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World Malaria Day 2019 : मलेरिया के लक्षण, उपचार और बचाव के तरीके

World Malaria Day 2019 : आज भी मलेरिया से हर साल लाखों लोग बीमार होते हैं। हालांकि इसके ट्रीटमेंट के लिए मेडिसिन उपलब्ध है लेकिन इससे बचाव के लिए सावधान रहना ही सबसे प्रभावी उपाय है। मलेरिया के लक्षण, इलाज और इसको फैलने से रोकने के उपायों के बारे में जानिए।

World Malaria Day 2019 : मलेरिया के लक्षण, उपचार और बचाव के तरीके

World Malaria Day 2019 : आज भी मलेरिया से हर साल लाखों लोग बीमार होते हैं। हालांकि इसके ट्रीटमेंट के लिए मेडिसिन उपलब्ध है लेकिन इससे बचाव के लिए सावधान रहना ही सबसे प्रभावी उपाय है। मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों में से एक है-मलेरिया, जिसने हमारे देश में ही नहीं पूरी दुनिया में अपने पैर जमाए हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक हर साल करीब 500 मिलियन लोग मलेरिया बुखार की गिरफ्त में आते हैं और 3 मिलियन लोग मौत का शिकार भी हो जाते हैं। मलेरिया के लक्षण, इलाज और इसको फैलने से रोकने के उपायों के बारे में जानिए...

मलेरिया के कारण

मलेरिया एक संक्रामक बीमारी है, जो प्लाज्मोडियम नामक परजीवी से होती है। यह परजीवी मनुष्य के शरीर तक पहुंचाता है मादा एनोफिलीज मच्छर। अनुसंधानों में साबित हो गया है कि मच्छरों के काटने के अलावा मलेरिया का परजीवी गर्भवती महिलाओं के ब्लड से नवजात शिशुओं को भी संक्रमित करसकता है। डिस्पोसेबल इंजेक्शन का इस्तेमाल ना करने की स्थिति में भी एक स्वस्थ व्यक्ति को यह अपना शिकार बना सकता है।

मलेरिया के संक्रमण का चक्र

मलेरिया के इन परजीवियों के संक्रमण का एक चक्र होता है। मलेरिया पीड़ित व्यक्ति से एनोफिलीज मच्छर में और संक्रमित मच्छर से स्वस्थ व्यक्ति में पहुंचता है। मादा एनोफिलीज मच्छर जब किसी मलेरिया के रोगी को काटती है तो उस व्यक्ति के खून में मौजूद मलेरिया के प्लाज्मोडियम परजीवियों को भी चूस लेती है और खुद भी संक्रमित हो जाती है। मच्छर के शरीर में पहुंचे मलेरिया के परजीवी 8-10 दिन में मलेरिया फैलाने में सक्षम हो जाते हैं।

जब ये संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं, तो अपनी लार के साथ मलेरिया परजीवी उस व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं। ये परजीवी स्वस्थ व्यक्ति के लीवर में पहुंच कर तेजी से फैलने लगते हैं और ब्लड में पहुंचकर रेड ब्लड सेल्स को नष्ट करने लगते हैं। जिससे ब्लड प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं और संक्रमित व्यक्ति मलेरिया की चपेट में आ जाता है।

मलेरिया के प्रमुख लक्षण

आमतौर पर मलेरिया का संक्रमण होने के 10 दिन बाद मलेरिया के लक्षण नजर आते हैं। मलेरिया के बुखार में उतार-चढ़ाव आता रहता है। 24 घंटें में 3-4 घंटे के लिए अचानक आता है। इस दौरान तेज कंपकंपी के साथ बहुत ठंड लगती है तो कभी बहुत गर्मी लगती है, पसीना आने लगता है और बुखार उतरा महसूस होता है। लेकिन यह उतार-चढ़ाव रोगी के इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है। इम्यूनिटी कम होने से वह बहुत कमजोरी महसूस करता है औैर उसे सिर दर्द, बदन दर्द की शिकायत होती है।

इसके अलावा तेज बुखार, जी मिचलाना, उल्टी, कमजोरी, भूख न लगना, खून की कमी होना, हाथ पैर में ऐंठन, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना इसके लक्षण हैं। कई बार समुचित उपचार के अभाव में मलेरिया सीवियर रूप ले लेता है और रेागी के मस्तिष्क और शारीरिक तंत्र को प्रभावित करता है। इससे एनीमिया, किडनी फेलियर, कार्डियोवैस्कुलर में गड़बड़ी से पक्षाघात या लकवा, लो ब्लड प्रेशर या फिर सेरेबल मलेरिया भी हो सकता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति कोमा मेंपहुंच सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है।

डायग्नोसिस

बुखार होने पर आमतौर पर पैरासिटामॉल जैसी दवाइयां दी जाती हैं। जो बुखार से तो राहत पहुंचाती हैं लेकिन मलेरिया बुखार के लक्षणों की पहचान होने पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है। डॉक्टर माइक्रोस्कोपिक ब्लड टेस्ट करके मलेरिया का पता लगाते हैं। इसमें रोगी के ब्लड में प्लाज्मोडियम परजीवी की किस्म का पता लगाने के लिए पैरीफरल स्मीयर स्लाइड टेस्ट किया जाता है।

मलेरिया का उपचार

रोगी की स्थिति के आधार पर एंटी मलेरियल मेडिसिन का 3 से 5 दिन का कोर्स कराया जाता है, जिसमें क्लोरोक्विन टेबलेट, प्राइमाक्विन, डोक्सइसीलाइन, एमेफ्लोक्विन दवाइयां दी जाती हैं। अगर रोगी की स्थिति संभल नहीं पाती तो उसे आरटीसुनेट और क्विनिन टेबलेट दी जाती है। गर्भवती महिला में मलेरिया होने के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह से तुरंत ट्रीटमेंट शुरू करना चाहिए। उन्हें आयरन और विटामिंस की अतिरिक्त खुराक भी देनी पड़ती है।

मलेरिया के बचाव के उपाय

-मलेरिया बुखार से बचने के लिए जरूरी है अपने घर के आस-पास पानी जमा न होने दिया जाए और आवश्यक साफ-सफाई रखें।

- अपने घर में कूलर, गमलों आदि में पानी इकट्ठा न होने दें। गड्ढे हों तो मिट्टी-पत्थर से भर दें। नालियों में नियमित तौर पर डीडीटीए, बीएचसी पाउडर जैसे कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करें।

-घर के अंदर तुलसी, पुदीना, अजवायन, मेहंदी, लेमनग्रास, गेंदा, चमेली जैसे औषधीय पौधा लगाएं। इनकी महक से मच्छर दूर भागते हैं।

-घर में मॉस्कीटो कॉयल का प्रयोग करें, जिससे मच्छर घर से बाहर भाग जाएं। मच्छरों के प्रवेश को रोकने के लिए घर के दरवाजों खिड़कियों पर जाली लगवाएं।

-सोते समय मच्छरदानी जरूर लगाएं।

-सबसे जरूरी है कि मच्छर काटने से बचा जाए। इसके लिए आप अपने शरीर को कवर करके रखें, पूरी बाजू और पूरी पैंट पहनें। मुंह, हाथों या दूसरे खुले अंगों पर ऑडोमॉस क्रीम या सरसों, नीम, नीबू, लैवेंडर जैसे तेल लगाएं।

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