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सावधान! एड्स की तरह फैलने वाली ये बीमारी है ज्यादा खतरनाक

ज्यादातर लोगों को ये मालूम नहीं है कि असुरक्षित यौन संबंध बनाने से एचआईवी एड्स की बीमारी होती है। कई लोगों के साथ यौन संबंध बनाने के कारण एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश करता है, जिसकी वजह से एड्स होता है। अभी डॉक्टर्स एड्स की दवाइयों के लिए कई तरह की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।

सावधान! एड्स की तरह फैलने वाली ये बीमारी है ज्यादा खतरनाक
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ज्यादातर लोगों को ये मालूम नहीं है कि असुरक्षित यौन संबंध बनाने से एचआईवी एड्स की बीमारी होती है। कई लोगों के साथ यौन संबंध बनाने के कारण एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश करता है, जिसकी वजह से एड्स होता है। अभी डॉक्टर्स एड्स की दवाइयों के लिए कई तरह की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।

वहीं अब यह बात सामने आई है कि असुरक्षित यौन संबंध बनाने से एड्स के अलावा और भी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं।

माइकोप्लाज्मा जेनिटेलियम (MG, एमजी) एड्स की तरह ही होने वाली एक बीमारी है, जो असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण होती है।

ये लाइलाज बीमारी इन दिनों डॉक्टर्स समेत सभी लोगों की चिंता का कारण बन गई है।

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एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों का ये मानना है कि इन दिनों इस बीमारी के काफी मामले सामने आए हैं। यह तेजी से फैल रहा है।

क्या है ये बीमारी

दरअसल माइकोप्लाज्मा जेनिटेलियम एक प्रकार जीवाणु है, जिसके कारण महिलाओं और पुरुषों के प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या हो सकती है। ऐसा होने के कारण दर्द, रक्तस्राव और बुखार जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

इस बीमारी के होने की वजह भी असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाना बताया गया है। कॉन्डम का यूज करके इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। साथ ही शुरुआत में इस बीमारी का पता लगने पर दवाइयों और ऐंटिबायॉटिक्स से इसका इलाज मुमकिन हो सकता है।

नहीं दिखते लक्षण

ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ सेक्शुअल हेल्थ ऐंड एचआईवी की तरफ से कुछ गाइडलाइंस जारी की गई हैं। इन्होंने इस बीमारी को गंभीरता से लेते हुए बताया कि इस बीमारी के शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखते हैं।

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लेकिन इस बीमारी के होने के कारण महिला और पुरुष दोनों के प्राइवेट पार्ट्स में संक्रमण हो जाते हैं। इस बीमारी से महिलाओं के बांझ होने के चांसेस भी काफी बढ़ जाते हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो इसके लक्षण आसानी से नहीं दिखते यही वजह है कि इसका इलाज भी सही तरीके से नहीं हो पाता। साथ ही सही तरीके से इलाज न होने के कारण इस बीमारी के दौरान व्यक्ति पर ऐंटिबायॉटिक्स का भी असर नहीं होता है।

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