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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया एक विशेष इनहेलर

डॉक्टरों ने इस संक्रमण के खतरे को शरीर में कई गुना तक कम करने के लिए एक विशेष प्रकार का इनहेलर तैयार किया है। यह इन्हेलर दमा के मरीजों के लिए और भी मजबूत सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा। आइए अब इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया एक विशेष इनहेलर
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Coronavirus: कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में अभी भी महामारी के रूप में अपना विकराल रूप धारण किए हुए है। इसके संक्रमण को रोकने के लिए पूरी दुनिया के डॉक्टर और वैज्ञानिक लगातार इस कोशिश में जुटे हुए हैं कि जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन को बनाया जा सके। संक्रमण और इसके खतरे से बचे रहने के लिए अब एक और राहत भरी खबर सामने आई है।

डॉक्टरों ने इस संक्रमण के खतरे को शरीर में कई गुना तक कम करने के लिए एक विशेष प्रकार का इनहेलर तैयार किया है। यह इन्हेलर दमा के मरीजों के लिए और भी मजबूत सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा। आइए अब इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने किया है तैयार

इस इन्हेलर को तैयार करने के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिकों के एक विशेष टीम कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में जानने के बाद इस पर काम कर रही थी। लंबे समय तक कोशिश करने के बाद साउंथैम्पटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इन्हेलर को तैयार कर लिया है। इसका इस्तेमाल करके भी देखा गया है जिसके बाद इसे प्रभावी रूप से कोरोना वायरस के संक्रमण से होने वाले गंभीर जोखिम को कम करने में काफी मदद मिल सकती है।

​कैसे काम करेगा इनहेलर

आपने दमा के मरीजों को एक विशेष प्रकार का इनहेलर का इस्तेमाल करते हुए देखा होगा। हमारे शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा को पहुंचाने के लिए यह एक प्रकार का यंत्र होता है। ठीक उसी तरह कोरोना वायरस के संक्रमण को शरीर में अधिक नुकसान पहुंच आने से रोकने के लिए इस इनहेलर के सहारे एक खास दवा का प्रयोग किया जाएगा। इससे संक्रमण के खतरे को रोकने में मदद मिलेगी।

​फेफड़ों की करेगा सुरक्षा

कोरोना वायरस का संक्रमण रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ा हुआ है। संक्रमण होने के बाद हमारे श्वसन तंत्र में म्यूकस इकट्ठा होने लगता है जिसके कारण धीरे-धीरे हमें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसमें एक खास तरह की दवा का इस्तेमाल किया गया है। इसे इन्हेल करने के बाद यह फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित नहीं होने देगा और फेफड़ों पर पड़ने वाले कोरोना वायरस संक्रमण कि नकारात्मक असर को भी काफी हद तक कम कर देगा।

​इस प्रोटीन का किया गया है इस्तेमाल

इनहेलर को तैयार करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इसको तैयार करने के लिए एक विशेष प्रकार की प्रोटीन का इस्तेमाल किया गया है। इसे इंटरफेरान बीटा प्रोटीन कहा जाता है। वायरस शरीर में पहुंचने के बाद विकराल रूप धारण करता है जिसे रोकने के लिए यह प्रोटीन सक्रिय रूप से कार्य करेगा। इसमें इस्तेमाल होने वाली ड्रग को विशेष कोड दिया गया है जिससे SNG001 के नाम से भी जाना जाता है।

ट्रायल के अंतिम चरण पर है यह इनहेलर

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बारे में जानकारी दी गई है कि फिलहाल इस इनहेलर का ट्रायल किया जा रहा है जो अंतिम चरण में है। यह पूरी तरीके से सफलतापूर्वक खत्म होता है तो उसके बाद इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन करके लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों की मानें तो कुछ मरीजों पर इसका इस्तेमाल करने से उनके लक्षणों में भारी कमी देखी जा चुकी है।

120 मरीज ट्रायल के लिए तैयार

कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों पर इसका इस्तेमाल करने के लिए फिलहाल अनुमति मिल चुकी है। इसके लिए 120 मरीजों का चयन किया गया है जिन्हें इस इनहेलर का उपयोग कराया जाएगा और उनके शरीर में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति के कम होने का आंकड़ा इकट्ठा किया जाएगा। कहा जा रहा है कि इसका परिणाम जुलाई महीने तक पूरी तरह से सामने आ सकता है। वैज्ञानिकों ने इस बात की पूरी उम्मीद जताई है कि यह सकारात्मक परिणाम दिखाएगा।

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