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वर्ल्ड हेल्थ डे: एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कैसे रखें अपने आपको फिट एंड हेल्दी

वर्ल्ड हेल्थ डे एक्पर्ट्स के अनुसार अपने आपको फिट एंड हेल्दी रखने के लिए अपनी डाइट बॉडी का वेट और मेन्टल हेल्थ पर ध्यान रखना होगा। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज: एव्रीवन, एव्रीव्हेयर'' रखी है।

वर्ल्ड हेल्थ डे: एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कैसे रखें अपने आपको फिट एंड हेल्दी

रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ती व्यस्तताओं के कारण आज के दौर में अधिकतर लोग अपना ख्याल नहीं रख पाते हैं। डाइट, फिटनेस को लेकर भी अक्सर लोग लापरवाही बरतते हैं। परिणामस्वरूप अनेक तरह की शारीरिक समस्याएं बढ़ रही हैं। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों में बैलेंस बनाने के प्रेशर में हमारी लाइफ में तनाव बढ़ने लगता है।

जिससे हमारी कार्यक्षमता की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। बेहतर जीवन के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है व्यक्ति का स्वस्थ रहना। यह तभी संभव है, जब हम सभी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को अच्छे ढंग से मेंटेन करें। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज: एव्रीवन, एव्रीव्हेयर' रखी है।

क्योंकि हेल्दी-हैप्पी लाइफ जीने की कामना सभी करते हैं। लेकिन इसके लिए अपनी लाइफस्टाइल में किस तरह के बदलाव किए जाने की जरूरत है, इस पर बहुत से लोग अमल नहीं करते हैं। हमें इस बात के लिए अवेयर होना होगा कि फिजिकल हेल्थ किन कारणों से प्रभावित होती है? अपनी डाइट, फिजिकल एक्टिविटी, बॉडी वेट और मेंटल हेल्थ को लेकर अगर हम कॉन्शस रहें और जरूरी प्रयास करें तो पूरी तरह हेल्दी रह सकते हैं।

इस बारे में जानिए हमारे एक्सपर्ट्स श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट, दिल्ली के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट यूनिट में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमन दुआ, साइकोलॉजिस्ट पल्लवी जोशी, पीएसआरआई, नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस के चेयरमैन डॉ. शमशेर द्विवेदी और दिल्ली में फर्टिलिटी सॉल्यूशंस की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. श्वेता की राय

डाइट रखें सही

आज बदलती और तेज रफ्तार लाइफस्टाइल के कारण अधिकतर लोगों की दिनचर्या बहुत ज्यादा डिस्टर्ब हो गई है। संतुलित खानपान की जगह जंक फूड लोगों की पसंदीदा डिश बन गया है। यह आसानी से हर जगह उपलब्ध हो जाता है। इसलिए आज खासकर युवा, बच्चे और किशोर इनका बड़ी मात्रा में सेवन करते हैं। लेकिन इस इजिली अवेलेवल जंक फूड्स जैसे बर्गर, चाइनीज फूड, पिज्जा, मोमो और पेटीज आदि में ऐसे तत्व शामिल होते हैं, जो हमारी सेहत के लिए हार्मफुल होते हैं। जंक फूड का नेगेटिव असर हमारी इम्यूनिटी सिस्टम की फंक्शन पावर पर पड़ता है।

इसके अलावा कुछ लोग जरूरत से ज्यादा भोजन करते हैं। ज्यादा भोजन ठीक से पच नहीं पाता है, जिसका पाचन-क्रिया पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस स्थिति में फालतू भोजन शरीर के चारों तरफ वसा के रूप में इकट्ठा हो जाता है। इससे लोगों में मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी, जिसमें शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाता है। लापरवाही बरतने पर इसके कारण अंधापन, हार्ट अटैक और लकवा जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा युवाओं के बीच एल्कोहल और स्मोंकिंग का इस्तेमाल भी इन दिनों ट्रेंड में है। एल्कोहल और स्मोकिंग का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।

इन पर करें गौर

जहां तक संभव हो शरीर की इम्यूनिटी सिस्टम को स्वस्थ रखने के लिए जंक फूड्स से दूरी बनाना ही बेहतर है। इसकी जगह संतुलित आहार जैसे हरी पत्तेदार और ताजा सब्जियों का इस्तेमाल करें। भोजन के साथ सलाद अवश्य लें। इससे जहां शरीर में पानी की पूर्ति होगी, वहीं पाचन-क्रिया भी अच्छी रहेगी।

अगर आप अपनी डाइट को तय नहीं कर पा रहे हैं, तो किसी डाइटीशियन द्वारा तैयार डाइट चार्ट का अनुसरण करें। इससे डाइट नियंत्रित करने में भी बहुत मदद मिलेगी। मोटापे के लिए आप वसा वाले फूड के इस्तेमाल से बचें। भूख लगने पर भोजन अवश्य करें लेकिन जरूरत से ज्यादा खाना न खाएं।

करते रहें फिजिकल मूवमेंट

वजन ज्यादा बढ़ने पर शरीर कई प्रकार की बीमारियों का घर बन जाता है। इसमें मुख्यता डायबिटीज, हाइपरटेंशन, स्ट्रोक, हृदय संबधी समस्याएं और किसी प्रकार की फिजिकल इंजरी की ठीक होने की प्रक्रिया का धीमा पड़ना आदि शामिल हैं। इस बारे में, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट, दिल्ली के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट यूनिट में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमन दुआ बताते हैं कि वजन ज्यादा होने के कारण अगर व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट लगती है,

तो उसकी मूवमेंट्स कम हो जाती है, जिसकी वजह से उसके वजन में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है। इस स्थिति में यही सलाह दी जाती है कि किसी भी प्रकार की इंजरी के दौरान अपनी शारीरिक मूवमेंट्स को कम न करें। ध्यान रखें कि ऐसी कंडीशन में जिमिंग या भारी वजन न उठाएं। योग की ब्रीथिंग एक्सरसाइज, मेडिटेशन, स्ट्रेचिंग का सहारा लेकर खुद को स्वस्थ रख सकते हैं।

कंट्रोल रखें बॉडी वेट

पीएसआरआई, नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस के चेयरमैन डॉ. शमशेर द्विवेदी के मुताबिक, ‘बदलती जीवनशैली, स्ट्रेस, हाई कोलेस्ट्रॉल और स्ट्रोक होने की संभावना को कई गुना बढ़ा देते हैं। स्ट्रोक के लक्षण शरीर के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देते हैं, जो बोलने में कठिनाई, हाथ या चेहरे में कमजोरी, लकवा और चक्कर आने का कारण बन सकते हैं। आगे चलकर इससे व्यक्ति को विकलांगता, मस्तिष्क क्षति और मृत्यु होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

इस कंडीशन में रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए सोडियम और सैचुरेटेड फैट का सेवन कम करना जरूरी है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियां खाएं। व्यायाम खुद को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि यह दिल का दौरा, मधुमेह के जोखिम, तनाव कम करने और मोटापे को रोकने में आपकी मदद कर सकता है। संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए व्यायाम महत्वपूर्ण है और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में आपकी सहायता भी करता है।'

महिलाओं की दिक्कत

महिलाओं में ओवरवेट प्रॉब्लम के बारे में मेडिकवर फर्टिलिटी, दिल्ली में फर्टिलिटी सॉल्यूशंस की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. श्वेता के मुताबिक, ‘अधिक वजन वाली या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है। उन्हें फिजिकली फिट महिलाओं की तुलना में गर्भ धारण करने के लिए एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है।

इसके अलावा ओवरवेटेड महिलाओं को गर्भपात होने की संभावना भी दोगुनी होती है। रिसर्च साबित करते हैं कि मोटापा भी इन समस्याओं के लिए जिम्मेदार हो सकता है लेकिन इनफर्टिलिटी का महत्वपूर्ण कारण वजन का जरूत से ज्यादा बढ़ना या कम होना है। इसलिए एक स्वस्थ जीवनशैली जिएं। यह न केवल फर्टिलिटी दर में सुधार करती है बल्कि आपको फिट भी रखती है।'

मेंटल हेल्थ का रखें ध्यान

आज की जीवनशैली की वजह से शारीरिक प्रॉब्लम्स के साथ-साथ बहुत से लोग मानसिक तौर पर भी अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इस संबंध में श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट की साइकोलॉजिस्ट पल्लवी जोशी बताती हैं कि आज के दौर में अधिकतर लोगों को तनाव ने घेर रखा है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को बैलेंस करें। अगर कोई परेशानी हो तो दूसरों की राय लें और उसका निदान करने का प्रयास करें।

अपनी प्रॉब्लम छिपाकर डिप्रेशन में ना जाएं। हम तभी पूरी तरह स्वस्थ रह सकते हैं, जब हम खुश हों और खुश भी तभी रह सकते हैं, जब फिजिकली और मेंटली हेल्दी होंगे। इसलिए अपनी व्यस्त जीवनशैली में अपने लिए वह समय जरूर निकालें, जिससे आपको खुशी मिले। अपने और अपने परिवार के लिए वक्त निकालकर रिलैक्स होना बेहद जरूरी है। अगर आप इन सभी बातों का ध्यान रखेंगे तो एक स्वस्थ जीवन जिएंगे।

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