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Happy Doctors Day 2019 : नेशनल डॉक्टर्स डे पर जानें डॉक्टर्स के खट्टे मीठे अनुभव और विचार

Happy Doctors Day 2019 : नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor Day) सबसे पहले भारत में 1 जुलाई 1991 (1St July 1991 In India) को मनाया गया था। नेशनल डॉक्टर्स डे का दिन भारत के सबसे प्रसिद्ध डॉक्टर डॉ. बिधान चंद्र रॉय (Dr.Bidhan Chandr Roy) की याद में मनाया जाता है और इस दिन उनका जन्मदिन भी है। डॉ. बिधान चंद्र रॉय ने भारत के चिकित्सा के क्षेत्र में अहम योगदान दिए हैं और इस ही वजह से 1 जुलाई 2019 के दिन डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। ऐसे में नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor Day) पर हम कुछ डॉक्टर्स के अनुभव और उनके विचारों को जानेगें...

Happy Doctors Day 2019 : नेशनल डॉक्टर्स डे पर जानें डॉक्टर्स के खट्टे मीठे अनुभव और विचारHappy Doctors Day 2019 Doctor Patient Relationship and Experience In Hindi

Happy Doctors Day 2019 : नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor Day) सबसे पहले भारत में 1 जुलाई 1991 (1St July 1991 In India) को मनाया गया था। नेशनल डॉक्टर्स डे का दिन भारत के सबसे प्रसिद्ध डॉक्टर डॉ. बिधान चंद्र रॉय (Dr.Bidhan Chandr Roy) की याद में मनाया जाता है और इस दिन उनका जन्मदिन भी है। डॉ. बिधान चंद्र रॉय ने भारत के चिकित्सा के क्षेत्र में अहम योगदान दिए हैं और इस ही वजह से 1 जुलाई 2019 के दिन डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। ऐसे में नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor Day) पर हम कुछ डॉक्टर्स के अनुभव और उनके विचारों को जानेगें...

Happy Doctors Day 2019 : डॉक्टर की पर्सनल लाइफ नहीं होती

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के सीनियर रेजिडेंट डॉ. स्वप्निल वाधवा जनरल सर्जरी में एमएस हैं। अपने अब तक के अनुभव के बारे में वह बताते हैं, 'कार्य के दौरान कई बार ऐसी स्थितियां बनीं, जिसमें मरीज के साथ आए परिजनों ने अभद्रता की। इसके बावजूद एक डॉक्टर होने के नाते हम हर स्थिति और मोर्चे पर डट कर काम करते आ रहे हैं। व्यक्तिगत जीवन में एक डॉक्टर पिता के पुत्र होने के कारण बचपन से ही मुझे एक चिकित्सक की व्यस्तताओं का अनुभव रहा है।

घर में स्थिति यह रहती थी कि जन्मदिन पर भी व्यस्त डॉक्टर पिता बहुत कम समय ही हमारे साथ होते थे। पूरा बचपन ऐसे ही बीत गया और आज जब मैं खुद डॉक्टर बना तो मानता हूं कि एक डॉक्टर की अपनी पर्सनल लाइफ होती ही नहीं है। हॉस्पिटल से कोई सर्जरी करके घर जाने पर भी दिमाग में मरीज की चिंता सताती रहती है।

मेरे विवाह को डेढ़ वर्ष बीत चुके हैं, मेरी पत्नी डॉ. तानिया जैन भी चिकित्सक हैं पर दोनों अब तक साथ घूमने जाने का समय भी नहीं निकाल पाए हैं। मैं यही कहूंगा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि डॉक्टर्स के पास कोई जादू की छड़ी नहीं होती लेकिन फिर भी हर डॉक्टर पूरी ईमानदारी से पेशेंट की जान बचाने की कोशिश करता है।'

डॉ. स्वप्निल वाधवा, उज्जैन

Happy Doctors Day 2019 : स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता का अभाव है

मुंबई के पाटिल और हिंदुजा हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे चुकीं डॉ. सुरभि शर्मा आब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी में एमएस हैं। वर्तमान समय में गुरुग्राम (हरियाणा) में कार्यरत डॉ. सुरभि वर्ष 2015 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताती हैं, 'एक बार एक गर्भवती महिला नियमित जांच के लिए ओपीडी में आई, जांच में पाया गया कि बिना किसी लक्षण के उसका रक्तचाप बहुत ज्यादा है। इसलिए तत्काल हॉस्पिटल में भर्ती होने की सलाह दी लेकिन वह भर्ती नहीं हुई।

अगले ही दिन उस महिला को परिजन उसे बेहोशी की हालत में लाए। ट्रीटमेंट शुरू किया गया पर महिला के गर्भ में बच्चा पहले ही मर चुका था। इस घटना के बाद महिला के परिजनों ने उत्तेजित होकर हॉस्पिटल में उत्पात मचा दिया। वरिष्ठों ने बड़ी मुश्किल से घटना पर नियंत्रण किया। मेरा मानना है कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता का अभाव है,

यही अभाव उन्हें मौत के दरवाजे तक लेकर जाता है, जिसके लिए वे डॉक्टरों को जिम्मेदार मान लेते हैं। लोगों को इस बात को समझना होगा कि अपने मरीजों के इलाज के दौरान वह अपना खाना-पीना, घर परिवार सब भूल जाता है, सिर्फ आम लोगों के अच्छे स्वास्थ्य और उपचार के लिए।

1800 रोगियों पर एक चिकित्सक की उपलब्धता चिंता का विषय है, इसलिए डॉक्टर की कमी को पूरा करने के साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत भी करना होगा। इसके साथ ही आईसीयू से लाइव रिपोर्टिंग करने वाले टीवी चैनल यदि चिकित्सा जागरुकता की दिशा में काम करें तो यह श्रेयस्कर होगा, इससे मरीज डॉक्टर के रिश्ते बेहतर होंगे।'

डॉ. सुरभि शर्मा, गुरुग्राम


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