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एक्सरसाइज की मदद से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से मिलेगा आराम, इन एडवाइस को जरुर करें फॉलो

आमतौर पर सर्वाइकल (Cervical) स्पोंडिलोसिस की समस्या चालीस की उम्र के बाद शुरू होती है। लेकिन लगातार गलत पोश्चर में बैठने, काम करने या फिजिकल एक्टिविटी न करने से कम उम्र में ही लोगों को यह समस्या होने लगती है। ऐसा आपके साथ ना हो इसके लिए इसके लक्षणों को समय पर पहचानना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह पर कुछ व्यायाम (Cervical Exercise) करने से इसमें आराम मिलता है।

एक्सरसाइज की मदद से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से मिलेगा आराम, इन एडवाइस को जरुर करें फॉलो
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आमतौर पर सर्वाइकल (Cervical) स्पोंडिलोसिस की समस्या चालीस की उम्र के बाद शुरू होती है। लेकिन लगातार गलत पोश्चर में बैठने, काम करने या फिजिकल एक्टिविटी न करने से कम उम्र में ही लोगों को यह समस्या होने लगती है। ऐसा आपके साथ ना हो इसके लिए इसके लक्षणों को समय पर पहचानना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह पर कुछ व्यायाम (Cervical Exercise) करने से इसमें आराम मिलता है। सरवाइकल स्पोंडिलोसिस से दुनिया भर में लाखों लोग पीड़ित हैं। अधिकतर मामलों में यह समस्या उम्र के साथ बढ़ जाती है।

क्यों होता है यह रोग

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में स्पाइनल कॉर्ड की ऊपरी कशेरुकाओं को बनाने वाली डिस्क की संरचना बदलने लगती है और गर्दन को कुशन करने की उनकी क्षमता प्रभावित होने लगती है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ कुछ मात्रा में कशेरुकाओं का कमजोर होना स्वाभाविक है। लेकिन कम उम्र में सरवाइकल स्पोंडिलोसिस से पीड़ित होने पर पेशेंट के गर्दन में दर्द और जकड़न बढ़ने लगती है। एक बार जब कार्टिलेज खराब हो जाता है और चिकनाई कम हो जाती है, तो कशेरुकाओं पर खुरदुरे पैच विकसित होने लगते हैं। रीढ़ की हड्डी से जुड़ी नसें रीढ़ से बाहर निकलते समय कशेरुकाओं के बीच संकुचित हो जाती हैं, जिसकी वजह से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस हो जाता है।

एक अनुमान के मुताबिक 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 85 प्रतिशत लोग सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से पीड़ित हैं। कई बार कम उम्र के वयस्कों में भी यह परेशानी देखी जाती है। कई मरीजों को दर्द का अधिक अनुभव नहीं होता है। मांसपेशियों को आराम देने वाले व्यायाम और सही उपचार, लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। गंभीर मामलों में, सर्जिकल विकल्प भी उपलब्ध होता हैं।

प्रमुख लक्षण

इस रोग के लक्षणों में शरीर में कमजोरी महसूस होना और रीढ़ की हड्डी में दर्द शामिल होता है। गंभीर मामलों में, वर्टिब्रा डिस्क, तंत्रिकाओं पर दबाव डाल सकती है। इससे सेंस और मूवमेंट पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इस रोग से जुड़े लक्षणों को समय से पहचानना जरूरी है, जिससे इलाज में मदद मिलती है। ज्यादातर मामलों में, स्पोंडिलोसिस के शुरुआती लक्षण साफ नहीं होते हैं। धीरे-धीरे समस्या बढ़ने पर ये लक्षण दिखना शुरू होते हैं। आमतौर पर इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को गर्दन में लगातार दर्द और अकड़न महसूस होती है। स्थिति बिगड़ने पर नेक स्पोंडिलोसिस के लक्षण अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। धीरे-धीरे पेशेंट दिन-प्रतिदिन के शारीरिक कार्यों को करने में भी असमर्थ हो जाता है। इसके कुछ अन्य लक्षण इस प्रकार हैं-

- चलने में परेशानी होना।

- हाथ और पैर में कमजोरी महसूस होना।

- सिर दर्द होना।

- सिर घुमाने पर कट-कट की आवाज होना।

- खड़े होने या चलते समय संतुलन खोना।

- कंधे या गर्दन की मांसपेशियों में ऐंठन।

- अपना सिर घुमाने या अपनी गर्दन को किसी भी दिशा में मोड़ने में परेशानी होना।

रोग के कारण

जब हमारी स्पाइनल कॉर्ड और गर्दन को बनाने वाली हड्डियों और कार्टिलेज में टूट-फूट होने लगती है तो सरवाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या होती है। इसके कुछ कारणों में शामिल है-

डिस्क की समस्या: डिस्क रीढ़ की हड्डी के कशेरुकाओं के बीच कुशन की तरह काम करती है। 40 साल की उम्र के बाद ज्यादातर लोगों की रीढ़ की हड्डी की डिस्क सूखने लगती है और सिकुड़ने लगती है, जिससे कशेरुकाओं के बीच अधिक स्पेस हो जाता है या हड्डी पर हड्डी जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

हर्निएटेड डिस्क: बढ़ती उम्र आपके स्पाइनल डिस्क के बाहरी हिस्से को भी प्रभावित करती है। उनमें दरारें पड़ जाती हैं, जिससे आपकी डिस्क उभरी हुई (हर्निएटेड) हो जाती है। इससे रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका की जड़ों पर दबाव पड़ने लगता है और यह समस्या पैदा हो जाती है।

कठोर लिगामेंट्स: लिगामेंट्स ऐसे टिश्यूज होते हैं, जो हड्डी को हड्डी से जोड़ते हैं। स्पाइनल लिगामेंट्स उम्र बढ़ने के साथ सख्त हो सकते हैं, जिससे आपकी गर्दन कम लचीली हो जाती है और सरवाइकल स्पोंडिलोसिस की स्थिति पैदा हो जाती है।

व्यायाम करने से मिलेगा आराम

अगर आप सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से ग्रस्त हैं तो गर्दन के कुछ साधारण व्यायामों को करने से आपको आराम मिल सकता है।

गर्दन खिंचाव यानी नेक स्ट्रेचिंग: सबसे पहले अपने शरीर को सीधा रखें। फिर अपनी ठुड्डी यानी चिन को इस तरह से आगे की ओर धकेलें कि गले में खिंचाव आए। गर्दन की मांसपेशियों को धीरे से तनाव दें। इस पोजिशन में 5 सेकेंड के लिए होल्ड करें। फिर गर्दन को वापस पीछे ले जाएं और अपने सिर को उसकी केंद्र स्थिति में लौटाएं। अब अपनी ठुड्डी को ऊंचा रखते हुए अपने सिर को पीछे धकेलें और 5 सेकंड के लिए रुकें। इसे आप 5 बार कर सकते हैं।

गर्दन झुकाना: पहले अपने सिर को आगे की ओर झुकाएं ताकि ठुड्डी छाती को छूने लगे। अब गर्दन की मांसपेशियों को धीरे से तनाव दें और 5 सेकेंड के लिए होल्ड करें। सिर को पूर्व स्थिति में लौटाएं। इस व्यायाम को भी आप 5 बार कर सकते हैं।

गर्दन अगल-बगल झुकाना: अपने सिर को कंधे की एक ओर झुकाएं। गर्दन की मांसपेशियों को धीरे से तनाव दें। इसे 5 सेकेंड के लिए होल्ड करें फिर अपने सिर को केंद्र में लौटाएं और दूसरे कंधे की तरफ भी ऐसे ही दोहराएं। इस क्रिया को भी आप 5 बार कर सकते हैं।

इस बात का ध्यान रखें कि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के मरीज किसी भी व्यायाम की शुरुआत करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें। गलत तरीके से व्यायाम किए जाने पर आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

(नई दिल्ली स्थित सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट, होली फैमिली हॉस्पिटल के सीनियर ऑर्थोपेडिक कंसल्टेंट-ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. बीरेन नादकर्णी से बातचीत पर आधारित)

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