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यूरिन इंफेक्शन की दिक्कत से हैं परेशान, तो जानिए शतावरी के फायदे और इसके सेवन का सही तरीका

हमारे आसपास उगने वाले छोटे-बड़े बहुत से पेड़-पौधे हमारे शरीर और सेहत को बीमारियों से बचाने में बेहद कारगर होते हैं, लेकिन अधिकांश लोग जानकारी न होने की वजह से उनका फायदा नहीं ले पाते हैं। बीमारियों को ठीक करने वाले पेड़-पौधों को आयुर्वेद की भाषा में जड़ी-बूटी कहा जाता है। आमतौर पर घरों में हल्दी, तुलसी, लौंग, काली मिर्च अदरक एक जैसी जड़ी-बूटी इस्तेमाल की जाती है। ऐसे ही आज हम आपको एक और जड़ी-बूटी यानि शतावरी के फायदे (Shatavari Benefits)के बारे में बता रहे हैं।

यूरिन इंफेक्शन की दिक्कत से हैं परेशान, तो  जानिए शतावरी के फायदे और इसके सेवन का सही तरीका
हमारे आसपास उगने वाले छोटे-बड़े बहुत से पेड़-पौधे हमारे शरीर और सेहत को बीमारियों से बचाने में बेहद कारगर होते हैं, लेकिन अधिकांश लोग जानकारी न होने की वजह से उनका फायदा नहीं ले पाते हैं। बीमारियों को ठीक करने वाले पेड़-पौधों को आयुर्वेद की भाषा में जड़ी-बूटी कहा जाता है। आमतौर पर घरों में हल्दी, तुलसी, लौंग, काली मिर्च अदरक एक जैसी जड़ी-बूटी इस्तेमाल की जाती है। ऐसे ही अपनी लाइलाज बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकें।

शतावरी के फायदें (Shatavari Benefits) :

शतावरी की जड़ें उंगलियों की तरह दिखाई देती है, जिनकी संख्या लगभग सौ या सौ से अधिक होती है और इसी वजह से इसे शतावरी कहा जाता है। यह एक बेल है जिसका वानस्पतिक नाम एस्पेरेगस रेसीमोसस है। इसकी जड़ों मे सेपोनिन्स और डायोसजेनिन जैसे महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते है। इसके पत्तों का सत्व कैंसर में उपयोगी है।

1. पत्तों का रस (लगभग 2 चम्मच) दूध में मिलाकर दिन में दो बार लिया जाए तो यह शक्तिवर्धक होता है।

2. यदि पेशाब के साथ खून आने की शिकायत हो तो, शतावरी की जड़ों का एक चम्मच चूर्ण, एक कप दूध में डालकर उबाला जाए और शक्कर मिलाकर दिन
में तीन बार सेवन किया जाए तो तुरंत आराम मिलना शुरू हो जाता है। यह फार्मूला रक्तपित्त जैसी समस्याओं के लिए भी सार्थक है।
3. प्रसूता माता को यदि दूध नहीं आ रहा हो या कम आता हो तो शतावरी की जड़ों के चूर्ण का सेवन दिन में कम से कम 4 बार अवश्य करना चाहिए।
4. डांग (गुजरात) के आदिवासियों का मानना है कि शतावरी की जड़ों के चूर्ण का सेवन बगैर शक्करयुक्त दूध के साथ लगातार किया जाए तो मधुमेह के रोगीयों को काफी फायदा होता है। टीबी होने की दशा में मूल का एक चम्मच चूर्ण दूध के साथ प्रतिदिन दो बार लेने से फायदा मिलता है।
5. शतावरी पौटेशियम का एक अच्छा स्त्रोत माना जाता है जिससे शरीर का ब्लड प्रैशर को सामान्य बना रहता है और हाई ब्लड प्रेशर से होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
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