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Kanchan Awasthi Interview: 'यहूदी की लड़की' कैसे बनी 'गन वाली दुल्हनिया': कंचन अवस्थी

एक्ट्रेस बनने का सपना पूरा करने के लिए कंचन अवस्थी ने लखनऊ से मुंबई तक का सफर तय किया। अब तक वह तीन फिल्मों में अहम किरदार निभा चुकी हैं। अब उनके करियर की चौथी फिल्म ‘गन वाली दुल्हनिया’ रिलीज होने वाली है, इसमें कंचन का किस तरह का रोल है? आगे किस तरह के रोल करना चाहती हैं कंचन अवस्थी।

Kanchan Awasthi Interview:

लखनऊ की रहने वालीं कंचन अवस्थी का एक्टिंग करियर थिएटर प्ले 'यहूदी की लड़की' से शुरू हुआ था। इसके बाद वह हिंदी टीवी सीरियल 'अम्मा' का हिस्सा बनीं। फिर विक्रम भट्ट की 'अंकुर अरोड़ा मर्डर केस' और 'भूतवाली लव स्टोरी' जैसी फिल्मों में अहम किरदार निभाए। हाल ही में कंचन अवस्थी प्रकाश झा प्रोड्यूस्ड फिल्म 'फ्रॉड सैयां' में अरशद वारसी के साथ नजर आई थीं। अब वह एक और हिंदी फिल्म 'गन वाली दुल्हनिया' में टाइटल रोल प्ले कर रही हैं। बातचीत कंचन अवस्थी से।

फिल्म 'गन वाली दुल्हनिया' किस तरह की फिल्म है, इसमें आपका रोल क्या है?

जैसा फिल्म के नाम से पता चलता है कि यह गन रखने वाली एक दुल्हनिया की कहानी है। 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया', 'हंप्टी शर्मा की दुल्हनिया' जैसे टाइटल वाली कई फिल्में आ चुकी हैं, अब 'गन वाली दुल्हनिया' भी आ रही है। बहुत अच्छा और इनोवेटिव सब्जेक्ट है, इसके नएपन ने मुझे इस फिल्म के लिए हां कहने पर मजबूर किया।

दर्शकों ने बहुत-सी दुल्हनिया देखी होगी लेकिन ऐसी दुल्हन नहीं देखी होगी, जिसके हाथ में गन हो। फिल्म की कहानी का बैकड्रॉप उत्तर प्रदेश है। मैं फिल्म में टाइटल रोल प्ले कर रही हूं। इसमें दुल्हनिया का नाम तो शर्मीली राय है लेकिन वह शरमाती नहीं है। मेरा किरदार बिंदास और जिद्दी है, अगर उसे कुछ चाहिए तो फिर वो उसे गन प्वाइंट पर लेकर रहती है।

अगर उसे कोई लड़का शादी के लिए पसंद आएगा तो उसे भी गन प्वाइंट पर लेकर आ जाती है। फिल्म का ट्रेलर भी बेहद फनी है। मेरा किरदार सोचता है कि यह मेरी लाइफ है, मुझे इसे अपने हिसाब से जीना है। इसकी स्टोरी बेहद मनोरंजक है। शादी की रात दुल्हनिया का किडनैप हो जाता है। लड़का मंडप पर बैठा रहता है तभी लड़की के घरवालों को किसी का फोन आता है कि उन्हें पांचकरोड़ रुपए चाहिए।

इतने में घरवालों को एक लेटर मिलता है, जिसमें लड़की ने खुद लिखा है कि वह भाग कर जा रही है। पूरा माहौल कंफ्यूजन से भर जाता है, लड़की भागी है कि किडनैप हुई है। फिल्म में ब्रिजेंद्र काला ने मेरे किरदार के पिता की भूमिका निभाई है।

फिल्म में आपके को एक्टर्स कौन हैं और उनके साथ वर्किंग एक्सपीरियंस कैसे रहे?

इस फिल्म में मयूर कुमार और एलव्हीस मेरे को एक्टर्स हैं, जिनके साथ बहुत अच्छा काम का अनुभव रहा। इसमें गोविंद नामदेव, ब्रिजेंद्र काला, गजेंद्र चौहान, श्रावणी गोस्वामी जैसे कई कलाकारों ने भी अहम किरदार निभाए हैं। फिल्म का कंटेंट और सब्जेक्ट इंट्रेस्टिंग है, मुझे आशा है कि फिल्म दर्शकों के दिलों को छू जाएगी।

इस फिल्म की यूएसपी आपकी नजर में क्या है?

'गन वाली दुल्हनियां' के जरिए एक अलग सब्जेक्ट को सामने रखने की कोशिश की जा रही है। इस रोमंटिक कॉमेडी का कॉमिक लेवल बहुत हाई है। फिल्म में दुल्हन के पास गन क्यों है, इसके पीछे भी खास वजह है, यह जानने के लिए दर्शकों को फिल्म देखनी होगी।

फ्यूचर में आप किस तरह का काम करना चाहती हैं?

मैं वेब सीरीज, म्यूजिक वीडियो और सिंगल्स भी करने के लिए तैयार हूं। टीवी के लिए भी अगर अच्छा ऑफर आया तो मुझे करने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। बीच में मैंने जी टीवी का एक सीरियल 'अम्मा' भी किया था। शबाना आजमी के साथ उसमें काम करने का मौका मिला। आगे मैं वूमेन ओरिएंटेड सिनेमा करना चाहती हूं।

मैं ग्रे शेड्स वाले किरदार भी करना चाहूंगी, लीड रोल हो या सेकेंड लीड, उससे फर्क नहीं पड़ता। किरदार में दम होना चाहिए। अब रियालिस्टिक सिनेमा का दौर है, मैं इस दौर को बेस्ट समझती हूं। बॉलीवुड में नए एक्टर्स के लिए भी यह समय बिल्कुल सही है।

एक्टिंग जर्नी

लखनऊ से मुंबई तक का मेरा सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा ही है। लखनऊ में गायिकी से अपने करियर की शुरुआत की थी और कभी नहीं सोचा था कि एक दिन अभिनय को अपना करियर बनाऊंगी। लेकिन इत्तेफाक से लखनऊ में एक नाटक 'यहूदी की बेटी' में राहिल की भूमिका की और फिर अभिनय करियर की शुरुआत हो गई।

सलीम आरिफ साहब ने मेरा नाटक 'यहूदी की लड़की' देखा और मुझे अपने नाटक 'चंपा की चिट्ठी' में अदाकारी करने का ऑफर दिया। नाटक 'चंपा की चिट्ठी' का मुंबई के पृथ्वी थिएटर में शो होना था, इसलिए मुंबई आई। उसी दौरान मुझे विक्रम भट्ट की फिल्म 'अंकुर अरोड़ा मर्डर केस' हासिल हो गई और फिर 'फ्रॉड सैयां' मिल गई। टीवी सीरियल 'अम्मा' में काम करने का मौका मिला।



प्रस्तुति: गाजी मोईन अंसारी

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