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सदियों पुरानी है ''कोल्हापुरी चप्पल'', जानें इसके कई हैरान कर देने वाले तथ्य

कोल्हापुरी चप्पल का फैशन ऐसा है, जो कभी आउट नहीं होता। इतना ही नहीं कोल्हापुरी चप्पल को भारतीय फैशन में काफी लंबे समय से लोग पसंद कर रहे हैं।

सदियों पुरानी है कोल्हापुरी चप्पल, जानें इसके कई हैरान कर देने वाले तथ्य
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Kolhapuri Chappal

कोल्हापुरी चप्पल का फैशन ऐसा है, जो कभी आउट नहीं होता। इतना ही नहीं कोल्हापुरी चप्पल को भारतीय फैशन में काफी लंबे समय से लोग पसंद कर रहे हैं। इतना ही नहीं कोल्हापुरी चप्पल की की मांग विदेशों में भी है। बाहर से आए टूरिस्ट भारत से कोल्हापुरी चप्पल खरीद कर ले जाते हैं।

कोल्हापुरी चप्पल विशेष रूप से महाराष्ट्र के कोल्हापुर में डिजाइन की जाती है। इसी कारण से इसका नाम कोल्हापुरी पड़ा है। कोल्हापुरी चप्पल की खास बात यह है कि यह 13वीं सदी की शुरुआत से पहनी जा रही हैं।

20वीं सदी से पहले कोल्हापुरी का नाम

20वीं सदी से पहले कोल्हापुरी जिस गांव में चप्पलें बनती थीं, उसी गांव के नाम पर उनका नाम रख दिया जाता था। तब इनके नाम कपाशी, पायटन, कचकड़ी, बक्कलनवी और पुकारी जैसे नाम थे। इसके बाद 1920 में एक सौदागर परिवार ने कोल्हापुरी चप्पल को नए डिजाइन में बनाया। कानों की तरह बेहद पतली होने के कारण इन्हें कनवली नाम भी दिया गया। कनवली चप्पलों को ही बाद में कोल्हापुरी चप्पल के नाम से जाना जाने लगा और वह फेमस हुईं।

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कब ज्यादा मशहूर हुई कोल्हापुरी चप्पल

कोल्हापुरी चप्पल तब ज्यादा फेमस हुई जब ये दक्षिणी मुंबई के जेजे रिटेल स्टोर एंड संस पर बिकने के लिए नजर आईं। उस समय फुटवियर की इस स्टाइल को लोगों ने बहुत पसंद किया। धीरे-धीरे कोल्हापुरी चप्पल की इस डिजाइन की मांग बढ़ने लगी।

8 देशों में होती हैं निर्यात

कोल्हापुरी चप्पल दुनिया के 8 देशों में निर्यात भी की जाती हैं। समय, फैशन और लोगों की डिमांड के हिसाब से ये चप्पल अलग-अलग पैटर्न और डिजाइन में बनाई जाने लगी हैं। कोल्हापुरी चप्पल ज्यादातर कोल्हापुर, मीरज, सतारा आदि जगहों से बना कर कारीगर मुंबई में जाकर बेचते हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक इन चप्पलों को बनाने के लिए चेन्नई और कोलकाता से चमड़ा आता है। आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में कोल्हापुर में करीब 25 लाख लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

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