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पीरियड्स और प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्या का भी इलाज योग में छिपा है, जानें कैसे

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को है। योग दिवस 2018 का मुख्य कार्यक्रम देहरादून में होगा, जहां पीएम मोदी भी योग करेंगे। आज कल कोई भी व्यक्ति योग नहीं करना चाहता है और अगर बात करें महिलाओं की तो तमाम जिम्मेदारियों के चलते उन्हें योगा करने का वक्त नहीं मिलता।

पीरियड्स और प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्या का भी इलाज योग में छिपा है, जानें कैसे

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को है। योग दिवस 2018 का मुख्य कार्यक्रम देहरादून में होगा, जहां पीएम मोदी भी योग करेंगे। आज कल कोई भी व्यक्ति योग नहीं करना चाहता है और अगर बात करें महिलाओं की तो तमाम जिम्मेदारियों के चलते उन्हें योगा करने का वक्त नहीं मिलता।

ऐसे में बदलती जीवनशैली की वजह से महिलाओं को अनियमित मासिक धर्म, प्रजनन क्षमता में कमी के साथ मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

लेकिन कुछ विशेष योगासनों को नियमित रूप से करने पर महिलाएं इस तरह की समस्याओं से बच सकती हैं। इन दिनों बहुत सी महिलाएं घर और दफ्तर की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

ऐसे में उन पर काम का दबाव काफी ज्यादा बढ़ जाता है, इस वजह से महिलाएं अकसर तनाव से घिरी रहती हैं। साथ ही कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी उन्हें अपनी चपेट में ले रही हैं।

तनाव और शारीरिक समस्याओं से निजात पाने के लिए नियमित तौर पर किए ये योगाभ्यास बहुत मददगार हो सकते हैं।

उड्डियान बंध

विधि: सुखासन में बैठकर पेट को इतना सिकोड़ें कि नाभि, रीढ़ के अधिकतम करीब हो जाए। इससे पेट की पांचों अग्नियां- यकृत, आमाशय, पैंक्रियाज, तिल्ली और छोटी आंत, सभी एक साथ सक्रिय होती हैं।

लाभ: डिंब ग्रंथियां यानी ओवरीज कई तरह के हार्मोन उत्पादन का स्रोत हैं। अगर डिंब ग्रंथियां सही तरह से काम न करें तो महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे भावनाओं के असंतुलन, मासिक धर्म होने पर चिड़चिड़ापन और घबराहट जैसी समस्याएं होने लगती हैं। डिंब ग्रंथियों को स्वस्थ रखना स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे में उड्डियान बंध लाभकारी आसन है। इस आसन को करने से मेनोपॉज के बाद भी गर्भाशय स्वस्थ रहता है।

वज्रासन

विधि: नितंबों पर समान वजन देकर बैठ जाएं। दोनों हाथों को घुटने पर रखकर शरीर को एकदम ढीला छोड़ दें। घुटने के नीचे पतला तकिया रख लेने से यह आसन करना आसान हो जाता है। 15 से 30 मिनट इस अवस्था में बैठें।

लाभ: पेल्विक एरिया पर दबाव पड़ने से महिलाओं की गर्भाशय ग्रंथि प्रभावित होती है। उसमें रक्त का प्रवाह तेज होता है जिससे महिलाओं में बांझपन की समस्या भी दूर होता है। वज्रासन महिलाओं और पुरुषों दोनों की हार्मोन प्रणाली को ठीक करता है। इससे मेनोपॉज के बाद गर्भाशय लटकने जैसी भयंकर बीमारी से, जिसे कांच आने का रोग या प्रोलैप्स ऑफ रेक्टम कहते हैं, बचा जा सकता है। पैरों में वैरीकोज वेंस की समस्या भी वज्रासन से दूर होती है।

मंडूकासन

विधि: वज्रासन में बैठकर दोनों हाथ के अंगूठों को मुट्ठियों में बंद कर लें। दोनों मुट्ठियों को इस तरह मिलाएं कि अंगुलियों के जोड़ आपस में सटे हों। मुट्ठियों को नाभि से ऊपर आमाशय पर रखें। श्वांस भरें। धीरे-धीरे श्वांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। गर्दन सीधी रखें, आमाशय, यकृत, पैंक्रियाज पर मुट्ठियों से दबाव बनाएं। इस स्थिति में कुछ देर रुकें। फिर सांस भरते हुए वापस आएं। सुबह-शाम खाली पेट 10-11 बार इस आसन को करें।

लाभ: महिलाओं में मूत्राशय और प्रजनन अंगों से जुड़ी समस्याएं आम हैं। मंडूकासन से मूत्र रोग दूर होते हैं, मासिक धर्म की अनियमितताओं और दर्द से भी मुक्ति मिलती है। मंडूकासन प्रजनन अंग को स्वस्थ करता है। इससे रीढ़ लचीली बनती है। मधुमेह के रोगियों के लिए तो यह बेहतरीन आसन है।

इन सभी आसनों के नियमित अभ्यास से आपको शारीरिक समस्याओं से छुटकारा तो मिलेगा, आप फिट भी बनेंगी।

(ये रिपोर्ट कुमार राधारमण, योग विशेषज्ञ से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है।)

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