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लीवर रोगों में कारगर है ये योगासन, रखें इन बातों का ध्यान

लीवर संबंधी रोगों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ही हर वर्ष 19 अप्रैल को वर्ल्ड लीवर डे मनाया जाता है। अपने लीवर को स्वस्थ और रोगमुक्त बनाने के लिए खान-पान सुधारने के साथ ही कुछ योगासनों का अभ्यास भी बहुत लाभदायक है।

लीवर रोगों में कारगर है ये योगासन, रखें इन बातों का ध्यान

लीवर संबंधी रोगों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ही हर वर्ष 19 अप्रैल को वर्ल्ड लीवर डे मनाया जाता है। अपने लीवर को स्वस्थ और रोगमुक्त बनाने के लिए खान-पान सुधारने के साथ ही कुछ योगासनों का अभ्यास भी बहुत लाभदायक है। आजकल खान-पान संबंधी लापरवाही के चलते बहुत से लोग लीवर रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं। ऐसा न हो इसके लिए अपनी खान-पान की शैली सुधारने के साथ ही कुछ योगासनों का अभ्यास भी कारगर हो सकता है। यहां योगाचार्य अनुपमा बता रहे हैं कुछ प्रमुख योगासनों के बारे में...

गोमुखासन

विधिः पहले सुखासन में बैठकर दाएं पैर को इस प्रकार मोड़ें कि एड़ी गुदा के नीचे आ जाए। फिर बाएं पैर को मोड़कर इस प्रकार रखें कि बायां घुटना दाएं घुटने पर आ जाए तथा बाईं एड़ी दाएं नितंब के पास आ जाए। बाएं हाथ को ऊपर से तथा दाएं हाथ को नीचे से कमर पर लाएं और दोनों हाथों की मुड़ी हुई अंगुलियों को इंटरलॉक कर लें। सांस सामान्य और गर्दन सीधी। ऊपर वाली भुजा का कंधे से कोहनी तक का भाग ऊपर कान से सटा रहे। कुछ देर इस अवस्था में रुकें और फिर इसे ही दूसरे पैर से दुहराएं। इस दौरान ध्यान मूलाधार चक्र पर रहे।

लाभः इस आसन कों करने से रोग प्रतिरोधक सफेद रक्त कणिकाएं तेजी से बनती हैं। लिवर और किडनी दोनों को यह आसन स्वस्थ रखता है।

कितनी बारः सुबह-शाम एक-एक बार।

सावधानीः नितंब, घुटने, कंधे, पीठ या गर्दन दर्द होने पर इसे न करें।

धनुरासन

विधिः धनुरासन करने के लिए पहले पेट के बल लेटें और हाथ पीछे करते हुए पैरों को पकड़ें। सांस भरते हुए सीने और पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों को सीधा रखते हुए कूल्हों को ऊपर उठाकर, पैरों को पीछे की ओर खींचें। सिर और जांघों को जमीन से यथाशक्ति ऊपर उठाएं। लंबी सांसों के संग लगभग 20 सेकेंड तक करें। सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

लाभः यह आसन लीवर और किडनी की कार्यप्रणाली को सुचारु रखता है। इससे एंजाइम का स्राव सही रहता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है।

कितनी बार: धनुरासन का अभ्यास तीन से पांच बार कर सकते हैं।

सावधानीः सिरदर्द या माइग्रेन, ब्लडप्रेशर की समस्या से ग्रस्त रोगी और गर्भवती महिलाएं यह आसन न करें।

अर्द्धमत्स्येंद्रासन

विधि: दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठें। अब बाएं पैर को मोड़कर बाईं एड़ी को दाहिने हिप के नीचे आराम से रखें। फिर दाएं पैर को मोड़ते हुए दाएं पैर का तलवा घुटने की बाईं ओर जमीन पर रख लें। अब बाएं हाथ को दाएं घुटने की दाईं ओर ले जाएं और कमर को घुमाते हुए दाएं पैर के तलवे को पकड़ लें। इसके बाद दाएं हाथ को अपनी कमर पर रखें। सिर से कमर तक का हिस्सा दाईं ओर मोड़ें। अपनी क्षमता के अनुसार इसी स्थिति में बैठे रहें। फिर इसे दूसरी ओर से दुहराएं।

लाभः इसे नियमित करने से लिवर, पेट और किडनी की समस्याएं दूर होती हैं। पेट के रोग और कब्ज को भी ठीक करता है।

अग्नाशय, यकृत और पाचन संस्थान पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

कितनी बारः तीन से पांच बार इसका अभ्यास करें।

सावधानीः जिन लोगों का पेट का ऑपरेशन हुआ हो, गर्भवती महिलाओं और स्लिप डिस्क के रोगियों के लिए यह आसन वर्जित है।

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