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WHO: भारत में एक तिहाई डॉक्टर सेकेंडरी स्कूल पास

भारत में कई ऐसे डॉक्टर्स हैं जिनके पास मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं:रिपोर्ट

WHO: भारत में एक तिहाई डॉक्टर सेकेंडरी स्कूल पास
नई दिल्ली. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारतीय डॉक्टरों को लेकर एक रिपोर्ट से बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 57 फीसदी एलोपैथिक डॉक्टरों के पास मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं है। तो वही रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि एक तिहाई डॉक्टर ऐसे हैं जो केवल सेकेंडरी स्कूल तक ही शिक्षित हैं और दूसरों का इलाज कर रहे हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, यूएन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) रिपोर्ट की हैल्थ वर्कफोर्स इन इंडिया से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट वर्ष 2001 के तथ्यों पर आधारित है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 18.8 फीसदी स्वास्थ्य कर्मी ही मेडिकल योग्यता रखते हैं। औसतन एक लाख की आबादी में 80 डॉक्टर हैं जिनमें 36 डॉक्टर ऐसे हैं जिनके पास एलोपैथिक,होम्योपेथिक,आयुर्वेदिक और यूनानी से संबंधित कोई भी मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं है।
बता दें कि इस रिपोर्ट में एक रोचक तथ्य सामने आया है कि महिला हेस्थकेयर वर्कर्स अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में ज्यादा योग्य और शिक्षित पाई गई हैं। उदाहरण के लिए जिन ऐलोपैथिक डॉक्टरों पर स्टडी की गई उनमें से 67 फीसदी महिला हॉक्टरों के पास चिकित्सा योग्यता पाई गई जबकि 38 फीसदी पुरुष ही योग्य पाए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक 2001 में हुई देश की जनगणना से प्रत्येक जिले का डेटा लिया गया। इससे देश के प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत लोगों की व्यापक तस्वीर सामने आई। स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक और यूनानी सभी डॉक्टरों की संख्या का अनुपात 80 डॉक्टर प्रति एक लाख आबादी था जो चीन में 130 है। इनमें से भी अगर उन डॉक्टरों को छोड़ दिया जिनके पास मेडिकल क्वॉलिफिकेशन नहीं था तो यह अनुपात 36 डॉक्टर प्रति एक लाख आबादी हो जाएगा।
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