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ज्यादा गुस्सा आए तो ऐसे करें खुद पर कंट्रोल

गस्सा शांत रखना है तो सोचें कि आपका काम आपकी सोच से पलट भी हो सकता है।

ज्यादा गुस्सा आए तो ऐसे करें खुद पर कंट्रोल
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नई दिल्ली. किसी भी व्यक्ति को किसी भी वक्त गुस्सा आ सकता है, गुस्सा कभी भी बताकर नहीं आता है और न ही उसका कोई परफेक्ट टाइम होता है। बस किसी दूसरे के बेढ़ंगे बर्ताव से अचानक ही गुस्सा आ जाता है। कई बार आप जैसा सोचते हैं उस मुताबिक काम नहीं हो पाता है और आप इरिटेट हो जाते हैं, और चिड़चिड़ाने लगते हैं। अक्सर घर में बीबी का चिल्लाना, बच्चों का हल्ला आपसे बर्दाश्त नहीं हो पाता है यहां तक की राह चलते आपके साथ कई ऐसे वाकया होते हैं जिसकी वजह से आपका गुस्सा आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है। आपने सिनेमा हॉल में मूवी देखते वक्त इस बात को नोटिस किया होगा कि अगर कोई जोर-जोर से बात करे या चिल्लाए तो बेशक हर किसी को गुस्सा आएगा, जाहिर है आपको भी कभी न कभी गुस्सा आया होगा और यकीनन आपसे बिना कुछ कहे रहा भी नहीं गया होगा, तो बता दें कि सबसे बड़ी चुनौती होती है इन हालात में खुद को शांत रखना, इसलिए हम आपको ऐसे तरीके बता रहे हैं जिससे आप आसानी से खुद के गुस्से पर कंट्रोल कर सकते हैं...
- खुद को शांत बनाए रखने का यह अचूक फॉर्मूला है कि आखिर खुद को प्रतिकूल हालात में आपके गुस्से, चिढ़ या उलझन की असल वजह आखिर क्या है।
- जब भी आप कोई नया प्लान करें या अपनी कोई जरूरी काम किसी दूसरे व्यक्ति को सौंपे तो अपने दिमाग में इस बात को जरूर रखें कि आपका काम आपकी सोच से पलट भी हो सकता है।
- कई बार घर का कुछ सामान टूटने की वजह से आपको गुस्सा आ जाता है, जैसे उदाहरण के तौर पर कांच का ग्लास या कम टूटना आम बात है तो इसके टूटने पर घबराने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। घर में कांच का होना मतलब एक दिन कांच इसे टूटना ही है। तो शुरुआत से ही इसे टूटा मानने में कोई दिक्कत नहीं है तो गुस्सा आने वाली कोई संभावना ही नहीं रह जाती है।
- अक्सर आप अपने बच्चे की शरारत पर भड़क जाते हैं और डांटना मारना शुरू कर देते हैं। लेकिन आप ये भूल जाते हैं कि बच्चे हैं तो शरारती तो होंगे ही। हर बच्चा शरारत करता है इसलिए अपने बच्चे से शांत रहने की उम्मीद न करें, ऐसे में जब आपका बच्चा कोई गड़बड़ी भी कर देगा, तो आपको कोई परेशानी नहीं होगी और आपको गुस्सा भी नहीं आएगा।
- गुस्सा किसी पर भी आ सकता है। इसलिए अपने किसी भी रिश्ते को परफेक्ट न माने मतलब अपने पार्टनर से परफेक्ट से कम होने की ही उम्मीद करें, अगर आप ऐसा सोचेंगे तो वक्त आने पर खुद पर आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं।
- जरूरी नहीं कि आपका दोस्त आपकी हर परेशानी में साथ दे इसलिए हो सके तो अपने दोस्त से उम्मीद करें कि वह हर परिस्थिति में आपका साथ नहीं देगा, ऐसा सोचना आपके लिए ही बेहतर होगा।
- हर इंसान का व्यवहार अलग होता है इसलिए लोगों से उम्मीद करें कि वे लोग अजीबों-गरीब व्यवहार जरूर करेंगे। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि आपको सिर्फ उम्मीद ही नहीं करनी है बल्कि इस बातों को स्वीकार भी करना है।
- आपके उम्मीद रखने या न रखने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा जो चीजें होनी है वह होकर रहेगी, लेकिन अगर आप वक्त से पहले ऐसी उम्मीदें रखने लगेंगे, तो आप कभी परेशान नहीं रहेंगे और खुद को शांत भी रख पाएंगे और वक्त आने पर आपका आउट ऑफ कंट्रोल वाला गुस्सा बेहद आसानी से कंट्रोल में आ जाएगा।
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