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भूलकर भी अनियमित पीरियड्स और पेट दर्द की ऐंठन न करें नजरअंदाज, हो सकती हैं चॉकलेट सिस्ट की शिकार

चॉकलेट सिस्ट की समस्या रिप्रोडक्टिव एज की महिलाओं में ही ज्यादा देखी जाती है। इससे कई बार इंफर्टिलिटी की प्रॉब्लम भी हो जाती है। इसलिए समय रहते ही इसका उपचार करा लेना चाहिए। जानिए, इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में।

भूलकर भी अनियमित पीरियड्स और पेट दर्द की ऐंठन न करें नजरअंदाज, हो सकती हैं चॉकलेट सिस्ट की शिकार

Chocolate Cyst Ovarian Endometrioma cause, symptoms and treatment

आज हम आपको चॉकलेट सिस्ट यानि ओवरी में होने वाली गांठ क्या होती है। इसके अलावा चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) कारण, लक्षण और उपचार के बारे में बता रहे हैं। जिससे आप समय रहते ही इस गंभीर बीमारी से शरीर के होने वाले नुकसान से बचा जा सकें।

क्या होती है चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst)

एंडोमेट्रियम(Endometrioma) एक तरह की सिस्ट है, इसे चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) भी कहा जाता है। यह ऐसी ओवरी में पनपती है, जो या तो फ्लूड से भरी होती है या फिर जिसमें कभी-कभी सेमीसॉलिड मैटीरियल्स भर जाते हैं। ऐसे मामलों में यह कॉम्प्लेक्स सिस्ट कहलाती है। इसे चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) इसलिए कहा जाता है, क्योंकि सिस्ट की कैविटी गहरे, पुराने चॉकलेटी कलर के मेंस्ट्रुअल ब्लड और टिश्यू से भरी होती है। यह सिस्ट तब बनती है, जब एंडोमेट्रियल टिश्यू ओवरी से जुड़ते हैं और वहां पनपने लगते हैं। यह एंडोमेट्रियल सेल पहले छोटे-छोटे सिस्ट बनाती हैं लेकिन जैसे ही इनका कॉन्टेक्ट मेंस्ट्रुअल हॉर्मोंस से होता है तो इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी हो जाती है। हॉर्मोंस की प्रतिक्रिया और गर्भावस्था की अनुपस्थिति में एंडोमेट्रियल लाइनिंग मेंसेस के रूप में बह जाते हैं।

हालांकि एंडोमेट्रिओसिस के मामले में यह ब्लड बाहर नहीं निकल पाता बल्कि यह जमा होने लगता है, जिसके कारण आस-पास के टिश्यू में दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इसके कारण फाइबर संबंधित घाव भी हो जाते हैं और सिस्ट्स भी बन जाते हैं, जो खून और बचे हुए टिश्यू से भरे होते हैं। यह समस्या बाद में गंभीर हो सकती है, ऐसे में समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर, उपचार कराना चाहिए।

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क्या हैं कारण

यह समस्या आमतौर पर 25 से 40 साल की उम्र की उन महिलाओं को होती है, जिन्हें इंफर्टिलिटी(Infrtility) की समस्या होती है। लेकिन इसके होने के कई कारण हो सकते हैं। इसके बनने के कई कारणों में से एक रेट्रोग्रेड मेंस्ट्रुएशन हो सकता है। पीरियड्स के दौरान, एंड्रोमेट्रियल टिश्यू टूटते हैं और उनका शरीर से बाहर निकलना जरूरी होता है। लेकिन चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) से पीड़ित महिला में मेंस्ट्रुअल ब्लड एंडोमेट्रियल टिश्यू के साथ ओवरी में वापस चला जाता है, जिससे बचे हुई टिश्यू और खून एक या दोनों ओवरीज में जाकर धीरे-धीरे उस पर छा जाते हैं, जिससे सिस्ट्स बनती हैं।

इसके बनने की एक और थ्योरी है, जो इम्यून सिस्टम के डिसऑर्डर पर बेस्ड है, इससे एंडोमेट्रिओसिस का विकास होता है। चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst)तब बनते हैं, जब इम्यून सिस्टम एंडोमेट्रिओसिस का पता नहीं लगा पाता और यूट्रस(Utros) के बाहर एंडोमेट्रियल टिश्यू को खत्म करने लगता है। कुछ रिसर्च के अनुसार यह समस्या मां से बेटी में भी आती है।

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चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) के लक्षण

हालांकि, कुछ मामलों में इसके लक्षण पता नहीं चलते हैं। इसके लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से रेग्युलर चेकअप की जरूरत होती है, जो वेजाइनल अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे के जरिए होती है। 30 से 40 प्रतिशत मामलों में चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) से पीड़ित महिलाओं को गर्भधारण करने में परेशानी होती है। हालांकि हर महिला में चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे पेट में ऐंठन, पीरियड्स के दौरान दर्द, अनियमित पीरियड्स, पीरियड्स के बीच-बीच में असामान्य स्पॉटिंग या ब्लीडिंग, यूरिनेशन के समय पेल्विस में दर्द, व्यायाम करते समय दर्द, सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान दर्द, वेजाइना से गहरे रंग का डिस्चार्ज। इन लक्षणों को नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

संभव है उपचार

इस समस्या का उपचार महिला की उम्र, उसके लक्षण और इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी दोनों ओवरीज प्रभावित हैं या नहीं, साथ ही उनका रिप्रोडक्टिव स्टेटस क्या है (वे संतान चाहती हैं या नहीं)। रोगी की स्थिति के अनुसार डॉक्टर उपचार बताते हैं। पेल्विक के दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए एनलजेसिक्स और एंटी-इंफ्लेमेट्रीज दवाइयों पर आधारित उपचार बताया जाता है। हालांकि ये दवाइयां कभी-कभी पूरी तरह से उपचार नहीं कर पातीं और इसलिए इनके साथ कुछ हार्मोनल ट्रीटमेंट भी दिया जाता है, जिसके तहत ओवरी के हॉर्मोंस(Hormones) के प्रोडक्शन को ब्लॉक कर दिया जाता है ताकि ब्लीडिंग कम की जा सके।

4 सेमी. से बड़े चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) से इन्फर्टिलिटी(Infrtility) और कैंसर (बहुत कम मामलों में) हो सकता है। ऐसे में सिस्ट हटाने के लिए ओवेरियन सिस्टेक्टॉमी की सलाह दी जाती है। लैपरोस्कोपी द्वारा एंडोमेट्रियल एक्सक्रेसेंसेज, खराब टिश्यू और इससे संबंधित वैसी चीजों को जो अकसर इन्फर्टिलिटी(Infrtility) का कारण बनती हैं, हटा दिया जाता है जिससे यूट्रस(Utros)और ओवरीज(Ovaries) को बचाया जा सके। लैपरोस्कोपी के दौरान सिस्ट के साथ हेल्दी ओवरियन टिश्यू के हटाए जाने की अधिक संभावना होती है। इससे ओवरियन फंक्शन पर गलत असर पड़ सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस के गंभीर मामलों में अगर लक्षण बार-बार दिखते रहें और सिस्टेक्टॉमी इस बीमारी को ठीक न कर पाएं तो हिस्टेरेक्टॉमी (यूट्रस के एक हिस्सा या पूरे यूट्रस को निकाल देना) को अंतिम उपाय के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि यहां पर भी महिला की उम्र और रिप्रोडक्टिव स्टेटस को

ध्यान में रखा जाता है। अगर महिला की उम्र 35 से अधिक है और उसे संतान नहीं चाहिए तो उसकी ओवरीज(Ovaries) और यूट्रस (Utros) को पूरी तरह से निकालने की सलाह दी जाती है। अगर चॉकलेट सिस्ट(Chocolate Cyst) का आकार छोटा है और उसके लक्षण नहीं दिख रहे तो इमेजिंग टेस्ट के साथ उसके फॉलोअप की सलाह दी जाती है।

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