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Omicron : जानें कैसे अटैक करता है ओमीक्रॉन

बीते दो-तीन सप्ताह से दुनिया भर में कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन की वजह से लोग घबराए हुए हैं। अपने देश में भी इसके संक्रमण के कुछ मामले सामने आ चुके हैं। इस बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना घबराए, हमें इसके संक्रमण से बचने के लिए सभी जरूरी तरीकों पर गौर करना चाहिए। हम आपको बता रहे हैं ओमीक्रोन संक्रमण के प्रमुख लक्षणों, उपचार और बचाव के तरीकों के बारे में।

Omicron : जानें कैसे अटैक करता है ओमीक्रॉन
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Omicron : जानें कैसे अटैक करता है ओमीक्रॉन

कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रोन (Omicron) इन दिनों चिंता का विषय बना हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कोरोना का अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट है। इसने दुनिया भर में भय का माहौल बना दिया है। यहां दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विनी कांतरू की ओर से इस वेरिएंट के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया जा रहा है, जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैं।

डेल्टा वेरिएंट के मुताबले ज्यादा खतरनाक

डब्ल्यूएचओ ने दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए ओमीक्रोन वैरिएंट बी.1.1.529 को 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' कैटेगरी में रखा है। इसमें मौजूद आरनोट फैक्टर और मेंब्रेन प्रोटीन (एनएसपी-6) की कमी के कारण ओमीक्रोन की संक्रमण दर डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले 3-4 गुना ज्यादा है। पिछले आंकड़ों को देखें तो डेल्टा वैरिएंट जितनी तेजी से 100 दिन में फैला था। वहीं, ओमीक्रोन वैरिएंट केवल 15 दिन में फैल गया। चिंता जताई जा रही है कि हाल ही में सामने आया ओमीक्रोन वैरिएंट कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

ऐसे करता है अटैक

वैज्ञानिकों के अनुसार साउथ अफ्रीका में मिले ओमीक्रोन वैरिएंट की स्पाइक प्रोटीन में 30 से ज्यादा म्यूटेशन हो चुके हैं। जिसकी वजह से मानव सेल के टिशू से स्पाइक प्रोटीन जुड़कर आसानी से शरीर में पहुंच सकती है। कोरोना वायरस शरीर में मौजूद एसीई-2 रिसेप्टर्स के माध्यम से विभिन्न अंगों की कोशिकाओं पर अटैक कर इम्यूनिटी को बाइपास करता है, जिससे शरीर की कार्यप्रणाली बाधित हो जाती है और सुरक्षा-तंत्र गड़बड़ा जाता है। ये शरीर में बहुत जल्दी मल्टीप्लाई होकर विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। ज्यादा संक्रामक होने पर इम्यूनिटी को कमजोर करके अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

रिस्क फैक्टर्स

ओमीक्रोन संक्रमण भले ही गंभीर ना हो, तो भी कुछ परेशानियां जरूर होती हैं। इससे लॉन्ग कोविड भी हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह वैरिएंट रि-इंफेक्शन या ब्रेक-थ्रू इंफेक्शन भी कर रहा है। वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों और पहले संक्रमित लोगों में रि-इंफेक्शन रेट डेल्टा वैरिएंट की तुलना में 2.5 गुना ज्यादा है। कमजोर इम्यूनिटी वाले गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों, बजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को ओमीक्रोन वैरिएंट से बचाव के लिए पूरी सावधानी बरतनी होगी। यह भी अभी तय नहीं है कि वैक्सीन की दो डोज लेने के बावजूद इस वैरिएंट के खिलाफ हमारी इम्यूनिटी कितनी सक्षम है।

संक्रमण के लक्षण (Omicron Virus Symptoms)

ओमिक्रोन के अभी तक आए ज्यादातर मामलों के आधार पर हुई स्टडी के हिसाब से इससे माइल्ड इंफेक्शन हो रहा है। इसमें भी ज्यादातर लक्षण पहले के वैरिएंट्स के समान ही हैं। इसमें शुरुआत में हल्का बुखार, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, बहुत ज्यादा थकान होना शामिल हैं। 10-11वें दिन में रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स दिख सकती हैं जैसे-रनिंग नोज, ड्राई कफ, गले में खराश आदि। लेकिन डेल्टा वैरिएंट की तरह इसमें संक्रमित व्यक्ति का स्वाद और गंध का सेंस नहीं जाता है।

डायग्नोसिस

डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रोन का नेचर अलग है। इसके डायग्नोसिस के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट के साथ जीनोम सीक्वेंसिंग करवानी जरूरी है। जीनोम सीक्वेंसिंग से वैरिएंट के फैलने का भी अनुमान लगाया जा सकता है। आरटीपीसीआर टेस्ट से यह नहीं पता चलता कि व्यक्ति कोरोना के किस वैरिएंट से संक्रमित है। हमारे देश में अभी जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्टिंग की प्रक्रिया धीमी और महंगी है, इसकी वजह से ओमिक्रोन के मामले बहुत कम सामने आ रहे हैं।

ट्रीटमेंट मैथड

जहां तक ओमिक्रोन संक्रमण के उपचार का प्रश्न है, माइल्ड इंफेक्शन होने पर हो सकता है कि व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती ना होना पड़े या रेस्पिरेटरी सपोर्ट की जरूरत ना पड़े। लेकिन हाई रिस्क मरीजों को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दी जा सकती है, जो उनकी बॉडी के मैकेनिज्म को मजबूत बनाती है। वहीं, वायरस के स्पाइक प्रोटीन को नष्ट करने और शरीर के सेल्स से जुड़ने से रोकती है।

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