दे सकते हैं। यह उपाय डीहाइड्रेशन की समस्या को दूर करता है और आपके शरीर में ग्लूकोज, नमक और अन्य महत्वपूर्ण मिनरल की कमी को पूरा करता है। ओरल रिहाइड्रेशन बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए उपयुक्त है।

फूड इंफेक्शन

बरसात के मौसम में लोग फूड इंफेक्शन (Food Infection) या फूड प्वॉयजनिंग (Food Poisoning) से अकसर ग्रस्त होते रहते हैं। हर साल लाखों लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं और हजारों लोगों की स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है। इसलिए ऐसा होने पर तुरंत इलाज होना जरूरी हैं।

फूड इंफेक्शन के लक्षण

फूड इंफेक्शन के कारण पेट में दर्द, जी मिचलाना, लूज मोशन और उल्टी की समस्या होने लगती है। फूड इंफेक्शन के ऐसे बहुत सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें इसकी शुरुआत सिरदर्द से होती है। इसके अलावा पेट में बहुत अधिक गैस बनने की समस्या भी हो सकती हैं। फूड इंफेक्शन का एक लक्षण कमज़ोरी महसूस होना भी है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को अचानक कमज़ोरी महसूस होने लगी तो उसे इसे नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए और अपने डॉक्टर से चेकअप करवाना चाहिए।

रोग का कारण

  • बैक्टीरिया के संक्रमण से फूड इंफेक्शन हो सकता है।
  • बासी या खुले में रखे भोजन का सेवन करना।
  • किसी को पेट संबंधी कोई दिक्कत जैसे कब्ज, गैस इत्यादि हैं, तो उसे फूड पॉइजनिंग होने की संभावना काफी ज्यादा रहती है।
  • रोग प्रतिरोध क्षमता की कमी वाले व्यक्ति को फूड इंफेक्शन का खतरा अधिक होता हैं।
  • फूड इंफेक्शन का एक कारण जेनेटिक भी होता हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति के परिवार में फूड प्वॉयजनिंग की बीमारी होती रहती है, तो उसे विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बचाव के उपाय

  • बारिश के मौसम में खाना खुले में न रखें।
  • बचा हुए खाद्य पदार्थ का दूसरे दिन सेवन न करें।
  • सब्जियों और फलों को अच्छी तरह से धोकर ही खाएं।
  • फूड इंफेक्शन के लक्षणं दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
  • ओ.आर.एस. मिलाकर पानी का सेवन करें, यह काफी फायदेमंद साबित होता है।

वायरल फीवर का भी होता है रिस्क

मानसून के दौरान लोगों को अकसर वायरल फीवर (Viral Fever) और थ्रोट इंफेक्शन की समस्या भी होने लगती है। वायरल संक्रमण किसी को भी हो सकता है लेकिन बच्चों में यह अधिक देखा जाता है। संक्रमण होने पर बुखार, थकावट, खांसी, जुकाम, उल्टी, दस्त जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। तापमान अधिक होने के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। इसके अलावा जोड़ों में दर्द, सर्दी लगना, गले में दर्द और सिरदर्द जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

रोग का कारण

  • दूषित जल और भोजन का सेवन करना।
  • प्रदूषण के कारण दूषित वायू में मौजूद जर्म्स का शरीर के भीतर जाना।
  • रोग प्रतिरोघकता की कमी।
  • वायरल बुखार ग्रस्त मरीज के संपर्क में आना।

बचाव के उपाय

  • खाने में उबली हुई और हरी सब्जियां खानी चाहिए।
  • दूषित पानी और भोजन से बचें।
  • पानी को पहले उबाल कर थोड़ा गुनगुना करने के बाद पिएं।
  • वायरल बुखार से ग्रस्त रोगी के संपर्क में आने से बचें।
  • इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए हेल्दी डाइट-लाइफस्टाइल अप
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