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सावधान! विटामिन डी की कमी से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां

हर व्यक्ति में विटामिन डी की कमी अलग-अलग होती है

सावधान! विटामिन डी की कमी से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां
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अपना ज्यादातर समय ऑफिस के अंदर बिताने वाले लोगों को विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है, जिसे 'सनशाइन विटामिन' के नाम से भी जाना जाता है। कनाडा के शोधकर्ताओं ने यह जानकारी दी।

उन्होंने पाया कि हर व्यक्ति में विटामिन डी की कमी अलग-अलग होती है, जो लोग ज्यादातर समय अंदर रहते हैं उनको अन्य लोगों के विपरीत कम मिलता है विटामिन डी।

बड़े पैमाने पर लोगों में विटामिन डी की कमी है। प्रमुख शोधकर्ता ने कहा कि अब हम कह सकते हैं कि नौकरी एक ऐसा कारक है, जो यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति में विटामिन डी की कमी हो सकती है या नहीं।

विटामिन डी कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और दूध व अन्य उत्पादों में इसे जोड़ा जाता है। त्वचा के सूरज की रोशनी के संपर्क में आने पर भी शरीर विटामिन डी का उत्पादन करता है, इसीलिए इसे सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है।

पूर्व में प्रकाशित हो चुके 71 अध्ययनों की समीक्षा की, जिसमें उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों में रहने वाले 53,400 से अधिक लोग शामिल थे।

उन्होंने पाया कि ऑफिस के अंदर काम करने वाले तीन चौथाई से अधिक कर्मचारियों और 72 फीसद हेल्थ केयर स्टूडेंट्स में भी विटामिन डी की कमी पाई गई। विटामिन डी की परिभाषा के अनुसार, 91 फीसद लोगों के शरीर में विटामिन डी की कमी तो नहीं थी, लेकिन उनके शरीर में जरूरी स्तर से कम विटामिन था।

वहीं, आउटडोर काम करने वाले लोगों के शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मौजूद थी।

यह होता है विटामिन डी की कमी से

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की समंथा हेलर ने कहा कि विटामिन डी की कमी से हृदय रोग, कुछ तरह के कैंसर, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, मोटापे और इम्यून डिस्फंक्शन की समस्या होती है। सनस्क्रीन के ज्यादा उपयोग और घर के बाहर धूप में कम समय बिताने के कारण लोगों के शरीर में विटामिन डी नहीं बनता है।

मात्रा को लेकर विवाद

शोधार्थियों ने कहा, विटामिन डी की कितनी मात्रा लेनी चाहिए, इसको लेकर विवाद है। अमेरिका के डायटेरी सप्लीमेंट्स ऑफिस के द्वारा निर्धारित स्तरों के अनुसार एक साल से 70 साल की उम्र के लोगों को रोजाना 600 आईयू और इससे वृद्ध लोगों को 800 आईयू विटामिन डी लेना चाहिए।

सूर्य की रोशनी से विटामिन डी लेना प्राकृतिक तरीका है, लेकिन बहुत अधिक देर तक धूप लेने से स्किन कैंसर होने का भी खतरा रहता है।

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