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Budget 2019 Expectations : मोदी बजट से अन्नदाताओं को ये हैं उम्मीदें

आंतरिम बजट में किसानों के लिए सरकार ने 6000 रुपए देने की स्कीम लागू की। दूसरी सरकार में आते ही किसान सम्मान निधि स्कीम का विस्तार 14.5 करोड़ परिवारों तक कर दिया। सरकार के इस कदम से उम्मीद की जा रही कि वह किसानों के लिए दी जा रही इस राशि में बढ़ोत्तरी करेगी। इसे 6000 के बजाय 8000 सलाना किया जा सकता है।

Budget 2019 Expectations : मोदी बजट से अन्नदाताओं को ये हैं उम्मीदें
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Budget 2019 Expectations Income Of Farmers Budget 2019-20 India

General Budget 2019 : कृषि प्रधान इस देश में 5 जुलाई को भाजपा (BJP) अपने दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट (Union Budget 2019) पेश करेगी। राजनीति और किसान का आपसी जोड़ हमेशा से रहा है। हर बजट की तरह इस पूर्ण बजट (Aam Budget 2019) से किसानों को खासी उम्मीद है।

मोदी सरकार ने कृषि में व्यापक सुधार करने के लिए हाई पावर कमेटी (High power committee) का गठन किया है। साथ ही 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने का दंभ भरते हैं। इसलिए सरकार के इस बजट से उम्मीद की जा रही कि इस बजट में किसानों के प्रति उनका प्यार योजनाओं के रूप में बाहर आएगा।

इसी साल के फरवरी महीने में पेश किए गए आंतरिम बजट में किसानों के लिए सरकार ने 6000 रुपए देने की स्कीम लागू की। दूसरी सरकार में आते ही किसान सम्मान निधि स्कीम (Kisan Samman Nidhi Scheme) का विस्तार 14.5 करोड़ परिवारों तक कर दिया। सरकार के इस कदम से उम्मीद की जा रही कि वह किसानों के लिए दी जा रही इस राशि में बढ़ोत्तरी करेगी। इसे 6000 के बजाय 8000 सलाना किया जा सकता है। इससे किसानों का उत्साह बढ़ेगा।


सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जो हाई पावर कमेटी का गठन किया है वह अपनी रिपोर्ट 2 महीने में देगी। मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों वाली इस कमेटी में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस कन्वीनर होंगे। इस कमेटी में हरियाणा, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश के सीएम और केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। जो किसानों के हितों के लिए काम कर रहे हैं।

गौर करने वाली बात ये भी है कि 2022 तक सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करना तो चाहती है पर इसके लिए अभी तक कोई बड़ी योजना नहीं लाई है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (National Sample Survey Organization) के आंकड़ो के मुताबिक आज से 6 साल पहले यानी 2013 में देश के किसानों की औसत मासिक आय 6426 रुपए थी और खर्च 6223 था। कृषि मामलों के जानकार देविंदर शर्मा के मुताबिक 2016 में देश के 17 राज्यों में किसानों की सलाना आय महज 20 हजार रुपए है।


उनके अनुसार किसानों की आय में इजाफा करने के लिए कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज की जगह कमीशन फॉर फार्मर्स इनकम वेलफेयर का गठन करना चाहिए। फिलहाल सरकार की तरफ से इस मसले पर किसी तरह के बयान नहीं आए। एक जो प्रमुख बात है वो ये कि किसानों को कर्ज के दबाव में आत्महत्या से रोका जाना।

उम्मीद की जा रही कि किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज मुक्त मिलने वाले लोन की लिमिट 3 लाख रुपए तक की जा सकती है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान रैलियों कहा था कि दोबारा सत्ता में आने पर किसान क्रेडिट कार्ड पर 1 लाख तक का लोन बिना ब्याज दिया जाएगा। सरकार बनने के बाद किसानों की उम्मीद और बढ़ गई। विशेषज्ञों की माने तो सरकार एक लाख तक का लोन बिना किसी ब्याज के देने की घोषणा कर सकती है।

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