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अगर पार्टनर की ज्यादा सैलरी से रिश्ते में आ रही है दरार, तो इन बातों का जरूर रखें ख्याल

आज के समय में ज्यादातर कपल्स वर्किंग हैं। ऐसे में किसी एक की सैलरी दूसरे से कम या ज्यादा हो सकती है। लेकिन प्रॉब्लम तब आती है, जब सैलरी की वजह से दोनों के बीच दूरी बढ़ने लगती है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप दोनों कुछ बातों का ध्यान रखें।

अगर पार्टनर की ज्यादा सैलरी से रिश्ते में आ रही है दरार, तो इन बातों का जरूर रखें ख्याल
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शादी के बाद पति-पत्नी अगर दोनों वर्किंग हैं, पति का पैकेज पत्नी से ज्यादा है तो सामान्यत तौर पर दोनों के ईगो नहीं टकराते। दरअसल, इसे सहजता से स्वीकार कर लिया जाता है कि काम-काजी पति-पत्नी में पति को ही ज्यादा धन अर्जित करना चाहिए। समस्या तब आती है, जब पत्नी की इन्कम पति से ज्यादा होती है। इससे पति के आत्मसम्मान को ठेस लगती है। अगर समझदारी से काम न लिया जाए तो आपसी बहस बढ़ने लगती है और कई बार दोनों का रिश्ता टूटने की कगार पर आ पहुंचता है। ऐसे में जरूरी है कि अपने रिश्ते पर पैसे को हावी न होने दिया जाए।

गंभीरता से सोचें

लड़का-लड़की एक-दूसरे की केवल सैलरी से प्रभावित होकर तो शादी नहीं करते। दोनों एक-दूसरे के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर जीवन-साथी बनने का निर्णय लेते हैं। ऐसे में अगर पत्नी की इनकम से पति के अहं को ठेस लगती है तो उसे पीछे मुड़कर देखना चाहिए कि उसने क्या सोचकर शादी का निर्णय लिया था? यह बात दोनों पर लागू होती है। जब भी आप अपने प्यार और जुड़ाव को महत्व देंगे तो सैलरी की बात बहुत मायने नहीं रखेगी।

सब कुछ नहीं है पैसा

कई बार गुस्से में हम पैसे को लेकर ऐसी बातें अपने पार्टनर से कह देते हैं, जो नहीं कहनी चाहिए। उन पर हावी होने के लिए अपने पैसे का रौब दिखाना
सही नहीं है। आपसी प्यार के रिश्ते में इस बात से क्या फर्क पड़ता है कि अगर एक पार्टनर साल में 4 लाख कमा रहा है और दूसरा 6 लाख रुपए। आप
दोनों ही अपने जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए कड़ी मेहनत कर नौकरी करते हैं। इसलिए पति की सैलरी अगर आपसे कम है तो ऐसी स्थिति में उसके प्रति आपको ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए। अपने-अपने काम के विषय में बातचीत करें। अगर आपकी किसी बात से आपके पार्टनर को ठेस लगती है तो यह सोच-समझकर संयम से बात करें कि आपके रिश्ते में पैसा ही सबसे इंपॉर्टेंट नहीं है।

बंद न करें बातचीत

पैसे के मामले में किसी तनाव से बचने के लिए बेहतर है कि महीने में एक बार दोनों मिलकर घर के खर्चों का बजट बनाएं और उसका हिसाब रखें।
एक-दूसरे की देखभाल, एक-दूसरे की जरूरतों के लिए भी खर्च का ध्यान रखें। तनाव किसी भी वजह से हो, एक-दूसरे के साथ बातचीत करते रहें। अगर
आपको कोई बात परेशान कर रही है तो अपने पार्टनर से खुलकर कहें, मन में दबाकर न रखें। सही समय पर सही बात संतुलित भाषा में करें तो आपसी
लगाव बना रहता है।

काउंसलर से लें सलाह

अगर आपको महसूस होता है कि एक-दूसरे की इनकम की वजह से आप दोनों में रिश्ते सहज नहीं बन पा रहे हैं और आपके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं तो आप भी किसी एक्सपर्ट रिलेशनशिप काउंसलर से मदद ले सकते हैं। मनी मैटर्स की वजह से पति-पत्नी के बीच होने वाले मन-मुटाव को दूर करने के लिए रिलेशनशिप काउंसलर्स तीन स्तर पर काउंसलिंग कर सकते हैं। इसके तहत वे पहले दोनों से मिलकर समस्या को समझने की कोशिश करते हैं। इसके बाद दोनों से अलग-अलग मिलते हैं। इससे कई बातें खुलकर सामने आती हैं। तीसरे सेशन में दोनों को एक साथ बैठाकर उनसे सवाल पूछे जाते हैं, जैसे-पिछले कुछ सालों में वे अपने साथी में क्या बदलाव देखते हैं? बच्चों के भविष्य के बारे में उनकी क्या योजनाएं हैं? साथ ही उनके इंवेस्टमेंट प्लान के बारे में पूछकर अपने बजट को बनाने की सलाह देते हैं।

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