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अगर आप भी पहली बार बनी हैं 'माँ' तो जान लें नवजात शिशु की देखभाल के तरीके

New born Care Tips : सभी छोटे बच्चे दिखने में बेहद क्यूट और प्यारे लगते हैं। लेकिन उनकी केयर करना बेहद ही मुश्किल काम होता है। बदलते मौसम और बीमारियों का बच्चों की नाजुक त्वचा और कमजोर इम्यून सिस्टम पर बेहद बुरा असर पड़ता है। जिससे वो पीलिया, वायरल बुखार, त्वचा पर एलर्जी और रेशेज जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर मां कुछ सावधानियों के साथ देखभाल के इन नियमों का पालन करे, तो बच्चा हर मौसम में फिट एंड हेल्दी रहेगा। इसलिए आज हम आपको नवजात शिशु की देखभाल के तरीके (New born Care Tips) बता रहे हैं।

अगर आप भी पहली बार बनी हैं

New Born Care Tips : सभी छोटे बच्चे दिखने में बेहद क्यूट और प्यारे लगते हैं। लेकिन उनकी केयर करना बेहद ही मुश्किल काम होता है। बदलते मौसम और बीमारियों का बच्चों की नाजुक त्वचा और कमजोर इम्यून सिस्टम पर बेहद बुरा असर पड़ता है। जिससे वो पीलिया, वायरल बुखार, त्वचा पर एलर्जी और रेशेज जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर मां कुछ सावधानियों के साथ देखभाल के इन नियमों का पालन करे, तो बच्चा हर मौसम में फिट एंड हेल्दी रहेगा। इसलिए आज हम आपको नवजात शिशु की देखभाल के तरीके (New born Care Tips) बता रहे हैं।

नवजात शिशु की देखभाल के तरीके :




1.आज के दौर में कुछ महिलाएं स्तनपान करवाने से हिचकिचाती हैं या इसे आउटडेटिड समझती हैं। मां का शिशु को स्तनपान करवाना हिन्दू शास्त्रों में ही नहीं, बल्कि अब वैज्ञानिक रूप से भी एक अमृत माना गया है। शोध के मुताबिक मां के दूध में शिशु के लिए जरूरी सभी पौषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके साथ ही शिशु को कई सारी बीमारियों से बचने में कारगर होता है। इसलिए हर महिला को लगभग 6 महीने तक अपने शिशु को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए।

2.बच्चे की मालिश करना भी बेहद जरूरी होता है। नियमित रुप से शिशु की सरसों के तेल से मालिश करने से हड्डियों और मांसपेशियां मजबूत बनती है। लेकिन बच्चों की मालिश हमेशा हल्के हाथों से करनी चाहिए। कभी भी सख्त या दबाव बनाकर मालिश न करें। क्योंकि बच्चों के अंग बेहद नाजुक होते हैं। ऐसे में सख्त मालिश करने से उनके चोट पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।




3.छोटे बच्चों को इंफेक्शन होने का बहुत ज्यादा खतरा होता है। ऐसे में हमेशा साफ-सफाई और हाईजीन का ख्याल रखना बेहद जरुरी होता है। बच्चों को सप्ताह में 2-3 बार नहलाएं और नहलातें समय विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि पानी या साबुन के बच्चों की नाक, आंख या कान में जाने से उन्हें नुकसान हो सकता है।

4.बच्चों का नियमित रूप से टीकाकरण करवाना। जी हां, बच्चों को हमेशा स्वस्थ रखने के लिए वैक्सीनेशन करवाना बेहद जरूरी है। टीकाकरण करवाने से बच्चे हैपेटाइटिस, पोलियो, टाइफाइड, खसरा आदि गंभीर बीमारियों से आसानी से बचाया जा सकता है।

5. आमतौर पर बच्चा जब भी रोता है, तो लोग उसे चुप करवाने के लिए दौड़ पड़ते हैं। वैसे तो अपनी हर जरूरत के बच्चा लिए रोता है, लेकिन कई बार वो बिना किसी वजह के भी रोता है। ऐसे में उसे कुछ देर रोने देना चाहिए। क्योंकि कभी-कभी थोड़ी देर रोने से बच्चे का मानसिक विकास में तेजी आती है। वो मेंटली स्ट्रांग बनता है। लेकिन अगर लंबे समय तक बच्चा लगातार रो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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