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ट्रैवल लूडो, चेस और सांप-सीढ़ी गेम्स, पजल हैं या खिलौने, सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

एक्साइज टैरिफ ऐक्ट 1985 के मुताबिक एजुकेशनल टॉएज, पजल्स और अन्य खिलौने बनाने और बेचने पर कोई ड्यूटी नहीं लगती।

ट्रैवल लूडो, चेस और सांप-सीढ़ी गेम्स, पजल हैं या खिलौने, सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट जल्द ही एक बेहद पेचीदा मामले की सुनवाई करने जा रहा है। कोर्ट को यह तय करना होगा कि ट्रैवल लूडो, ट्रैवल चेस, सांप-सीढ़ी और जूनियर मनॉपली खिलौने हैं, गेम्स या फिर पजल। खिलौने बनाने वाली कंपनी फनस्कूल इंडिया के लिए यह मामला काफी गंभीर है। अगर कोर्ट ने तय किया उसके ये प्रॉडक्ट खिलौने न होकर ऐसी गेम्स हैं, जिनमें काफी हद प्रतियोगिता की भावना की जरूरत होती है, तो कंपनी को इनकी कीमत के हिसाब से 16% की ड्यूटी चुकानी होगी। और अगर कोर्ट तय करता है कि ये सिर्फ खिलौने हैं, तो कंपनी ड्यूटी चुकाने से बच जाएगी।
एक्साइज टैरिफ ऐक्ट 1985 के मुताबिक एजुकेशनल टॉएज, पजल्स और अन्य खिलौने बनाने और बेचने पर कोई ड्यूटी नहीं लगती। गेम्स, टेबल या पार्लर गेम्स और सभी बोर्ड या डाइस वाली गेम्स टैक्सेबल हैं। पार्लर में खेली जाने वालीं गेम्स, जैसे कैरम, लूडो और चेस टैक्सेबल हैं।सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि बेहद छोटे साइज के लूडो, चेस बोर्ड जैसे खिलौने गेम माने जाएं या खिलौने।
सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि बेहद छोटे साइज के लूडो, चेस बोर्ड जैसे खिलौने गेम माने जाएं या खिलौने।कंपनी द्वारा फाइल की गई याचिका में कहा गया है कि कस्टम्स एक्साइज ऐंड सर्विस टैक्स अपेलेट ट्राइब्यूनल(सीएएसटीएटी) ने उसके 18 प्रॉडक्ट्स को गेम्स की कैटिगरी में डाल दिया है। कंपनी का कहना है कि एक्साइज डिपार्टमेंट ने इन प्रॉडक्ट्स पर गलत मानक लागू किए हैं। यह याचिका 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसे कोर्ट ने जांचने के लिए स्वीकार कर लिया है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, इस मामले के अन्य तथ्य-
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